राहुल गांधी का सॉफ्ट हिंदुत्व और ब्राह्मण वोट बैंक की सियासत के अनसुलझे किस्से
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नए एससी-एसटी एक्ट के बाद सोशल मीडिया पर सवर्णों को लेकर छिड़ी बहस में कई सियासी दल कूद पड़े हैं। माना जा रहा है कि ब्राह्मण वोट बंटने से सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी को होगा तो वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद ही कांग्रेस के हिंदुत्व को मजबूत करने का जिम्मा उठा रखा है।
सुरेजावाला ने जब बोला कांग्रेस के डीएनए में ब्राह्मण समाज का खून
इसी बहस के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने बेबाकी से बोला कि कांग्रेस के डीएनए में ब्राह्मण समाज का खून है। कांग्रेस सत्ता में आई तो ब्राह्मणों को आरक्षण दिलाया जाएगा, ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन होगा। इस बोर्ड का चेयरमैन भी ब्राह्मण समाज का ही होगा। स्वाभाविक ज्ञान हमेशा ब्राह्मणों के पास रहा है। क्योंकि पैसा कभी ब्राह्मण का ज्ञान नहीं खरीद सका।
'दलित, राजपूत, ओबीसी, जाट, जनेऊ+मुस्लिम = मोदी की हार' फॉर्मूला
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौर से शुरू हुआ मंदिर दर्शन आज भी जारी है। राहुल गांधी ने समय-समय पर कांग्रेस के हिंदुत्व प्रेम को जगजाहिर किया है। चाहे वो मंदिरों में माथा टेकना हो या जनेऊधारण करने का सिलसिला हो। राजनीतिक गलियारे से खबर भी आने लगी है कि शायद भाजपा राहुल गांधी के मंदिर दर्शन से डरी हुई है।
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि राहुल ने आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सियासी चौसर में बहुत पहले ही ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया था। साथ ही राहुल गांधी ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक वोट वैंक में सेंध लगानी शुरू कर दी थी। आप भी जानिए राहुल गांधी की मंदिरों की यात्रा का सियासी गणित क्या कहती है।
2019 में आम चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस ने महा फॉर्मूला बनाया है। कांग्रेस हिन्दुओं को तोड़कर ही मोदी को हरा सकती है।
दलित, राजपूत, ओबीसी, जाट, जनेऊ+मुस्लिम = मोदी की हार।
जब कांग्रेस ने दिखाईं राहुल गांधी की जनेऊ वाली तस्वीरें
गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान भी राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर दौरे को लेकर विवाद हो गया था। मामला यहां तक आ पहुंच गया था कि राहुल गांधी को हिंदू साबित करने के लिए कांग्रेस को उनका जनेऊ का उनका पूरा इतिहास तक खोलना पड़ गया था। उस समय भी कांग्रेस ने राहुल गांधी की तीन तस्वीरें जारी कर राहुल के हिंदु और जनेऊधारी होने का प्रमाण दिया था।
आपको बता दें कि सोमनाथ मंदिर प्रथा के मुताबिक अगर कोई गैर-हिंदू मंदिर के अंदर जाता है तो उसे रजिस्टर में एंट्री करानी होती है। मंदिर के रजिस्टर में कथित तौर पर उन्हें गैर हिन्दू के तौर पर एंट्री कराई गई थी। फिर राहुल का हिंदू विवाद शुरू हो गया था।
अयोध्या में जब राहुल गांधी ने टेका था माथा
बाबरी मस्जिद टूटने के बाद अयोध्या जाने वाले पहले राहुल गांधी ने अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर गए, फिर चित्रकूट के कामतानाथ मंदिर और मिर्जापुर के विंध्याचल मंदिर में भी उन्होंने पूजा-अर्चना की थी।
कैलाश मानसरोवर यात्रा से राहुल ने निकाला नया फॉर्मूला
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर एक और जहां विपक्ष बयानबाजी कर रहा है। वहीं राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि एक इंसान तभी कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाता है जब उसे बुलावा आता है। मैं बहुत खुश हूं कि मुझे ये मौका मिला और आप सभी के साथ इस खूबसूरत यात्रा पर जो कुछ भी देख रहा हूं उसे आपके साझा कर रहा हूं।
आपको बता दें कि 26 अप्रैल को कर्नाटक की यात्रा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष के विमान में तकनीकी खराबी आने के कारण विमान बाईं ओर तेजी से झुक गया और तेजी से नीचे आने लगा था इसके बाद हालांकि विमान संभल गया और सुरक्षित नीचे उतरा। इसके तीन दिन बाद 29 अप्रैल को गांधी ने एक रैली के दौरान कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने की घोषणा की थी। कांग्रेस ने सुरक्षा कारणों से राहुल गांधी की यात्रा का ब्योरा गोपनीय रखा गया था।
राहुल गांधी ने एक और ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने दो फोटो को शेयर करते हुए लिखा है कि मानसरोवर झील का पानी बहुत नरम और शांत है। वे सब कुछ देते हैं और कुछ भी नहीं खोते हैं। कोई भी यहां से पानी पी सकता है। यहां कोई घृणा नहीं है, यही कारण है कि हम भारत में इन जलों की पूजा करते हैं।
राहुल गांधी को लेकर महागठबंधन में भी फंसा है पेंच
राहुल गांधी की एक ओर सॉफ्ट हिंदुत्व की लाइन पर आगे ना बढ़ना राजनीतिक मजबूरी भी है। कांग्रेस को समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ आगे गठबंधन करना है, इसमें सॉफ्ट हिंदुत्व आड़े आ सकता है। खासकर लेफ्ट पार्टियों को कांग्रेस के साथ जाने में दिक्कत हो सकती है, जिससे महागठबंधन की योजना फेल हो सकती है। रीजनल पार्टियां राहुल गांधी के साथ सहज नहीं हैं।
ममता बनर्जी कई बार कह चुकी हैं कि राहुल गांधी के साथ जाने में उनको परहेज है। क्षेत्रीय दल कांग्रेस को बहुत स्पेस देने के मूड में नहीं है। उत्तर भारत में कांग्रेस रीजनल पार्टियों पर निर्भर है। पार्टी का वजूद सिर्फ क्षेत्रीय दलों के बदौलत बच सकता है। बंगाल में पार्टी के भीतर इसको लेकर काफी तनातनी है कि टीएमसी के साथ जाए या लेफ्ट के साथ जाना चाहिए।
हालांकि अब राहुल गांधी को लग रहा है कि बीजेपी की पिच पर खेलने की जगह अपने पिच पर खेलना ज्यादा मुफीद है। नफरत और डर का माहौल है इसको लेकर राहुल गांधी काफी चिंतित दिखाई दिए हैं।
राहुल गांधी ने मुस्लिम समाज को विश्वास दिलाया है कि जो कांग्रेस की विचारधारा है उससे पार्टी हटी नहीं है। राजनीतिक नफा-नुकसान के हिसाब से कांग्रेस कोई फैसला नहीं लेने जा रही है। इसका मतलब ये है कि 2019 के चुनाव में राहुल गांधी पार्टी की पुरानी विचारधारा पर ही चलने वाले हैं।