{"_id":"59481a244f1c1b69468b456e","slug":"ram-nath-kovind-as-presidential-candidate-save-bjp-s-up-s-political-land","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कोविंद के जरिए भाजपा ने चली यूपी की सियासी जमीन बचाए रखने की चाल ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
कोविंद के जरिए भाजपा ने चली यूपी की सियासी जमीन बचाए रखने की चाल
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 20 Jun 2017 12:08 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
राम नाथ कोविंद को राजग का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने से बेशक भाजपा के धुरंधर नेताओं के मन में मायूसी छलकी है। मगर पीएम मोदी और अमित शाह ने कोविंद के जरिए यूपी की सियासी जमीन बचाए रखने की चाल चली है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले 280 सीटों में से एक चौथाई सीटे महज यूपी से मिली थी।
विज्ञापन
मोदी लहर में पार्टी ने 70 से ज्यादा लोकसभा सीटें जीत कर सबको चौंका दिया था। अब 2019 में मोदी की दोबारा से ताजपोशी के प्रयास में भी भाजपा की नजर यूपी पर ही है। पार्टी अपने आधार को हर हाल में बचाए रखना चाहती हैै। यही वजह है कि पार्टी के दिग्गज नेताओं को दरकिनार कर भाजपा ने कोविंद के रूप में दलित कार्ड खेला है।
विज्ञापन
2019 की चुनौती के मद्देनजर भाजपा यूपी में दलित बिरादरी को हर हाल में साधना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी ने राम नाथ कोविंद को अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है। ताकि सूबे के दलित मतों को संदेश दे सके। पार्टी को लगता है कि मायावती और अखिलेश यादव के एकजूट होने से यूपी में उसकी स्थिति उल्ट हो सकती है। इसलिए भाजपा ने मायावती के मूल वोट में सेंधमारी का बडा दांव चल दिया है।
विज्ञापन
दलित नेता के रूप में कोविंद की सराहना कर चूके हैं पीएम मोदी
भाजपा ने कोविंद के नाम का एलान बेशक सोमवार को किया है। मगर सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी के दिल में कोविंद का नाम तीन माह पहले ही उतर गया था। फरवरी माह में एक कार्यक्रम में आए कोविंद को बुलाकर पीएम मोदी ने व्यक्तिगत मुलाकात की थी।
बताया जा रहा है कि किसी पीएम मोदी तभी से किसी दलित को देश का अगला राष्ट्रपति बनाने का मन बना चूके थे। लेकिन उन्होंने वह राज छूपाए रखा। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति पद के लिए दलित नेता के रूप में मोदी ने कोविंद के अलावा थावर चंद गहलौत और अन्य तीन नामों पर मंथन किया था। किसी न किसी बहाने उन्होंने इन नेताओं को बलुाकर चर्चा भी की। लेकिन पीएम मोदी के दिल में कोविंद ही सबसे योग्य उम्मीदवार के रूप में जगह बना पाए। जाति और योग्यता के अलावा उनके शांत एवं गंभीर स्वभाव ने भी चयन में अहम भूमिका निभाई है।
कोविंद के चयन के मामले में राजनीतिक पंडित बेशक गच्चा खा गए हैं। मगर पीएम मोदी कई दफे कोविंद की सराहना कर चूके हैं। 17 अगस्त् 2015 को कोविंद को बिहार का राज्यपाल बनाए जाने के बाद पीएम मोदी ने ट्विट कर कहा था कि कोविंद ने अपना पूरा जीवन दलित और पिछडे समुदाय के कार्य में गुजारा है।
शाह ने भी दिलाई कोविंद के दलित होने की याद
राम नाथ कोविंद को राजग की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार का एलान करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने भी कोविंद की जाति से सबको अवगत कराया। शाह ने कहा कि गरीब एवं दलित परिवार में जन्मे कोविंद ने मेहनत के बल पर राजनीति में अपनी मुकाम हासिल की है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कोविंद ने दलित और पिछडों के उत्थान के लिए सराहनीय कार्य किए हैं।
