Rajya Sabha Election: भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची से सेट किया है '80:20' का एजेंडा, दिया ये खास संदेश
राजनीतिक विश्लेषण अभिषेक तंवर कहते हैं कि तेलंगाना के वरिष्ठ भाजपा नेता डॉक्टर के लक्ष्मण को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने अगले साल होने वाले तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में सीधे तौर पर निशाना साधा है। तंवर का कहना है कि भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे उन नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं जहां पर विधानसभा चुनाव होने हैं...
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भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम घोषित करके भविष्य के चुनावों की पूरी फील्डिंग सजा दी है। पार्टी ने अगले कुछ सालों में जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, वहां के नेताओं को राज्यसभा भेजकर अपनी पैठ मजबूत करने की पूरी तैयारी कर ली है। वहीं पार्टी ने जिस तरीके से अब तक एक भी मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा है, उससे पार्टी का स्पष्ट एजेंडा सामने दिखने लगा है। जबकि ऐसे ही उम्मीदवारों के माध्यम से पार्टी ने दलितों और यादवों के बड़े वोट बैंक को भी हथियाने का दांव लगाया है। पार्टी में सबसे ज्यादा चर्चा मुख्तार अब्बास नकली को उम्मीदवार न बनाए जाने को लेकर है। राजनीतिक हल्कों में चर्चाएं इस बात की हो रही हैं कि नकवी को रामपुर का उपचुनाव लड़वाया जा सकता है।
भाजपा ने उत्तर प्रदेश से दो और नाम देकर न सिर्फ सबको चौंका दिया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ा संदेश दे दिया। राजनीतिक विश्लेषण अभिषेक तंवर कहते हैं कि तेलंगाना के वरिष्ठ भाजपा नेता डॉक्टर के लक्ष्मण को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने अगले साल होने वाले तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में सीधे तौर पर निशाना साधा है। तंवर का कहना है कि भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे उन नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं जहां पर विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा भाजपा ने जिस तरीके से उत्तर प्रदेश में मिथिलेश कुमार को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है, वह न सिर्फ सियासी बल्कि जातिगत समीकरणों को साधने का एक तरीका भी है।
किसी भी मुस्लिम को नहीं बनाया उम्मीदवार
विश्लेषकों की नजर में मिथिलेश कुमार को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने न सिर्फ दलितों बल्कि समाजवादी पार्टी के बड़े वर्ग को साधा है। दरअसल मिथिलेश कुमार भाजपा में शामिल होने से पहले लंबे वक्त तक सपा के बड़े कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाते रहे हैं। मिथिलेश कुमार 2009 में शाहजहांपुर से लोकसभा सांसद थे, जबकि उनकी पत्नी पुंवाया से विधायक हुआ करती थी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक मिथिलेश कुमार का नाम चौंकाने वाला रहा है।
भाजपा ने राज्यसभा में किसी भी मुस्लिम नाम को उम्मीदवार नहीं बनाया है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने अब अपनी एक क्लीयर लाइन लेनी शुरू कर दी है। हालांकि उनका कहना है कि भाजपा आलाकमान मुख्तार अब्बास नकवी को रामपुर के लोकसभा उपचुनाव में प्रत्याशी बना सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है मुख्तार अब्बास नकवी अगर लोकसभा का उपचुनाव जीत जाते हैं तो उनके लिए मंत्री पद पर बने रहना आसान होगा। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो निश्चित तौर पर नकवी के लिए राजनैतिक राह भी मुश्किल हो सकती है।
दक्षिण भारत पर पकड़ बनाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश की राजनीति को करीब से समझने वाले कई राजनीतिक विश्लेषकों की राय है कि भाजपा ने अब अस्सी और बीस का अपना एजेंडा पूरी तरीके से सेट करना शुरू कर दिया है। शायद यही वजह है कि अब राज्यसभा में किसी भी मुस्लिम को नहीं भेजने का फैसला लिया गया। राजनैतिक गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि जो मंत्रालय मुख्तार अब्बास नकवी के पास है, अगर लोकसभा उपचुनाव में टिकट देने के बाद भी परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आते हैं तो वह मंत्रालय किसी दूसरे अल्पसंख्यक को दिया जा सकता है। ऐसे में मुख्तार अब्बास नकवी के राजनैतिक सफर को लेकर के राजनीतिक गलियारों में तमाम तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषक रामेंद्र चंद्र कहते हैं कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के माध्यम से जो अपनी राजनीतिक बिसात बिछाई है, वह न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी सटीक बैठ रही है। इसके अलावा आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने बेहतरीन फील्डिंग सजा दी है। रविंद्र चंद्र कहते हैं जिस तरीके से मायावती ने अपनी सोशल इंजीनियरिंग का साथ छोड़कर अब मुस्लिमों को अपने पाले में जोड़ने की कोशिशें शुरू की है, ठीक उसी तरीके से भाजपा ने दलितों को अपने साथ जोड़ने की पुख्ता व्यवस्था कर ली है। वह कहते हैं कि सिर्फ यही नहीं मुख्तार अब्बास नकवी इस वक्त झारखंड से राज्यसभा के सांसद हैं। पार्टी ने दूर की सोचते हुए झारखंड के ही एक बड़े नेता को राज्यसभा का प्रत्याशी बना दिया। भाजपा दक्षिण में अब और मजबूत होना चाहती है, इसीलिए तेलंगाना विधानसभा चुनावों से पहले डॉ. लक्ष्मण को भी राज्यसभा भेजने का रास्ता तैयार कर दिया।