Rajinder nagar bypolls: दुर्गेश पाठक को केजरीवाल का तो भाजपा के राजेश भाटिया को संबंधों का सहारा, स्थानीय बहू दे रहीं कड़ी टक्कर
राजिंदर नगर उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार राजेश भाटिया मूलरूप से इसी इलाके के निवासी हैं। भाजपा संगठन में वे इस क्षेत्र के युवा मंडल अध्यक्ष से लेकर प्रदेश संगठन में महामंत्री तक का सफर तय कर चुके हैं। वे इस क्षेत्र से पार्षद भी रह चुके हैं, लिहाजा स्थानीय लोगों से उनका सीधा संबंध उनकी ताकत है।
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दिल्ली की राजिंदर नगर विधानसभा सीट का उपचुनाव सत्तारूढ़ दल आम आदमी पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है। राघव चड्ढा के राज्यसभा चले जाने के बाद रिक्त हुई इस सीट पर पार्टी अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए कमरतोड़ कोशिश कर रही है। दुर्गेश पाठक को केजरीवाल सरकार के कल्याणकारी योजनाओं का सहारा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजेश भाटिया स्थानीय पार्षद रहे हैं और संगठन के सबसे निचले स्तर से प्रदेश महामंत्री पद तक पहुंचे हैं। उन्हें अपने स्थानीय संबंधों, प्रशासनिक संस्थाओं के अनुभव और पार्षद के रूप में किए पिछले कामकाज का सहारा है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रेमलता दशघरा गांव की बहू हैं। वे भी पूर्व पार्षद रह चुकी हैं तो विधानसभा के गांवों पर उनकी पकड़ मजबूत है। कोरोना काल में लोगों की सेवा का उन्हें लाभ मिल सकता है।
मोदी के नाम और अपने काम के सहारे राजेश भाटिया
राजिंदर नगर उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार राजेश भाटिया मूलरूप से इसी इलाके के निवासी हैं। भाजपा संगठन में वे इस क्षेत्र के युवा मंडल अध्यक्ष से लेकर प्रदेश संगठन में महामंत्री तक का सफर तय कर चुके हैं। वे इस क्षेत्र से पार्षद भी रह चुके हैं, लिहाजा स्थानीय लोगों से उनका सीधा संबंध उनकी ताकत है। पार्षद के रूप में बेहतर काम करते हुए उन्होंने लोगों से अच्छे संबंध बनाए हैं जिसका उन्हें इस उपचुनाव में लाभ मिल सकता है। डूसू के पदाधिकारी रहते हुए भी उन्होंने बेहतर कामकाज किया है।
राजेश भाटिया ने अमर उजाला से की बात
राजेश भाटिया ने अमर उजाला को बताया कि राजेंदर नगर के स्थानीय लोगों से उनका सीधा संबंध होना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वे अपने क्षेत्र के हर निवासी के सुख-दुख में सदैव साथ खड़े रहते हैं। क्षेत्र के सभी उनके परिवार के सदस्य हैं और उन्हें अपने परिवार पर भरोसा है। क्षेत्र के युवाओं के लिए काम करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम देश के हर सामान्य नागरिक और भाजपा के हर कार्यकर्ता को उत्साह से भर देता है। उन्हें पूरा विश्वास है कि राजिंदर नगर के मतदाता इस बार भाजपा को यहां से जीत दिलाकर अपने क्षेत्र का विकास आगे बढ़ाने का काम करेंगे।
दुर्गेश पाठक को केजरीवाल और राघव चड्ढा के नाम का सहारा
आम आदमी पार्टी नेता दुर्गेश पाठक को इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा के नाम का सहारा है। दिल्ली सरकार की कल्याणकारी योजनाएं, राघव चड्ढा के कार्यकाल में क्षेत्र में हुए विकास के कार्य और पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता दुर्गेश पाठक की ताकत हैं। पार्टी ने दुर्गेश पाठक को लगातार ‘मिशन एमसीडी’ में झोंक रखा था, वे इसके लिए लगातार प्रचार कर पार्टी को मजबूती देने में जुटे थे। इससे उनकी लोकप्रियता भी बढ़ी है जो उन्हें चुनाव में मदद पहुंचा सकती है।
राजिंदर नगर सीट से राघव चड्ढा की प्रतिष्ठा भी जुड़ी
राजिंदर नगर सीट से राघव चड्ढा की प्रतिष्ठा भी जुड़ी है। वे इस सीट से दुर्गेश पाठक को जिताने में मदद कर अपनी पार्टी के लिए बेहतर संदेश दिलाना चाहेंगे। माना जा रहा है कि वे जल्द ही चुनाव प्रचार का जिम्मा संभालेंगे और मतदाताओं से सीधा संपर्क स्थापित कर पठक को जिताने की अपील करेंगे। 2015 से अब तक आम आदमी पार्टी लगातार एक तरफा जीत हासिल करती रही है। इस बार भी आम आदमी पार्टी अपने समीकरणों के साथ मजबूती के साथ खड़ी है। यदि भाजपा कोई मजबूत रणनीति बनाने में नाकाम रहती है तो आम आदमी पार्टी इस सीट पर एक बार फिर मजबूत बनकर उभर सकती है।
कांग्रेस की प्रेमलता आजमा रहीं ताकत
दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगातार तीन बार से बुरी तरह पिछड़ रही कांग्रेस ने इस उपचुनाव में अपनी नेता प्रेम लता पर दांव लगाया है। वे पूसा (वार्ड संख्या 150) से 2012 में पार्षद का चुनाव जीत चुकी हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि एक महिला उम्मीदवार होते हुए प्रेम लता स्थानीय महिला मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित कर सकती हैं।
कांग्रेस नेता प्रेम लता ने अमर उजाला से कहा कि वे सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। वे दशघरा गांव की बहू हैं और पिछले 50 साल से यहां के लोगों से उनके संबंध हैं। राजिंदर नगर के तीन बड़े गांव दशघरा, नरायणा और तोड़ापुर गांव उनके बेहद करीबी माने जाते हैं। यहां के वोटरों की वे पहली पसंद बनकर उभर सकती हैं। कोरोना काल में राजिंदर नगर की झुग्गी-झोपड़ियों में वे अकेले दम पर ही काम किया करती थीं। उनका वह कार्य अब उनकी राजनीतिक ताकत बन सकता है।