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राणा सफवी को यमीन हजारिका पुरस्कार, भारतीय संस्कृति में उनके योगदान के लिए दिया सम्मान
Thu, 24 Sep 2020 02:20 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Sep 2020 02:20 AM IST
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राणा सफवी
- फोटो : facebook
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पूर्वोत्तर से केंद्रीय पुलिस सेवा में आने वाली पहली महिला व मशहूर इतिहासकार राणा सफवी को यमीन हजारिका की स्मृति में स्थापित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। संस्कृति, इतिहास और भारत के स्मारकों पर कई किताबें प्रकाशित कर चुकीं सफवी को भारतीय संस्कृति में उनके समन्वयात्मक योगदान के लिए चुना गया।
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असम से आने वाली हजारिका का चयन 1977 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप, दमन और दीव और दादरा नगर हवेली पुलिस सेवा (दानिप्स) में हुआ था।
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वह चाणक्यपुरी (दिल्ली) की सहायक पुलिस आयुक्त रहीं और बाद में राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस उपायुक्त (महिलाओं के खिलाफ अपराध) का पद भी संभाला। दिल्ली में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के दौरान वह तीन प्रमुख थानों की प्रभारी रही थीं। 1999 में 43 वर्ष की उम्र में कैंसर से उनका निधन हो गया था।
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यह सम्मान समारोह डिजिटल रूप से आयोजित किया गया। इसमें हजारिका की बेटी हुमा ने दिल्ली में सफवी को रजत स्मृति चिन्ह दिया। इस मौके पर असम के पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत प्रमुख अतिथि थे। यमीन हजारिका पुरस्कार 2015 से प्रत्येक वर्ष महिला पेशेवरों को उनके योगदान के लिए दिया जाता है।