जनादेश की अनदेखी कर पॉवर और पैसों के दम पर भाजपा ने मेघालय में किया छल: राहुल गांधी
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मेघालय में भाजपा के सत्ता में शामिल होने पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने ट्वीट किया कि 'महज 2 सीट के साथ भाजपा ने छल से मेघालय में सत्ता हड़प ली।
राहुल ने कहा 'ये ठीक उसी तरह है जैसे मणिपुर और गोवा में किया गया था। जहां भाजपा ने जनादेश की अनदेखी कर पॉवर और पैसों के दम पर अवसरवादी गठबंधन बना लिया था।'
मालूम हो कि कांग्रेस बीते साल गोवा और मणिपुर चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन इसके बावजूद सरकार बनाने से चूक गई थी। तब कांग्रेस के बहुमत जुटाने से पहले ही भाजपा ने बाजी मार ली थी।
With just 2 seats, the BJP has usurped power in Meghalaya, through a proxy.
— Office of RG (@OfficeOfRG) March 5, 2018
Like in Manipur & Goa, showing utter disregard for the mandate of the people. Obsessed instead with grabbing power, using big money to create an opportunistic alliance.#DemocracyDemonetised
बता दें कि मेघालय में चुनाव नतीजे आने के बाद राज्य में कांग्रेस 21 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी। मगर सरकार बनाने के लिए दो सीट जीतने वाली भाजपा भी शुरुआत से ही रेस में शामिल थी। अब भाजपा प्रदेश में दूसरी पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने वाली है। इसके लिए मेघालय के राज्यपाल ने भाजपा और उसे समर्थन देने वाली एनपीपी और दूसरी पार्टियों को सरकार बनाने का न्यौता दिया है।
इस मामले पर कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष विंसेंट पाला ने कहा- हमारा चुनाव से पूर्व किसी के साथ गठबंधन नहीं था। चुनाव प्रचार के समय से ही हमें पता था कि भाजपा का एनपीपी और यूडीपी के साथ गठबंधन है और यह अब साबित हो गया है। जनादेश असल में कांग्रेस को मिला था। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि पार्टी फैसले को स्वीकार करती है और हम विधानसभा में अहम भूमिका निभाएंगे।
पाला ने कहा- हम लोगों द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करते हैं। हम मेघालय के लोगों के मुद्दों के लिए लड़ते रहेंगे। दावे करना आसान है क्योंकि उनके पास पूर्ण बहुमत नहीं है। ऐसे में सरकार बनाना आसान है लेकिन शासन करना कठिन। हम जिस भी भूमिका रहेंगे उसमें तर्कसंगत किरदार निभाते रहेंगे। हालांकि दूसरे कांग्रेस नेता पीएल पूनिया का इस मामले पर विचार अलग है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल का निर्णय जनता के जनादेश के खिलाफ है। यह तो ऐसा हो रहा है जैसे जिसकी लाठी उसकी भैंस। इससे पहले ऐसा गोवा और मणिपुर में हो चुका है। जनादेश को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही हैं। यह लोकतंत्र के लिए घातक है।