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Rajasthan: इस माइक्रो मैनेजमेंट से गहलोत के लिए आसान हुई 2023 की राह, चुनावों तक विधायकों को खुश रखना बड़ी चुनौती

Sat, 11 Jun 2022 05:42 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sat, 11 Jun 2022 05:42 PM IST
सार

राज्यसभा चुनावों में तीनों सीटें पर जीत हासिल करने के साथ ही गहलोत ने विधायकों पर अपनी पकड़ मजबूत होने का संदेश दिया है। साथ ही, कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर अपना कद को और मजबूत कर लिया है। तीनों उम्मीदवारों की जीत को गहलोत की एआईसीसी में मजबूत पकड़ के तौर भी देखा जा रहा है...

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rajasthan rajya sabha election result: CM ashok gehlot winning strategy successful, won 3 seats out of 4, but here are the challenges
राज्यसभा चुनाव- राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद तिवारी, मुकुल वासनिक के साथ - फोटो : PTI

विस्तार

राजस्थान की चार राज्यसभा सीटों के चुनाव में एक बार फिर सीएम अशोक गहलोत का जादू चल गया है। यह गहलोत के माइक्रो मैनेजमेंट का ही नतीजा है कि भाजपा की कड़ी टक्कर के बावजूद कांग्रेस के तीनों उम्मीदवार दमदार तरीके से जीत हासिल कर सके। पार्टी को जीत दिलाने के लिए गहलोत पिछले दस दिनों से मैदान में डटे हुए थे। इस दौरान उन्होंने 56 नाराज विधायकों को मनाया बल्कि अन्य निर्दलीय विधायकों की मांगों को भी माना। विधायक टूटे नहीं, इसके लिए दावों-वादों के साथ बाड़ाबंदी से लेकर नेटबंदी तक की। मतदान वाले दिन सबसे पहले मतदान किया। पार्टी एजेंट के रूप में मतदान केंद्र में पूरे समय सक्रिय भी रहे।  

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ऐसे हुई 2023 की राह आसान

राज्यसभा चुनावों में तीनों सीटें पर जीत हासिल करने के साथ ही गहलोत ने विधायकों पर अपनी पकड़ मजबूत होने का संदेश दिया है। साथ ही, कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर अपना कद को और मजबूत कर लिया है। तीनों उम्मीदवारों की जीत को गहलोत की एआईसीसी में मजबूत पकड़ के तौर भी देखा जा रहा है। क्योंकि कांग्रेस ने पॉलिसी मैकिंग में बड़ा दखल रखने वाले नेताओं को राज्यसभा में भेजा है। ऐसे में स्वाभाविक तौर पर उनकी पकड़ मजबूत हुई है। आज पार्टी में गहलोत के समकक्ष नेता रहे गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा सहित कई नेता अब पार्टी की मुख्यधारा में नहीं हैं। ऐसे में सीएम ने पहले संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को उच्च सदन में भेजा। अब केंद्रीय नेतृत्व के पसंद के तीनों नेताओं को जीत दिलवाई। इससे कांग्रेस में गहलोत का कद और पैरोकारों की संख्या बढ़ी है।

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राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों के पहले यह जीत राजस्थान कांग्रेस के लिए बूस्टर डोज साबित हुई है। पूरे देश से कांग्रेस पार्टी के लिए बुरी खबरें आती रहती हैं। कभी राष्ट्रीय स्तर का कोई नेता पार्टी छोड़ता है तो कभी प्रदेश स्तर का कोई नेता। ऐसे में सीएम गहलोत ने राजस्थान में विधायकों को न केवल एकजुट रखा बल्कि अपनी जादूगरी से छोटे दलों के साथ साथ निर्दलीय विधायकों को भी जोड़े रखा। अपने विधायकों की बात सुनी और नाराजगी दूरी की। उम्मीद है कि इन परिणामों से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में जोश दिखने को मिलेगा। जिसका फायदा पार्टी को 2023 में मिलेगा।

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अब विधायकों की शर्तें करनी होगी पूरी

इन तीन सीटों पर जीत हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री गहलोत ने बड़े इंतजाम किए थे। गहलोत ने कांग्रेस के विधायकों के अलावा निर्दलीय और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के विधायकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया। मतदान के पहले एक सप्ताह तक उदयपुर में बाड़ेबंदी की और विधायकों को होटल में हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराईं। इस दौरान गहलोत ने ऐसे विधायकों को पूरे विश्वास में लिया, जो अफसरों या सरकार की कार्यपद्धति से नाराज बताए जा रहे थे। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय और बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों से भी बात की। गहलोत से जुड़े सूत्रों की मानें तो इनमें से कई विधायकों ने खुले तौर पर मुख्यमंत्री के सामने अपनी शर्तें रखीं और उन्होंने उन्हें माना भी। इन शर्तों में अधिकारियों के ट्रांसफर से लेकर विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य के लिए फंड जैसी मांगें शामिल थीं।

पायलट खेमे को भी साध कर रखा

प्रदेश के राजनीति जानकारों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में तमाम उठापटक के बीच में सबसे बड़ी बात यह रही कि पूरी पार्टी इस दौरान एकजुट दिखी। कांग्रेस के दो विरोधी गुट गहलोत और पायलट ने भी एकजुट होकर चुनाव में पार्टी के लिए काम किया। सचिन पायलट आलाकमान के संपर्क में रहे। वहीं प्रदेश के विधायकों को पार्टी के समर्थन में लाने के लिए सीएम गहलोत की लगातार कवायद दिखी। इसमें प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने अपनी भूमिका निभाई।

राजस्थान में हैं राज्यसभा की 10 सीटें

राजस्थान से राज्यसभा की 10 सीटें हैं। भाजपा के ओमप्रकाश माथुर, केजे अल्फोंस, रामकुमार वर्मा और हर्षवर्धन सिंह डूंगरपुर का कार्यकाल चार जुलाई को पूरा हो रहा है और इन सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान हुआ था। इन परिणाम के बाद उच्च सदन में कांग्रेस के छह और भाजपा के चार राज्यसभा सदस्य हो गए है। कांग्रेस के अन्य सांसदों में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी शामिल हैं, जबकि भाजपा के अन्य राज्यसभा सदस्यों में किरोड़ी लाल, भूपेंद्र यादव (केंद्रीय मंत्री) और राजेंद्र गहलोत हैं।

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