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Railways: उड़ानों से मुकाबला करती रेल, लेकिन खत्म हो वेटिंग की रेलमपेल
Mon, 15 Aug 2022 05:51 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 15 Aug 2022 05:51 AM IST
सार
रेलवे आजादी के समय सबसे बड़ा परिवहन का साधन था और उसका यही दर्जा आज भी कायम है। करीब ढाई करोड़ यात्री रोजाना रेल से सफर करते हैं।
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railway
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
यह देश का सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता भी है। लेकिन 75 वर्षों बाद भी हमें ट्रेनों के चलने में देरी और टिकट बुकिंग में लंबी वेटिंग लिस्ट के झंझट से मुक्ति नहीं मिली है। हालांकि, पहले के मुकाबले ट्रेनों की तादाद, स्पीड और सुविधाओं में काफी तेजी आई तो किराया भी बढ़ा है। सुविधाओं में तो कुछ ट्रेनें हवाई जहाजों को टक्कर दे रही हैं।
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वहीं, 320 किमी/घंटा रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन पर भी तेजी से काम चल रहा है। बीते कुछ वर्षों में रेलवे ने गेजों के एकीकरण और लाइनों के विद्युतीकरण में बड़ी बढ़त हासिल की है। 14 हजार किमी से ज्यादा मार्ग विस्तार हुआ है, खासतौर पर पूर्वोत्तर में दुर्गम स्थानों तक पहुंच बढ़ी है। लेकिन बिना योजना बनाए यात्री के लिए रेलवे का सफर अब भी ज्यादा आसान नहीं हो पाया है।
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हालांकि, कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, आगामी तीन-चार साल में रेलवे का वेटिंग को खत्म करने पर जोर रहेगा। वहीं, ट्रेनों के चलने में देरी के समय को देखें तो हमें बड़ा फासला तय करना है। जापान में यह समय केवल कुछ सेकंड तो नीदरलैंड में तीन मिनट तक ही सीमित है जबकि भारत में 15 मिनट तक की देरी आम है।
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कैग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2008 से 2019 के दौरान रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ढाई लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए पर इसके मुकाबले इनके छूटने में देरी का अंतर ज्यादा नहीं घटा। चीन ने अपनी तेज गति वाली और आम रेलवे की लाइनें अलग बना रखी हैं, जिससे वे बिलकुल समय पर चलती हैं। भारत में भी तकनीक आधारित उपायों से इसे कम किया जा सकता है।