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कुर्सी की चाबी है गुजरात की लकी सीट राजकोट वेस्ट, पीएम और सीएम भी कर चुके हैं नुमाइंदगी

Sat, 18 Nov 2017 04:11 PM IST
संजय मिश्र/ नई दिल्ली
संजय मिश्र/ नई दिल्ली Updated Sat, 18 Nov 2017 04:11 PM IST
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Rajkot West is the Lucky Seat of Gujarat and leaded by PM or Cm
vijay rupani

गुजरात की सत्ता के लिए राजकोट पश्चिम विधानसभा सीट लकी मानी जाती है। इस सीट ने देश को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल सरीखे अहम पदों के लिए नेता दिए हैं। या यूं कहें कि इस सीट से चुनाव लड़े नेता प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के पद पर आसीन हैं।

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भाजपा ने राजकोट पश्चिम से इस विधानसभा चुनाव में भी मुख्यमंत्री विजय रूपानी को अपना उम्मीदवार बनाया है। रूपानी 2014 से इस सीट से विधायक हैं। इससे पहले इस सीट पर भाजपा के वजूभाई बाला 1985 से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। 
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केवल वर्ष 2002 में उन्होंने वर्तमान पीएम और सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सीट छोड़ी थी। गुजरात के मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालने के बाद पीएम मोदी ने अपने जीवन का पहला चुनाव राजकोट पश्चिम सीट से लड़ा था। वजू भाई बाला ने मोदी के लिए अपनी सीट खाली की थी और मोदी 2002 के उपचुनाव में इस सीट से चुनाव जीते थे। 

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आज मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और अपने लिए सीट छोड़ने वाले वजू भाई बाला को उन्होंने कर्नाटक का राज्यपाल बनाया हुआ है। हालांकि ये बात अलग है कि वर्ष 2002 के अंत में हुए विधानसभा के चुनाव में राजकोट पश्चिम के बजाय अहमदाबाद की मणीनगर सीट से चुनाव लड़ा था और राजकोट पश्चिम की विरासत उन्होंने वजू भाई को ही सौंप दी थी।

आज राजकोट पश्चिम की विरासत सूबे के मुख्यमंत्री रूपानी के जिम्मे है।

ये है राजकोट पश्चिम की तासीर

Rajkot West is the Lucky Seat of Gujarat and leaded by PM or Cm
bjp

शहरी आबादी वाली राजकोट पश्चिम विधानसभा सीट पर वर्ष 1985 से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। इस सीट पर पटेल समुदाय, व्यापारी वर्ग और ओबीसी समाज की बहुलता है। वैसे तो पूरा राजकोट संघ और भाजपा का गढ़ माना जाता है, मगर राजकोट पश्चिम भगवा परिवार का अभेद दुर्ग है। 

राष्ट्रीय दलित महासंघ के अध्यक्ष एवं राजकोट दक्षिण के पूर्व विधायक सिद्धार्थ परमार का कहना है कि राजकोट पश्चिम सीट भाजपा का अभेद दुर्ग इसलिए है कि यहां के हर एक घर के बाद दूसरा घर संघ से जुड़े व्यक्ति का है। जनसंघ के समय से ही यह सीट भगवा परिवार की गढ़ रही है। 

भाजपा उस विरासत को बचाए हुए है। इस दफे पाटीदारों और व्यापारियों की नाराजगी के वजह से रूपानी के समक्ष चुनौती जरूर है विरासत को बचाए रखने की। मगर उम्मीद जताई जा रही है कि वे इस विरासत को बचाए रखने में सफल होंगे। उनकी पत्नी अंजली रूपानी ने इस सीट पर मुख्यमंत्री के प्रचार की कमान संभाल रखी है।

पाटीदारों की नाराजगी को देखते हुए उनका जोर उन्हें मनाने के साथ ओबीसी मतदाताओं को साधने पर है। कांग्रेस से यहां इंद्र नील राजगुरू को दोबारा से उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना है। वे राजगुरू ब्राह्मण हैं। उनके बिरादरी की संख्या बेहद कम बताई जा रही है। 

