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'बड़ी मछलियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?': राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस का हमला, जांच पर उठाए सवाल
Tue, 03 Nov 2026 05:26 PM IST
अमन मौर्या
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 03 Nov 2026 05:26 PM IST
सार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच पूरी घोषित करने पर यूपी सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर कार्रवाई न होने का आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।
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जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चंदा चोरी की जांच को पूरा घोषित करने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जांच मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने में विफल रही है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र जांच की मांग की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर कांग्रेस नेता ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भाजपा सरकार ने बड़ी मछलियों पर कार्रवाई किए बिना जांच पूरी बताकर जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया है।
कांग्रेस नेता ने क्या आरोप लगाए?
जयराम रमेश ने कहा कि क्या प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश में लोकलज्जा को बिलकुल छोड़ चुके हैं? श्रीराम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और मेहनत की कमाई का चढ़ावा चढ़ाया। आज उसी चढ़ावे की चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार कह रही है कि जांच पूरी हो गई, आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो गई और सभी चढ़ावे तथा बहुमूल्य वस्तुओं का हिसाब मिल गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर देना ही पूरे मामले की जांच है? बाकी बड़े गुनहगार आरोपी क्यों नहीं बनाए गए?
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सरकार की जिम्मेदारी पर क्या बोले?
क्या 105 सीसीटीवी घटनाओं और करीब 79.85 लाख रुपए की बरामदगी के बाद सरकार की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? क्या उन लोगों की जवाबदेही तय करने की जरूरत नहीं है जिनके जिम्मे मंदिर के चढ़ावे की सुरक्षा, गिनती, हिसाब-किताब और निगरानी थी, जिन्होंने चोरी को रोकने की कोई कोशिश नहीं की?
सरकार की दलील का सीधा अर्थ है कि उसकी अपनी एसआईटी ने जितनी जांच की सरकार उसे पर्याप्त मानती है। लेकिन एसआईटी उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस एजेंसी है। हमारा मानना है कि सरकार ने एसआईटी की जांच को पूर्ण बताकर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया है। अगर नहीं तो सरकार को बताना चाहिए कि उसने पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरी पड़ताल की जरूरत क्यों नहीं समझी?
सीसीटीवी फुटेज पर क्या कहा?
45 दिनों में 105 चोरी की घटनाएं सीसीटीवी पर रिकॉर्ड होना कोई मामूली बात नहीं हैं। जब करोड़ों लोगों ने हजारों करोड़ चढ़ावा चढ़ाया पर केवल 79.85 लाख रुपए की बरामदगी की खबर है। 105 घटनाओं में कुल कितनी नकदी निकाली गई? कितनी रकम की वसूली बाकी है? क्या सरकार पूरा हिसाब सार्वजनिक करेगी? सरकार बताए कि क्या सिर्फ 105 सीसीटीवी फुटेज की मौजूद हैं, बाकी सीसीटीवी फुटेज कहां हैं? सवाल यह है कि वो सीसीटीवी फुटेज में दर्ज 105 चोरियां कितने दिनों की हैं?
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर कांग्रेस नेता ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भाजपा सरकार ने बड़ी मछलियों पर कार्रवाई किए बिना जांच पूरी बताकर जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया है।
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कांग्रेस नेता ने क्या आरोप लगाए?
जयराम रमेश ने कहा कि क्या प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश में लोकलज्जा को बिलकुल छोड़ चुके हैं? श्रीराम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और मेहनत की कमाई का चढ़ावा चढ़ाया। आज उसी चढ़ावे की चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार कह रही है कि जांच पूरी हो गई, आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो गई और सभी चढ़ावे तथा बहुमूल्य वस्तुओं का हिसाब मिल गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर देना ही पूरे मामले की जांच है? बाकी बड़े गुनहगार आरोपी क्यों नहीं बनाए गए?
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सरकार की जिम्मेदारी पर क्या बोले?
क्या 105 सीसीटीवी घटनाओं और करीब 79.85 लाख रुपए की बरामदगी के बाद सरकार की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? क्या उन लोगों की जवाबदेही तय करने की जरूरत नहीं है जिनके जिम्मे मंदिर के चढ़ावे की सुरक्षा, गिनती, हिसाब-किताब और निगरानी थी, जिन्होंने चोरी को रोकने की कोई कोशिश नहीं की?
सरकार की दलील का सीधा अर्थ है कि उसकी अपनी एसआईटी ने जितनी जांच की सरकार उसे पर्याप्त मानती है। लेकिन एसआईटी उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस एजेंसी है। हमारा मानना है कि सरकार ने एसआईटी की जांच को पूर्ण बताकर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया है। अगर नहीं तो सरकार को बताना चाहिए कि उसने पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरी पड़ताल की जरूरत क्यों नहीं समझी?
सीसीटीवी फुटेज पर क्या कहा?
45 दिनों में 105 चोरी की घटनाएं सीसीटीवी पर रिकॉर्ड होना कोई मामूली बात नहीं हैं। जब करोड़ों लोगों ने हजारों करोड़ चढ़ावा चढ़ाया पर केवल 79.85 लाख रुपए की बरामदगी की खबर है। 105 घटनाओं में कुल कितनी नकदी निकाली गई? कितनी रकम की वसूली बाकी है? क्या सरकार पूरा हिसाब सार्वजनिक करेगी? सरकार बताए कि क्या सिर्फ 105 सीसीटीवी फुटेज की मौजूद हैं, बाकी सीसीटीवी फुटेज कहां हैं? सवाल यह है कि वो सीसीटीवी फुटेज में दर्ज 105 चोरियां कितने दिनों की हैं?