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राम मंदिर: आखिर इसी समय शिवसेना को क्यों आई अयोध्या की याद

Sat, 24 Nov 2018 06:44 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 24 Nov 2018 06:44 PM IST
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Ram mandir dispute why did the shivsena remember Ayodhya at this time
UddhavThackeray - फोटो : Twitter

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, राम मंदिर के निर्माण का मुद्दा भी गर्माता जा रहा है। सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ अयोध्या पहुंचे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मैं यहां पर कोई राजनीति नहीं करने आया हूं। मैं सोए हुए कुंभकरण (सरकार) को जगाने आया हूं। मोदी सरकार राम मंदिर पर कानून लाए। अब हिंदू चुप नहीं बैठेंगे। 

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उन्होंने कहा कि मुझे राम मंदिर निर्माण का श्रेय नहीं चाहिए। मुझे बस राम मंदिर निर्माण की तारीख चाहिए। हम सब मिलकर राम मंदिर का निर्माण करेंगे। सब साथ आएंगे, तभी मंदिर जल्द बनेगा। उन्होंने पीएम मोदी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि सीना कितने भी इंच का हो, उससे मतलब नहीं है, दिल बड़ा होना चाहिए।   
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हालांकि शिवसेना ने पहले ही ये स्पष्ट कहा था कि वो राम मंदिर के नाम पर वोट नहीं मांगेगी, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि 1992 के बाद शिवसेना को अभी क्यों भगवान राम इतनी शिद्दत से याद आए हैं। दरअसल, 6 दिसंबर 1992 को जब बाबरी मस्जिद तोड़ी गई थी, तब शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने फ्रंटफुट पर आकर इसकी जिम्मेदारी ली थी और बड़े ही शान से कहा था कि बाबरी मस्जिद का तोड़ा जाना उनके लिए गर्व की बात है। लेकिन अब हालात ये हो गए हैं कि भाजपा और शिवसेना साथ तो हैं, लेकिन इसके बावजूद शिवसेना लगातार भाजपा के खिलाफ बोलती रहती है। 
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कभी-कभी तो ऐसा लगने लगता है कि दोनों के बीच अब गठबंधन जल्द ही टूट जाएगा। हालांकि राजनीतिक जानकारों की मानें तो शिवसेना ऐसा करके भाजपा पर दबाव बना रही है और उसे बैकफुट पर लाना चाहती है, ताकि सीटों का समझौता किया जा सके। जानकारों का मानना है कि अगर अयोध्या में उद्धव का जादू चल जाता है तो शिवसेना उत्तर प्रदेश में भी लोकसभा चुनाव के लिए सीटों का दावा पेश कर सकती है। 

एक समय ऐसा भी था जब महाराष्ट्र में शिवसेना को मुख्यमंत्री का पद मिला था लेकिन आज के समय में राज्य में भाजपा का राज है। पिछले कुछ समय से राम मंदिर को लेकर शिवसेना जिस तरह से फ्रंटफुट पर आई है, उससे इतना तो साफ है कि वो अब भाजपा की तरह की तरह ही राम मंदिर को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि आमतौर पर यह मुद्दा भाजपा का माना जाता है। इसी मुद्दे के दम पर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की थी, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि शिवसेना उससे यह मुद्दा हथियाने की कोशिश कर रही है। 

अब जब चुनाव फिर से नजदीक आ रहे हैं तो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का अयोध्या आना इस बात को दर्शाता है कि वो राम मंदिर के निर्माण का मुद्दा इतनी आसानी से भूलने वाली नहीं है, बल्कि वो समय-समय पर भाजपा को इसकी याद दिलाते रहेगी। इससे पहले शिवसेना नेता अरविंद सावंत भी कह चुके हैं कि भाजपा ने 2014 में कश्मीर विवाद, धारा 370 हटाने और अयोध्या में राम मंदिर बनाने का वादा किया था, लेकिन मोदी सरकार को सत्ता में आए 4 साल से ज्यादा बीत गए हैं और अभी तक मंदिर निर्माण का कार्य शुरू भी नहीं हुआ। उन्होंने 1992 की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय बाबरी मस्जिद गिराने की जिम्मेदारी कोई भी नहीं ले रहा था, तब बालासाहब ठाकरे ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। 

'बाबरी मस्जिद गिराना गर्व की बात' 

बता दें कि साल 1993 में बाल ठाकरे ने एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि बाबरी मस्जिद गिराना शर्म की नहीं बल्कि गर्व की बात थी। मंदिर मस्जिद के नीचे था, जिसे हम ऊपर ले आए। उन्होंने कहना था कि भारत में बाबर या जितने भी मुस्लिम शासक आए, उन्होंने हमारे सारे मंदिर गिरा दिए और उसके ऊपर मस्जिदें बनवा दी। अब हमारा कर्तव्य बनता है कि ऐसी मस्जिदों को गिराकर फिर से मंदिरों को ऊपर लाया जाए।  

शिवसेना के कई नेता समय-समय पर राम मंदिर के निर्माण को लेकर आवाजें उठाते रहे हैं और जल्द कानून बनाने की मांग करते रहे हैं। शिवसेना के सांसद संजय राउत ने भी कहा था कि कानून बनाने में कितना समय लगता है, जबकि 17 मिनट में तो हमने बाबरी मस्जिद तोड़ दी थी। उनका कहना है कि केंद्र से लेकर यूपी तक भाजपा की ही सरकार है, लेकिन फिर भी देरी हो रही है।

सरकार जल्द बनाए कानून 

शिवसेना हर वक्त भाजपा को राम मंदिर बनाने का उसका वादा याद दिलाती रहती है। यहां तक कि वो कानून बनाने की मांग कर चुकी है। उसका कहना है कि राम मंदिर का मुद्दा अदालत के माध्यम से कभी हल नहीं हो सकता, क्योंकि यह आस्था से जुड़ा मामला है और लोग इसपर अदालत का फैसला कभी स्वीकार नहीं करेंगे। उसका कहना है कि सरकार इसपर कानून बनाए और शिवसेना भी इसमें उसका पूरा साथ देगी। 

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