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राजीव गांधी हत्याकांड : कांग्रेस का सवाल- क्या केंद्र सरकार शीर्ष कोर्ट के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका देगी

Sat, 12 Nov 2022 06:03 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 12 Nov 2022 06:03 AM IST
सार

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या जिस आत्मघाती बम धमाके में हुई थी उसमें 15 अन्य लोग भी मारे गए थे और 45 घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से घायलों में नाराजगी है।

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Rajiv Gandhi assassination: Congress question will central govt give review petition
Randeep Singh Surjewala - फोटो : ANI

विस्तार

कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संविधान के बुनियादी सिद्धांतों की अनदेखी बताया। उन्होंने इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चार सवाल पूछते हुए कहा है कि क्या केंद्र की भाजपा सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार याचिका देगी। सुरजेवाला ने कहा कि राजीव गांधी के हत्यारे उग्रवादियों को जेल से रिहा करने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

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आज उग्रवाद के खिलाफ लड़ने की हर देशवासी की मूल भावना हार गई और सबसे युवा पीएम की हत्या के घाव फिर हरे हो गए। उन्होंने सवाल उठाए कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार पूर्व पीएम राजीव गांधी के हत्यारे उग्रवादियों की रिहाई का समर्थन करती है? मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष क्यों नहीं रखा? क्या उग्रवाद पर मोदी सरकार का ये दोहरा रवैया नहीं है? क्या भाजपा सरकार निर्णय पर पुनर्विचार याचिका देगी?
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बम धमाके की पीड़ित ने पूछा हमारे लिए न्याय कहां है
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या जिस आत्मघाती बम धमाके में हुई थी उसमें 15 अन्य लोग भी मारे गए थे और 45 घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से घायलों में नाराजगी है। धमाके के दौरान राजीव गांधी की रैली में भीड़ को बतौर सब इंस्पेक्टर नियंत्रित कर रहीं अनुसूइया डाइसी अर्नेस्ट बतौर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद से रिटायर हो चुकी हैं।
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छह दोषियों की रिहाई के बारे में मीडिया ने जब उनसे सवाल किया तो उन्होंने कहा, मैं बम के छर्रों का आज भी इलाज करवा रही हूं। यह उस घटना में जख्मी हुए हर शख्स की पीड़ा है। हमारे लिए न्याय कहां है? मैं उनके लिए न्याय का प्रश्न उठा रही हूं जो उस आतंकी धमाके में मारे गए या घायल हुए। उन्होंने कहा, आतंकवादियों के साथ आतंकी कानूनों के अनुसार व्यवहार होना चाहिए न कि सामान्य अपराधियों की तरह।

तीन दशक तक जेल में बंद रहे राजीव के हत्यारे 
21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या के मामले में एसआईटी ने कुल 41 लोगों को आरोपी बनाया, जिनमें से 12 पहले ही मारे जा चुके थे। तीन कभी पकड़े नहीं जा सके। शेष 26 दोषियों को टाडा अदालत ने 28 जनवरी, 1998 को मौत की सजा सुनाई। 11 मई, 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने 19 दोषियों को बरी करते हुए सात में से चार (नलिनी, मुरुगन, संथन और पेरारिवलन) को मृत्युदंड दिया और तीन (रविचंद्रन, रॉबर्ट पायस और जयकुमार) को उम्रकैद की सजा सुनाई। अप्रैल 2000 में सोनिया गांधी की तरफ से दया याचिका के आधार पर नलिनी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया, जबकि शेष     आरोपियों की दया याचिका 2011 में राष्ट्रपति ने ठुकरा दी और 9 सितंबर, 2011 को फांसी देना तय हुआ, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट के दखल पर फांसी टल गई।  

  • नलिनी : चेन्नई में नर्स और पुलिस अधिकारी की बेटी नलिनी श्रीपेरंबुदूर में हत्या स्थल पर मौजूद एकमात्र जीवित दोषी है। कथित हत्यारों के साथ तस्वीरों के आधार पर नलिनी को दोषी माना गया था। नलिनी दूसरे दोषी मुरुगन की पत्नी है।
  • मुरुगन : मुरुगन नलिनी के भाई का दोस्त था। नलिनी मुरुगन के जरिये ही राजीव गांधी की हत्या के मास्टरमाइंड शिवरासन के संपर्क में आई। जब नलिनी और मुरुगन गिरफ्तार हुए तो नलिनी गर्भवती थी और जेल में ही उनकी बेटी पैदा हुई।
  • आरपी रविचंद्रन : लिबरेशन ऑफ तमिल टाइगर्स ईलम (लिट्टे) की शुरुआत से भी पहले रविचंद्रन और शिवरासन घनिष्ट मित्र थे। 80 के दशक में रविचंद्रन कई बार श्रीलंका गया। टाडा एसआईटी ने रविचंद्रन को भारत में शिवरासन का सबसे खास सहयोगी माना।
  • संथान : 1991 में वह श्रीलंका से भारत पहुंचा। वह उन लोगों में से एक था, जिन्हें इस मामले में सबसे पहले मौत की सजा सुनाई गई थी।
  • रॉबर्ट पायस : 1990 में श्रीलंका से पत्नी और बहनों के साथ भारत आया। भारत आने से पहले से ही वह लिट्टे के संपर्क में था। 
  • जयकुमार : एसआईटी ने जयकुमार को शिवरासन और पायस का घनिष्ठ सहयोगी बताते हुए सक्रिय तौर पर हत्या की साजिश में शामिल होन का आरोप लगाया।
  • पेरारिवलन : जून 1991 में जब उसे गिरफ्तार किया गया था, तब वह महज 19 वर्ष का था। एसआईटी के मुताबिक उसने बम बनाने के लिए शिवरासन को दो बैटरी सेल खरीदकर दिए थे।
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