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नाराजगी : टिकैत का केंद्र पर हमला, सरकार को संविधान की नहीं बल्कि निजी कंपनियों की परवाह
Wed, 14 Apr 2021 10:21 PM IST
योगेश साहू
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Wed, 14 Apr 2021 10:21 PM IST
सार
इस अवसर पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि वर्तमान सरकार को बाबा साहब के द्वारा लिखित भारत के संविधान की नहीं बल्कि कंपनियों की ज्यादा परवाह और जरूरत है।
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राकेश टिकैत
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है। बुधवार को किसान संगठनों ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 130वीं जयंती मनाई। इस मौके पर बड़ी संख्या में बाबा साहेब के समर्थक भी आंदोलन स्थल पर मौजूद रहे। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत और भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर भी मौजूद थे।
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इस अवसर पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि वर्तमान सरकार को बाबा साहब के द्वारा लिखित भारत के संविधान की नहीं बल्कि कंपनियों की ज्यादा परवाह और जरूरत है। भाजपा वाले तो गलतफहमी में हैं कि देश में उनकी सरकार है। सरकार तो कंपनी की है, भाजपा वाले अपनी पार्टी ही बचा लें, उतना ही बहुत है। देश में जब किसी पार्टी की सरकार होती है तो वह आंदोलनकारियों से बात करती है।
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टिकैत ने बाबा साहेब की जयंती पर देशवासियों से आह्वान करते हुए कहा कि कंपनी राज से 'संविधान बचाओ किसान बचाओ', तभी बाबा साहेब के द्वारा लिखित संविधान की रक्षा होगी, जमीन की रक्षा होगी और अपने स्वाभिमान की रक्षा होगी। पहले एक ईस्ट इंडिया कंपनी देश में आई थी, उसने वर्षों देश को गुलाम बनाए रखा। अब तो जाने कितनी कंपनियां कॉन्ट्रेक्ट के नाम पर देश में प्रवेश कर रही हैं। जिन्हें देश को लूटने का काम सौंपा गया है। अब इनके खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
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जीना कोई बड़ी बात नहीं : टिकैत
उन्होंने कहा कि जीना कोई बड़ी बात नहीं। बड़ी बात है स्वाभिमान से जीना। अधिकार के साथ जीना। संघर्ष करके जीना। मैंने इन बातों को अपने जीवन में आत्मसात कर लिया है। क्योंकि बाबा साहेब अंबेडकर कहते थे कि गुलाम अगर गुलामी का अहसास कर ले, तो वह अपनी बेड़ियां स्वयं काट लेगा।
यह बात मैं किसानों से भी कहता हूं कि जो किसान इस देश की रीढ़ हैं, जो किसान इस देश का अन्नदाता है। जो किसान इस देश का भगवान है, अगर उसके अधिकार भी छीन लिए जाएं तो समझ लेना चाहिए कि वह इस देश में गुलाम हो गया है। गुलाम वही होता है जिसके अधिकार नहीं होते। आज आपके अधिकारों पर डाका पड़ा है। यानी आप आज गुलामी की श्रेणी में आ गए हैं। इसलिए उठो और संघर्ष करो।
संविधान को बचाना जरूरी : चंद्रशेखर
बुधवार को बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती पर गाजीपुर बार्डर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने कहा कि आज के दौर में देश को बचाने के लिए संविधान को बचाना जरूरी है। इस जोर जुल्म की सरकार को सबक सिखाना जरूरी है। हम किसानों के साथ खड़े हैं। बहुजन एकता दिवस के रूप में 'संविधान बचाओ किसान बचाओ' का नारा देकर बाबा साहब को याद किया जा रहा है। यह देश की एक ऐतिहासिक घटना है।
चंद्रशेखर ने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि किसानों के साथ हम कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। सरकार की फूट डालो, राज करो की नीति को देशवासी समझ गए हैं। अब तानाशाही और उत्पीड़न का जवाब देने के लिए हर जाति-बिरादरी का नागरिक एक हो चुका है। आज देश की अखंडता को बचाने रखने की जरूरत है।
इस मौके पर संजीव माथुर ने कहा कि बाबा साहेब ने जमीन के अधिकार को मौलिक अधिकार की श्रेणी में रखा था। आज किसानों की जमीनों को छीना जा रहा है। संविधान के मूल्यों का पालन नहीं हो रहा है। आरक्षण को भी साजिश के तहत समाप्त किया जा रहा है।
भाकियू के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी धर्मेन्द्र मलिक ने बताया कि बाबा साहेब की जयंती पर गाजीपुर बार्डर पर सतपाल चौधरी, जगतार सिंह बाजवा, भाकियू प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन, कमलेश, शशि भूषण, परमजीत कौर, सुरिंदर कौर, विपिन चौधरी, इमरान खान और दुष्यन्त गौतम, राष्ट्रीय सचिव महेंद्र चरौली आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे। संजीव माथुर ने मंच संचालन किया। मुंबई से फिल्म प्रोड्यूसर और आंबेडकर के मानस पुत्र रॉबर्ट भी पहुंचे थे।