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स्वामी को राजन से इतनी तकलीफ क्यों है?

Mon, 30 May 2016 12:52 PM IST
बीबीसी संवाददाता/ज़ुबैर अहमद,दिल्ली
बीबीसी संवाददाता/ज़ुबैर अहमद,दिल्ली Updated Mon, 30 May 2016 12:52 PM IST
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rajan swamy conflict
सुब्रमण्यम स्वामी भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं - फोटो : bbc

कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता और रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के बीच एक समानता है। ये सभी अलग-अलग कारणों से भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के निशाने पर हैं। उनके जयललिता और सोनिया गांधी के पीछे पड़ने का कारण कथित भ्रष्टाचार है। उनका ताजा शिकार हैं रघुराम राजन। दो सप्ताह पहले सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री को लिखी एक चिठ्ठी में गवर्नर को तुरंत हटाने की मांग की थी। तब से उन्होंने अपनी इस मांग को कई बार दुहराया है। मीडिया और सार्वजनिक सभाओं में इसकी चर्चा की है।

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आखिर स्वामी राजन का विरोध क्यों कर रहे हैं? या जैसा कि एक साथी ने कहा, एक तमिल ब्राह्मण दूसरे तमिल ब्राह्मण के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़ा है? जाहिर तौर पर इसका कारण प्रधानमंत्री को भेजी गयी उनकी चिठ्ठी में दर्ज है। अपनी इस चिट्ठी में उन्होंने आरोप लगाया है कि रघुराम राजन मानसिक रूप से पूरी तरह भारतीय नहीं हैं और उन्होंने जानबूझ कर भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया है।
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सुब्रमण्यम स्वामी ने ये भी इल्जाम लगाया कि दो सालों में सरकारी बैंकों का 'बैड लोन' बढ़कर साढ़े तीन लाख करोड़ हो गया है। स्वामी ने राजन को तुरंत हटाए जाने की मांग करते हुए कहा कि उनके पास ग्रीन कार्ड है, जिसे रिन्यू कराने के लिए वो अमरीका भी गए थे। हालाँकि, ग्रीन कार्ड अमरीका में बेरोकटोक रहने और काम करने के लिए विदेश से आए लोगों को दिया जाता है। ग्रीन कार्ड किसी के अमरीका का नागरिक होने का प्रमाण नहीं है। फिलहाल रघुराम राजन ने स्वामी के आरोपों के बारे में सार्वजनिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
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सितंबर 2013 में तत्कालीन यूपीए की सरकार ने रघुराम राजन को तीन साल के लिए रिजर्व बैंक का गवर्नर नियुक्त किया था। उनका कार्यकाल सितम्बर में खत्म हो रहा है, इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि उनका कार्यकाल बढ़ाया जाएगा या नहीं। सुब्रमण्यम स्वामी और रघुराम राजन में कई बातें सामान हैं। दोनों तमिल ब्राह्मण होने के अलावा अमरीका में प्रसिद्ध यूनिवर्सिटियों में पढ़ने और पढ़ाने का लंबा अनुभा रखते हैं।
 

अपनी सीमाएं पार करके बयानबाजी नहीं करते राजन

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रिजर्रव बैंक के गवर्नर रघुराम राजन - फोटो : reuters

राजन अपनी यूनिवर्सिटी से तीन साल की छुट्टी पर हैं। दोनों प्रतिभाशाली और मेधावी हैं, दोनों अर्थशास्त्र में महारत रखते हैं और दो टूक शब्दों में बोलने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन स्वामी और राजन के बीच समानता के बावजूद इनके बीच कई बातें असमान हैं। स्वामी विवादास्पद बयानों में महारत रखते हैं। उनका चरित्र साफ है लेकिन दिमाग में क्रोध है। अहंकार उनकी एक बड़ी कमजोरी मानी जाती है।

दूसरी तरफ राजन भी बोलने के लिए जाने जाते हैं लेकिन वो अपनी सीमाएं पार करके बयानबाजी नहीं करते, डंका पीटे बगैर अपनी बातें कह डालते हैं। उनकी मौद्रिक नीति में कमियां हो सकती हैं लेकिन वो इसे आसानी से नहीं मानते। दिलचस्प बात ये है कि स्वामी के हमलों से राजन की लोकप्रियता बढ़ी है। 

भाजपा में स्वामी को अधिकतर नेता पसंद नहीं करते। वित्त मंत्री राजन के पक्ष में सामने आए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें सार्वजनिक तौर पर समर्थन नहीं दिया है। प्रधानमंत्री ने गवर्नर की प्रशंसा की है। कहा जाता है कि स्वामी की राज्यसभा में लाने के पीछे आरएसएस का हाथ है, आरएसएस के वो काफी करीब रहे हैं। दोनों की लड़ाई में जीत किसकी होगी ये बताना मुश्किल है। ये हार जीत की लड़ाई लगती भी नहीं है लेकिन अब तक इससे नुकसान केवल स्वामी को ही हुआ है।

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