दरअसल भाजपा चाहे विकास और सबके साथ का बेशक दावा करे, मगर उसे इस बात का अहसास है कि राजनीतिक समीकरण साधे बिना 2019 में मोदी की वापसी दोबारा से संभव नहीं हो सकती है। यही वजह है कि पार्टी ने सरकार के विकास कार्यों को अलावा राजनीतिक समीकरण भी साधने शुरू कर दिए हैं।
कोविंद के दांव को लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भाजपा की ओर से अहम ट्रंप कार्ड माना जा रहा है। लेकिन यह समय तय करेगा की पार्टी का यह दांव कितना निशाने पर लगेगा। क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले दलित मत साधने की कवायद में ही भाजपा ने कोविंद को सूबे का राज्यपाल बनाया था। तब विपक्षी एकजूटता के वजह से भाजपा बूरी तरह हार गई थी। वैसे भाजपा ने कोविंद का कार्ड चलकर विपक्ष की मुश्किलें जरूर बढा दी हैं। विपक्ष के लिए कोविंद का विरोध इतना आसान भी नहीं रहेगा।
बताया जा रहा है कि किसी पीएम मोदी तभी से किसी दलित को देश का अगला राष्ट्रपति बनाने का मन बना चूके थे। लेकिन उन्होंने वह राज छूपाए रखा। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति पद के लिए दलित नेता के रूप में मोदी ने कोविंद के अलावा थावर चंद गहलौत और अन्य तीन नामों पर मंथन किया था। किसी न किसी बहाने उन्होंने इन नेताओं को बलुाकर चर्चा भी की। लेकिन पीएम मोदी के दिल में कोविंद ही सबसे योग्य उम्मीदवार के रूप में जगह बना पाए। जाति और योग्यता के अलावा उनके शांत एवं गंभीर स्वभाव ने भी चयन में अहम भूमिका निभाई है।
कोविंद के चयन के मामले में राजनीतिक पंडित बेशक गच्चा खा गए हैं। मगर पीएम मोदी कई दफे कोविंद की सराहना कर चूके हैं। 17 अगस्त् 2015 को कोविंद को बिहार का राज्यपाल बनाए जाने के बाद पीएम मोदी ने ट्विट कर कहा था कि कोविंद ने अपना पूरा जीवन दलित और पिछडे समुदाय के कार्य में गुजारा है।
शाह ने भी दिलाई कोविंद के दलित होने की याद
राम नाथ कोविंद को राजग की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार का एलान करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने भी कोविंद की जाति से सबको अवगत कराया। शाह ने कहा कि गरीब एवं दलित परिवार में जन्मे कोविंद ने मेहनत के बल पर राजनीति में अपनी मुकाम हासिल की है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कोविंद ने दलित और पिछडों के उत्थान के लिए सराहनीय कार्य किए हैं।
दरअसल भाजपा चाहे विकास और सबके साथ का बेशक दावा करे, मगर उसे इस बात का अहसास है कि राजनीतिक समीकरण साधे बिना 2019 में मोदी की वापसी दोबारा से संभव नहीं हो सकती है। यही वजह है कि पार्टी ने सरकार के विकास कार्यों को अलावा राजनीतिक समीकरण भी साधने शुरू कर दिए हैं।
कोविंद के दांव को लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भाजपा की ओर से अहम ट्रंप कार्ड माना जा रहा है। लेकिन यह समय तय करेगा की पार्टी का यह दांव कितना निशाने पर लगेगा। क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले दलित मत साधने की कवायद में ही भाजपा ने कोविंद को सूबे का राज्यपाल बनाया था। तब विपक्षी एकजूटता के वजह से भाजपा बूरी तरह हार गई थी। वैसे भाजपा ने कोविंद का कार्ड चलकर विपक्ष की मुश्किलें जरूर बढा दी हैं। विपक्ष के लिए कोविंद का विरोध इतना आसान भी नहीं रहेगा।