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मोदी को सीधे निशाने पर लेकर फिर भूल तो नहीं कर रहे राहुल

Sun, 09 Aug 2020 08:51 PM IST
Rajeev Rai शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Sun, 09 Aug 2020 08:51 PM IST
सार

  • रचनात्मक विपक्ष से दूर रहकर खड़ा नहीं हो सकता विपक्ष
  • मोदी विरोध के जरिए नहीं बता सकते केन्द्र सरकार की नीतियों में खामी

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Rahul Gandhi is doing big mistake by targeting narendra modi congress members unhappy with party
Rahul Vs Modi

विस्तार

राहुल गांधी की राजनीति का तरीका कांग्रेस पार्टी के ही तमाम कद्दावर नेताओं को कम समझ में आ रहा है। पार्टी के एक पुराने महासचिव बिल्कुल खार खाए बैठे हैं। कांग्रेस की रीतियों-नीतियों को समझने वालों का कहना है कि पार्टी लोक विरुद्ध राह पर चलकर अपने सुंदर भविष्य का रास्ता नहीं बना सकती। पार्टी के एक और बड़े नेता हैं। उनका कहना है कि जहां कहना था, उन्होंने उस फोरम पर कह दिया है। आप पिछले 10-15 दिन के ट्वीट उठाकर देख लीजिए। मुझे समझ में नहीं आता है कि इस तरह के ट्वीट की राजनीति का सलाहकार कौन है? सूत्र का कहना है कि जो भी लोग इसमें शामिल हैं, मैं कह सकता हूं, उन्हें देश के मानस को समझते हुए राजनीति की बिल्कुल समझ नहीं है। यह सब पार्टी के पूर्व अध्यक्ष की छवि से खिलवाड़ कर रहे हैं। यह भी समझ में नहीं आता कि राहुल इस राजनीति पर कैसे भरोसा कर रहे हैं।

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थोड़ा ट्रैक पर चलकर फिर डीरेल हो जाते हैं राहुल गांधी
भाजपा के नेताओं का कहना है कि इसके सिवा राहुल गांधी को कुछ आता भी नहीं। अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर टिप्पणी करने, सवाल उठाने, मर्यादा से परे जाने तक में कोई परहेज नहीं करते। वह विपक्ष के नेता हैं। उन्हें कम से कम एक बार सोचना चाहिए कि ऐसा करके उन्होंने अब तक क्या खोया और क्या पाया? भाजपा नेता सुधीर अग्रवाल को कई बार ऐसा लगता है कि राहुल गांधी केवल पीएम मोदी को गाली देने के लिए बोल रहे हैं, ट्वीट कर रहे हैं या सवाल उठा रहे हैं। क्योंकि राहुल के पास कुछ नहीं होता। इससे जनता में भी उनकी छवि लगातार अपना स्टेटस बनाए हुए है। भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के सलाहकारों में शामिल रवि शर्मा का कहना है कि उन्हें राहुल गांधी टाइप की पॉलटिक्स समझ में नहीं आती। वह कुछ समय तक रास्ते पर रहते हैं और फिर खुद ट्रैक छोड़ देते हैं। इससे कांग्रेस में जो भी चल रहा है, सब डीरेल हो जाता है।  
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कुछ इनकी भी सुन लीजिए
राहुल गांधी ने आज से 10 साल पहले कहा था कि पार्टी में नेता पैराशूट से उतरते हैं। आज भी हालत वहीं है। जौनपुर के सुरेन्द्र त्रिपाठी, सुलतानपुर के प्रदीप और जय नरायन सिंह के मुताबिक पार्टी के भीतर इसमें कोई बदलाव नहीं आ रहा है। कार्यकर्ता, कार्यकर्ता बनकर रह जा रहा है। नेता ऊपर से थोप दिए जा रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से कांग्रेस में सक्रिय रहे विश्वनाथ चतुर्वेदी कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं, एडवोकेट हैं। कांग्रेस के पुराने सिपाही हैं। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी लड़ाई लग रहे हैं, लेकिन आज भी पार्टी संगठन में कद, पद, दायित्व, अवसर को लेकर उनके हाथ खाली हैं।
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बनारस के विनोद दुबे कहते हैं कि नदीम जावेद, शिव बाबा जैसे नेता हैं कौन? इनकी राजनीति ही कितने साल की है। 40 साल से तो कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता वह खुद हैं। अभी हैं और रहेंगे, लेकिन सुनता कौन है? सुनवाई हुई होती तो बनारस में दयालु मिश्रा भाजपा में जाते? यहां तो नेता का बेटा ही नेता बनता है और राहुल गांधी को लगता है कि वह प्रधानमंत्री मोदी को गाली देकर देश में कांग्रेस को खड़ा कर लेंगे।

पीएम मोदी का विरोध केन्द्र सरकार की नीतियों का विरोध नहीं है
कांग्रेस के नेताओं की सुनिए। राज्य सभा में सांसद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता का कहना है कि पिछले 15 दिन का ट्वीट देख लें। सबको आपस में जोड़ लें। कुछ कहने की जरूरत नहीं है। सूत्र का कहना है कि केवल पीएम मोदी के विरोध का जनता में संदेश देना ठीक नहीं है। सूत्र का कहना है कि भाजपा और केन्द्र सरकार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक मात्र नेता है। केन्द्र की सरकार भी मोदी सरकार के नाम से जानी जाती है। पार्टी और सरकार की सबसे बड़ी छवि भी वही है। सूत्र का कहना है कि सब ठीक है, लेकिन विपक्ष को मुद्दे उठाते समय अपनी रचनात्मकता का ध्यान देना होगा।


कुछ बदलाव जरूरी
कांग्रेस पार्टी की युवा नेता हैं। राहुल गांधी के टीम की सदस्य हैं। वह कहती हैं कुछ तो बदलाव होने चाहिए। उन्हें भी लग रहा है। पार्टी के भीतर संगठनात्मक स्तर पर भी कुछ बड़े संदेश देने की जरूरत है। सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी कोई गलत विषय नहीं उठाते। वह राष्ट्रीय ज्वलंत मुद्दे ही उठाते हैं। उनका हर मुद्दा सही होता है। आप कह सकते हैं, मुद्दे उठाने का कुछ तरीका बदलना चाहिए। सूत्र का कहना है कि इस समय सबसे जरूरी पार्टी से युवाओं को जोड़ना है। युवाओं में उत्साह पैदा करना है। युवा ही आने वाले समय की कांग्रेस हैं। यह वरिष्ठ नेताओं को समझना होगा और तालमेल बनाने पर बल देना होगा।

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