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मुजफ्फरनगर रेल हादसा: 3 वजहें जिनकी वजह से तय थी जानी यात्रियों की जान

Mon, 21 Aug 2017 12:54 PM IST
amarujala.com- written by: हर्षित गौतम
amarujala.com- written by: हर्षित गौतम Updated Mon, 21 Aug 2017 12:54 PM IST
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railway negligence and two more things are villain in kalinga utkal express train accident
- फोटो : amar ujala

मुजफ्फरनगर के खतौली में हुए कलिंग उत्कल रेल हादसे ने सैकड़ों रोते-बिलखते लोगों से उनके अपनों को छीन लिया। इस हादसे में 30 जिंदगियां खत्म हो गईं। रेलवे ने इस दर्दनाक हादसे में आतंकी साजिश से इंकार करते हुए विभाग की लापरवाही माना है।

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हादसे में प्रारंभिक जांच के बाद रेलवे ने फौरी कार्रवाई करते हुए 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। जिन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है उनमें सीनियर डिविजनल इंजीनियर, असिसटेंट डिविजनल इंजीनियर, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, जेई पाथ-वे शामिल हैं।
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पढ़ें: देखिए, रेलवे से कहां हुई चूक, बेकसूरों की मौत का जिम्मेदार कौन ?
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वहीं दिल्ली के डीआरएम, नार्दन रेलवे के जीएम और मेंबर इंजीनियर रेलवे बोर्ड को छुट्टी पर भेज दिया गया है। इसके अलावा भी 7 अन्य अधिकारी भी सस्पेंड किए गए हैं। ऐसे में वो तीन बड़े वजहें जाननी बेहद जरूरी हैं जिनकी वजह से एक और रेल हादसे ने 30 लोगों की सांसें छीन लीं।

पटरी काटी, लेकिन वापिस जोड़ी ही नहीं गई

railway negligence and two more things are villain in kalinga utkal express train accident

इस हादसे से संबंधित एक ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें गेटमैन और खलासी के बीच की बातचीत सामने आ रही है। इस ऑडियो से लापरवाही की बड़ी वजह सामने आ रही है। बातचीत से पता चलता है कि ट्रैक की मरम्मत के लिए पटरियों को खोला गया था। जिसकी वजह से ट्रैक पर कई फुट तक खालीपन आ गया।

 

नियमानुसार ऐसी स्थिति में रेलवे कर्मचारी कॉशन लेकर काम करते हैं, जिससे ट्रेनों की आवाजाही कुछ देर के लिए थाम दी जाती है। लेकिन ऑडियो में साफ सुना जा सकता है कि पटरी हटाने के बाद रेलवे कर्मचारी आरामतलबी के मूड़ में आ गए, जिसके चलते ऐसी भयंकर लापरवाही को अंजाम दिया गया जो 30 से ज्यादा लोगों की जान की दुश्मन बन गई।

 

शायद रेलवे कर्मचारियों को भी अंदाजा नहीं होगा कि जल्द ही यहां से कोई ट्रेन गुजरनी है। लेकिन जब इसी बीच सामने से ट्रेन आती दिखाई दी तो कीमैन, गैंगमैन आदि सब सामान फेंककर भाग खड़े हुए। इसका सबूत मौके पर पड़े गैस कटर और अन्य औजारों के पड़े होने से मिला है।
 

ट्रैक पर काम करते समय कर्मचारियों ने किस कदर लापरवाही को अंजाम दिया इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ट्रेन को रुकने या किसी तरह का संकेत देने के लिए लाल झंडी का भी उपयोग नहीं किया गया। जिससे ड्राइवर को कुछ इशारा मिल पाता। हादसे के बाद लाल झंडी मौके पर ही लिपटी पड़ी हुई मिली।

 

 

दोनों स्टेशन मास्टर को नहीं थी पटरियों पर काम होने की जानकारी

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हादसे की एक भयंकर भूल उस समय भी सामने आई जब स्टेशन के निकट पटरियों पर चल रहे काम की जानकारी खतौली के स्टेशन मास्टर को ही नहीं दी गई। खुद स्टेशन मास्टर ने टीवी पर सबके सामने यह बात कुबूल की है कि मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई ऐसे में किस बिना पर ट्रेन को रुकने का संकेत देता।


खास बात ये है कि जिस जगह यह पूरा हादसा हुआ वो स्टेशन से मात्र 50-60 गज की दूरी पर है। ऐसे में साफ है कि रेलवे के दो विभागों में किस कदर तालमेल का अभाव रहा।


इसके अलावा ट्रैक पर काम करने वाले कीमैन और अन्य कर्मचारियों ने मेरठ रेलवे स्टेशन के अधिकारियों को भी पूरी तरह अंधेरे में रखा। अगर यहां भी कोई सूचना दी जाती तो भी संभव था कि उसे अन्य स्टेशनों तक भिजवाया जाता, लेकिन बिना दोनों स्टेशन की जानकारी के इतना महत्वपूर्ण काम अंजाम दिया जाता रहा और किसी को कानोंकान खबर नहीं हुई। 

ट्रेन की स्पीड बनी विलेन

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ट्रेन एक्सीडेंट
सूत्रों के मुताबिक उत्कल एक्सप्रेस को मरम्मत किए जाने वाले ट्रैक से धीमी गति से ट्रेन को गुजारने के आदेश दिए गए थे, लेकिन ये आदेश ड्राइवर को मिले ही नहीं। हालांकि इसको लेकर भी विरोधाभास है। ड्राइवर का साफ कहना है कि उसे इस तरह की कोई सूचना नहीं दी गई और अगर ऐसा होता तो वह जरूर ट्रेन की स्पीड़ धीमी रखता।

जिस समय ये भीषण हादसा हुआ उस वक्त ट्रेन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ज्यादा तेजी से दौड़ रही थी। ज्यादा स्पीड होने की वजह से पटरी उखड़ी और बीच के डिब्बे पटरी से उतर गए। डिब्बे पटरी से उतरते देख ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाने का प्रयास किया, जिसकी वजह से ट्रेन के डिब्बे एकदम बेपटरी हो गए।
 

जानकारों की मानें तो ट्रेन की रफ्तार अगर उस समय 10-20 किमी प्रतिघंटा की रही होती तो जानमाल की हानि की गुंजाइश काफी कम रह जाती। कम स्पीड में डिब्बों के पटरी से उतरने की आशंका तो हो सकती है लेकिन डिब्बों के एक दूसरों पर चढ़ने की संभावना न के बराबर ही रहती।
 

 

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