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Corona Vaccine: डॉ. रणदीप गुलेरिया बोले- कोविड वैक्सीन नहीं, अनियमित जीवनशैली हार्टअटैक के बढ़ते मामलों की वजह

Sat, 05 Jul 2025 08:09 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 05 Jul 2025 08:09 AM IST
सार

एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कोरोना वैक्सीन और हृदय गति के बीच के संबंध को सिरे से नकार दिया। डॉ. गुलेरिया ने जीवनशैली और स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव के बारे में विस्तार से बात की। आइए पढ़ते हैं उनके साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश...

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Randeep Guleria said Irregular lifestyle not corona vaccine reason behind increasing cases of heart attack
हृदय रोग - फोटो : Freepik.com

विस्तार

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के संयुक्त अध्ययन ने पता चला है कि युवाओं में कोरोना वैक्सीन और अचानक हृदय गति रुकने के बीच कोई संबंध नहीं है। एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी शुक्रवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत की।

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सवाल: आईसीएमआर और एम्स के संयुक्त अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला है कि युवाओं में कोरोना वैक्सीन और अचानक हृदय गति रुकने के बीच कोई संबंध नहीं है। आप इस परिणाम को कैसे देखते हैं?
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- विभिन्न वर्गों में हृदय संबंधी समस्याओं, अचानक हृदय गति रुकने के कारण युवाओं की मृत्यु के बारे में बहुत चिंता व्यक्त की गई है और एक मुद्दा यह भी था कि क्या इसका कोरोना वैक्सीन से कोई संबंध हो सकता है। आईसीएमआर और एम्स की ओर से किए गए इन अध्ययनों ने स्पष्ट रूप से दिखाया है कि टीकाकरण और अचानक हृदय गति रुकने के बीच कोई संबंध नहीं है। 
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अगर मैं व्यक्तिगत अनुभव से कहूं तो हम कोरोना से पहले भी युवाओं में हृदय संबंधी समस्याएं देखते रहे हैं और यह हमेशा चिंता का विषय रहा है। पिछले कुछ दशकों में हमारी जीवनशैली में तेजी से बदलाव, ऐसी आदतों से संबंधित हो सकता है जो अब अधिक अस्वस्थ हो गई हैं। बहुत अधिक वसायुक्त आहार खाना, जिसमें असंतृप्त वसा हो, हमारा आहार हरी पत्तेदार सब्जियों और ताजे फलों से बदलकर फास्ट फूड पर चला गया है।

दूसरा, व्यायाम कम हो गया है, ज्यादातर युवा डेस्क जॉब कर रहे हैं और व्यायाम नहीं कर रहे हैं, और इससे मोटापा या वजन बढ़ रहा है। इसलिए जीवनशैली, आहार और आनुवंशिक प्रवृत्ति के संयोजन ने पश्चिमी आबादी की तुलना में हमारी आबादी में लगभग 10 साल पहले दिल के दौरे और दिल की समस्याओं को जन्म दिया है। इसका और टीकाकरण के बीच वास्तव में कोई संबंध नहीं है, यह अन्य कारणों से अधिक संबंधित है।

सवाल : यह कब और क्यों संबंधित हो गया? क्या टीके का मानव शरीर पर नकारात्मक या सकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
- सभी दवाओं, चाहे वह टीके हों या दवा, के दुष्प्रभाव होते हैं। जब टीके की बात आती है, क्योंकि वे स्वस्थ लोगों को दिए जाते हैं, तो दुष्प्रभावों के लिए बहुत बारीकी से निगरानी की जाती है। यह उद्योग, सरकारों और एक पूरी समिति द्वारा किया जाता है, जो टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव, एईएफआई को देखती है। उन्होंने सभी वैक्सीन से संबंधित समस्याओं को स्पष्ट रूप से देखा है, और वह डेटा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि टीकों के दुष्प्रभाव बहुत कम हैं, और लाभ बहुत अधिक हैं। इसलिए वास्तव में यह सुझाव देने के लिए कोई डेटा नहीं है कि टीके नुकसान पहुंचा रहे हैं। मैं कहूंगा कि उन्होंने कोविड 19 के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक प्रमुख भूमिका निभाई, और हम वास्तव में कोविड 19 पर अधिक तेजी से विजय प्राप्त करने में सक्षम थे।

सवाल : ऐसी कई मौतें हुई हैं जिनका कोई कारण नहीं पाया जा सका। उनके दिल और फेफड़े दोनों ठीक से काम कर रहे थे। तो आप किस तरह का कारण देखते हैं?

- जैसा कि मैंने कहा, जो मौतें हो रही हैं, वे हमारी जीवनशैली और निष्क्रियता से अधिक संबंधित हैं। इसलिए मैं कहूंगा कि लोगों को अपनी जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों को बदलना चाहिए, अपने वजन का ध्यान रखना चाहिए और खान-पान के बारे में सावधान रहना चाहिए। पश्चिमी खान-पान की ओर जाने की बजाय पारंपरिक भारतीय खान-पान पर वापस लौटना चाहिए। यह बहुत महत्वपूर्ण है। कोविड वैक्सीन और दिल के दौरे के बीच कोई संबंध नहीं है। यह अन्य कारणों से अधिक संबंधित है। लेकिन हां, युवा लोगों को समस्या हो रही है, और हमें जागरूकता बढ़ाने पर काम करने की जरूरत है। 

सवाल : एंटी-एजिंग दवाओं का क्या प्रभाव है, और क्या उन्हें प्रतिबंधित करने की आवश्यकता है?
- एंटी एजिंग दवा एक बड़ा उद्योग बन रही है, लेकिन यह अनियंत्रित है, क्योंकि ऐसा करने के लिए कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया गया है, और उनमें से कई के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, खासकर अगर उन्हें लंबे समय तक लिया गया हो। इसलिए मुझे लगता है कि एंटी एजिंग दवाओं पर कानून बनाने और यह देखने की आवश्यकता है कि उन्हें उचित विवेकपूर्ण तरीके से दिया जाए और उनका दुरुपयोग न हो। यह बाजार में उपलब्ध बड़ी संख्या में दवाओं पर लागू होता है। एंटी एजिंग से लेकर कभी-कभी मांसपेशियों के निर्माण तक, जिनका उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जाता है। अगर वे उपयोगी नहीं हैं और वे नुकसान पहुंचा रहे हैं, तो निश्चित रूप से ऐसी दवाओं पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है।

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