फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   rajasthan cabinet reshuffle what three signs did the congress leadership give to ashok gehlot and sachin pilot, now what will be the role of sachin

Rajasthan Cabinet Reshuffle: कांग्रेस नेतृत्व ने गहलोत- पायलट को क्या दिए तीन संकेत, अब सचिन की क्या होगी भूमिका

Mon, 22 Nov 2021 03:35 PM IST
Pratibha Jyoti प्रतिभा ज्योति
Updated Mon, 22 Nov 2021 03:35 PM IST
विज्ञापन
सार
पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन के बाद, राजस्थान में अशोक गहलोत मंत्रिमंडल के विस्तार में कांग्रेस आलाकमान ने निर्णायक दखल दिया है। फेरबदल में अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों के लिए कई संदेश हैं। राजस्थान की राजनीति को समझने वाले कहते हैं अब यह नेताओं पर निर्भर करता है कि वे संकेतों को कैसे समझना चाहते हैं।
loader
rajasthan cabinet reshuffle what three signs did the congress leadership give to ashok gehlot and sachin pilot, now what will be the role of sachin
अशोक गहलोत-सचिन पायलट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

रविवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कैबिनेट का विस्तार हो गया। मंत्रिपरिषद में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए बड़े प्रतिनिधित्व पर जोर देकर पार्टी ने 2023 के चुनाव की मजबूत बुनियाद रखने की कवायद की है। दूसरी तरफ पार्टी हाईकमान ने सचिन पायलट की लंबी मांग को मानते हुए उनकी मर्जी के मुताबिक गहलोत कैबिनेट में उनके गुट के नेताओं को मंत्री बनाकर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की है।


सचिन पायलट ने करीब एक साल पहले अपने करीबी विधायकों के साथ सीएम गहलोत के खिलाफ बागी रुख अपना लिया, जिसके बाद गहलोत सरकार पर बड़ा संकट गहरा गया था। जिसके बाद पायलट के हाथ से उपमुख्यमंत्री पद और प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी भी चली गई थी। लेकिन अब मंत्रिमंडल विस्तार से पायलट खुश नजर आ रहे हैं, दूसरी तरफ गहलोत ने यह जताया है कि वे पार्टी आलाकमान से ऊपर नहीं है। लेकिन इस मंत्रिमंडल विस्तार में गहलोत और पायलट दोनों के लिए संदेश छिपे हैं। 


1.कोई वन मैन शो नहीं
सत्ता में रहने का लंबा अनुभव रखने वाले  राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए पहला और शायद सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि सरकार चलाना वन-मैन शो नहीं होने जैसा नहीं है। राज्य में मुख्यमंत्री नहीं बदला गया लेकिन उनके कट्टर प्रतिद्वंदी सचिन पायलट के करीबी लोगों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने को कहा गया और उन्हें मंत्रिमंडल का विस्तार करने के लिए राजी किया गया। दूसरी तरफ गहलोत के करीबी निर्दलीय लोगों को बाहर रखते हुए,आलाकमान ने यह साफ कर दिया है कि चलेगी तो सिर्फ आलाकमान की।

सचिन पायलट (फाइल फोटो)
सचिन पायलट (फाइल फोटो)
राजस्थान की राजनीति को गहराई से समझने वाली वरिष्ठ पत्रकार रेणु मित्तल बताती हैं इस कैबिनेट विस्तार के बाद गहलोत को यह संदेश मिला है कि वे सुपर बॉस नहीं है और राज्य सरकार को चलाने में किस तरह का तालमेल रखना है यह पार्टी आलाकमान तय करेगी। यही वजह है कि गहलोत जो पहले पायलट के वफादारों को अपनी कैबिनेट में शामिल करने के अनिच्छुक थे, उन्हें ऐसा करना पड़ा।

गहलोत अमरिंदर नहीं, सचिन सिद्धू नहीं 
हालांकि पार्टी के एक नेता के मुताबिक ‘हमें उन्हें मजबूर करने की जरूरत नहीं पड़ी। पिछले महीने पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ दो बैठकों के बाद गहलोत को संकेत मिल गया था। वह आलाकमान के मन की बात समझ गए थे। पार्टी नेता ने कहा ‘अमरिंदर सिंह के विपरीत, गहलोत एक संगठनात्मक व्यक्ति हैं, जो नीचे से ऊपर पहुंचे हैं, इसलिए वे समझ गए कि उन्हें पायलट की बात माननी ही होगी। गहलोत अमरिंदर नहीं हैं और सचिन (नवजोत सिंह) सिद्धू नहीं हैं। पंजाब और राजस्थान में यह बड़ा अंतर है कि गहलोत कैप्टन की तरह मनमौजी नहीं हैं और पायलट में धैर्य और मौन के गुण हैं।’ 

