कोहरे से निपटने के लिए रेलवे के पास नई तकनीकी नहीं, पुरानी व्यवस्था से ही होगा धुंध का सामना
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दिसंबर-जनवरी के महीने में उत्तर भारत में धुंध का कहर छाया रहता है। इसका सबसे बड़ा नुकसान रेल और वायु यात्रियों को झेलना पड़ता है क्योंकि फॉग के कारण बड़ी संख्या में ट्रेनों-प्लेन को रद्द करना पड़ता है। हर साल फॉग के कारण सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान होता है, बावजूद इसके रेलवे इससे निपटने के लिए कोई ठोस योजना तैयार नहीं कर सका है। इस साल भी रेलवे पुरानी तकनीकी के सहारे ही फॉग से निपटने की तैयारी कर रहा है।
उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक टीपी सिंह ने गुरुवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि रेलवे के पास 2648 फॉग सेफ्टी डिवाइस काम करने की स्थिति में तैयार हैं। यह ऐसा डिवाइस है जो ट्रेन ड्राइवर को आने वाले सिग्नल के उचित दूरी के पहले सचेत कर देता है। यह डिवाइस सभी ट्रेनों में लगाया जाएगा।
यह जीपीएस प्रणाली पर काम करता है। इसके अलावा ट्रैकों पर डेटोनेटर (ट्रेन चलने पर आवाज उत्पन्न करने के लिए डिवाइस) लगाया गया है। सभी लोको पायलट और गार्ड्स को इन उपायों की उचित जानकारी के लिए 15 दिन का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
पिछले साल भी किए गए थे ये उपाय, नहीं पड़ा था खास प्रभाव
इसके अलावा सभी स्टेशनों पर परावर्तक साइन बोर्ड बनाए गए हैं जो अपेक्षाकृत ज्यादा दूर से दिखाई पड़ सकेंगे। सभी स्टेशन मास्टर को दृश्यता परीक्षण करते रहने को कहा गया है। निश्चित सीमा से कम दृश्यता होने पर वह इसकी घोषणा कर सकेगा और ट्रेनों की संचालन गति को नियंत्रित करने का निर्देश दे सकेगा।
बता दें कि ये सभी उपाय पिछले वर्ष भी किए गए थे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि फॉग के दौरान रेलवे ट्रेनों के संचालन की बहुत अच्छी व्यवस्था नहीं कर सका था। भारी संख्या में ट्रेनों को कैंसल करना पड़ा था।
यात्रियों को दी जायेगी सूचना
टीपी सिंह के मुताबिक इस बार भी फॉग के कारण किसी ट्रेन के अधिक विलम्ब होने पर यात्रियों को एसएमएस के जरिये सूचना दी जाएगी। लेकिन चूंकि फॉग के दौरान गाड़ियां बार-बार और अधिक देर होती रहती हैं, यात्रियों को चाहिए कि वे 139 नम्बर पर फोन कर ट्रेनों के संचालन की सही जानकारी लेते रहें।