यदि कांग्रेस ने किसी कड़वा पाटीदार को उम्मीदवार बनाया तो रूपानी को पसीने बहाने पड़ सकते हैं। वरना उनकी राह आसान हैं। वैसे भी ये सीट राजपाट की कुर्सी तक पहुंचाने के लिए मानी जाती है। कांग्रेस के पास इस कद का यहां चेहरा भी नहीं है। 

भगवा परिवार के लिए फलदायी रहा है राजकोट 

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BJP, Congress

राजकोट को दक्षिण गुजरात की राजधानी भी कहा जाता है। करीब 37 लाख की आबादी वाला यह शहर अहमदाबाद, सोमनाथ और द्वारिकाधीश के मध्य में स्थित है। सोमा (सौराष्ट्र ऑयल मिल एसोसिएशन ) का भी यहां कार्यालय है। सूरजमुखी तेल ने सौराष्ट्र के किसानों की किस्मत चमकाई तो सौराष्ट्र की चमक-दमक भी बढ़ी है।

करशन घावरी से लेकर चेतेश्वर पुजारा सरीखे क्रिकेटर इस शहर की देन हैं, लेकिन शहर की तासीर भगवा रही है। जनसंघ के दिनों से ही राजकोट भगवा परिवार के लिए फलदायी रहा है। सूबे में संघ की पहली शाखा यहीं लगी तो जनसंघ का दीपक भी यहीं जला। अरविंद भाई मडियार की राजकोट मेयर पद पर जीत के साथ भाजपा का कमल भी यहीं से खिला है। बताते हैं कि नारायण दास पांव, चिमन भाई शुक्ल और केशुभाई पटेल ने भगवा परिवार की यहां नींव रखी। जनसंघ के दीपक पर जीएम आहूजा यहां से पहला चुनाव जीते।

पूरे गुजरात में जनसंघ ने पहली नगरपालिका का चुनाव राजकोट में जीता। उसके बाद से यह शहर संघ और भाजपा का गढ़ बन गया। यहां के प्रवीण भाई मड़ियार संघ के प्रचारकों में वरिष्ठ प्रचारक रहे हैं तो उनके भाई अरविंद मड़ियार ने भाजपा के टिकट पर मेयर के पद पर पहला चुनाव जीता। बताया जा रहा है कि उनके कुशल नेतृत्व ने यहां भाजपा को पहचान दी। इसके बाद से शहर के लोगों का लगाव भाजपा की ओर बढ़ा और आज भाजपा पूरे राजकोट में अभेद बनी हुई है। तमाम विरोधों के बावजूद भाजपा को उम्मीद है कि राजकोट में पार्टी का प्रदर्शन अन्य चुनावों से भी बेहतर रहेगा। 

राजकोट पश्चिम सीट से अब तक जीते विधायक 
राजकोट पश्चिम से वर्तमान में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी विधायक हैं और भाजपा ने दोबारा से उन्हें ही उम्मीदवार बनाया है। 1967 में इस सीट पर स्वतंत्र पार्टी की जीत हुई। 1972 में कांग्रेस के प्रद्युमन सिंह जडेजा जीते। 1975 में अरविंद भाई मड़ियार ने यहां जनसंघ के टिकट पर चुनाव जीता। 1980 में यहां से कांग्रेस के मनीभाई चुनाव जीते।

उसके बाद वर्ष 1985 से वजू भाई बाला के जीतने का सिलसिला शुरू हुआ। उन्होंने इस सीट पर 1990, 1995, 1998, 2002, 2007 और 2012 में चुनाव जीता। 2002 में कुछ समय के लिए इस सीट से नरेंद्र मोदी भी उपचुनाव लड़कर विधायक रहे हैं।

उसके बाद दोबारा से वजू भाई बाला विधायक बने। 2014 में वजू भाई के राज्यपाल बनने के बाद उपचुनाव में इस सीट से विजय रूपाणी चुनाव लड़े। वजू भाई सूबे के वित्त मंत्री के अलावा राज्य विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, इसलिए राजकोट पश्चिम की सीट को कुर्सी की चाबी कहा जाता है।

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