2.सिर्फ पायलट की भी नहीं चली
दूसरी ओर कैबिनेट विस्तार को गौर से देखें तो सिर्फ पायलट की बात नहीं मानी गई है। पूरी मंत्रिपरिषद में उनके गुट के केवल पांच नेताओं को जगह मिली है। लेकिन मंत्रिपरिषद में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए बड़े प्रतिनिधित्व पर जोर देकर, आलाकमान ने यह सुनिश्चित किया कि उसका लक्ष्य 2023 का चुनाव जीतना है और इसके लिए जातीय समीकरण साधना जरूरी है। जाट और अनुसूचित जनजाति समुदाय से पांच-पांच तो अनुसूचित जाति से चार मंत्री बनाए गए हैं। 

सचिन पायलट (फाइल फोटो)
सचिन पायलट (फाइल फोटो) - फोटो : twitter.com/SachinPilot
सम्मानजनक जगह मिली
हालांकि रेणु मित्तल मानती हैं कि पायलट को काफी हद तक सम्मानजनक जगह मिली है। उनके लिए यह फायदे का सौदा है। अभी कई राजनीतिक नियुक्तियां होगी जिसमें पायलट के लोगों को भी जगह मिलेगी। संगठन में भी पायलट के लोगों को मौका मिला सकता है।

बताया जाता है कि 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले भी पायलट ने प्रदेश में कांग्रेस को जीत दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की थी। उन्हें उम्मीद थी कि यदि कांग्रेस सरकार में आती है तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन गहलोत का सियासी कद और राजनीतिक अनुभव के आगे पायलट को संतोष करना पड़ा और उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाया गया। राजस्थान की राजनीति को जानने वाले समझते हैं कि 2023 में मुख्यमंत्री बनने का मौका पायलट अपने हाथ से नहीं जाने देंगें।     

अब क्या करेंगे पायलट? 
अब सचिन पायलट क्या करेंगे, क्या वे राष्ट्रीय राजनीति में आएंगे, इसके जवाब में रेणु मित्तल कहती हैं राजस्थान में 2023 में चुनाव होने हैं और पायलट का लक्ष्य मुख्यमंत्री बनना है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे राजस्थान में ही रहेंगे। इसका मतलब है कि वे दिल्ली नहीं आना चाहते हैं राज्य में संगठन को मजबूत करना चाहते हैं। हां, इतना हो सकता है कि वे अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार करें। उन्होंने हाल ही में यूपी के कई दौरे किए हैं। हो सकता है पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर समुदाय को साधने के लिए वे प्रियंका गांधी का साथ दें।

हरीश चौधरी
हरीश चौधरी - फोटो : Congress
3.नया नेतृत्व तैयार करने की कोशिश
हालांकि राजस्थान में कांग्रेस की राजनीति अभी भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के इर्द-गिर्द ही घूमेगी लेकिन भविष्य की तरफ देखते हुए पार्टी आलकमान ने राज्य में नए नेतृत्व भी तैयार करने की कवायद कर रही है। जैसे ब्राह्मण से रघु शर्मा, जाट से हरीश चौधरी और गोविंद सिंह डोटासरा, राजपूत समुदाय से भंवर जितेंद्र सिंह को महत्वपूर्ण संगठनात्मक भूमिकाएं देकर, विभिन्न पृष्ठभूमि के अधिक से अधिक नेताओं को आगे ला रही है। 

संगठन में महत्वूपर्ण जिम्मेदारी निभा रहे राजस्थान के एक वरिष्ठ नेता ने कहा  ‘ नई प्रतिभाओं और नए लोगों को आगे लाना ही होगा, प्रदेश की राजनीति सिर्फ कुछ लोगों की मोहताज नहीं हो सकती। यदि शीर्ष नेतृत्व समय रहते यह काम कर लेता है तो चुनाव में इससे मदद मिलती है’। 




 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed