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Bangladesh: पूर्व राजनयिक रिवा गांगुली दास बोलीं- रहमान की ढाका वापसी राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम
Fri, 26 Dec 2025 01:15 AM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 26 Dec 2025 01:15 AM IST
सार
Bangladesh: बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बीच पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के ढाका लौटने को पूर्व उच्चायुक्त रिवा गांगुली दास ने अहम बताया। वहीं, पूर्व राजदूत विद्या भूषण सोनी ने कहा कि बांग्लादेश को भारत की मदद के बिना आगे बढ़ना मुश्किल होगा।
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पूर्व राजनयिक रिवा गांगुली दास
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त रिवा गांगुली दास ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के ढाका लौटने का समय राजनीतिक रूप से बहुत अहम है, क्योंकि विभिन्न विचारधाराओं के कारण देश बंट रहा।
रिवा गांगुली ने कहा, मुझे लगता है कि उनका लौटना राजनीतिक रूप से बहुत अहम है। वह बहुत लंबे समय से बाहर रहे हैं और क्योंकि बेगम जिया खुद ठीक नहीं थीं, उन्होंने पार्टी का संचालन अच्छी तरह से किया। शेख हसीना की सरकार के हटने के तुरंत बाद हमने देखा कि तारिक जिया ने पार्टी के राजनीतिक समर्थन को मजबूत किया। भले ही वह ऑनलाइन और विभिन्न नई तकनीकों के माध्यम से ऐसा कर रहे थे, फिर भी उन्होंने पार्टी को अपने साथ बनाए रखा।
ये भी पढ़ें: शेख हसीना ने फिर यूनुस सरकार को घेरा, दीपू हत्याकांड को बताया 'अकल्पनीय अत्याचार', जारी किया संदेश
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उन्होंने आगे कहा कि उनसे यह उम्मीद की जाती है कि वह विभिन्न राजनीतिक विचारों को एकजुट करेंगे। उन्होंने कहा, इस समय, जब बांग्लादेश में इतनी हिंसा है और देश विभिन्न विचारधाराओं के बीच बंट रहा है, उनके लौटने से राजनीतिक स्थिरता आएगी और संभव है कि वह बांग्लादेश में मौजूद मध्यवर्ती ताकतों को एकजुट कर सकें, क्योंकि मुख्य चिंता अब दक्षिणपंथी ताकतों के उदय और उनके किए गए काम हैं।
अमेरिका के मैसाचुसेट्स से एएनआई से बातचीत में भारत के पूर्व राजदूत विद्या भूषण सोनी ने कहा कि बिना भारत की मदद के बांग्लादेश आगे नहीं बढ़ पाएगा। उन्होंने कहा, वर्तमान समय में शासक वर्ग का मूड भारत के प्रति बहुत सकारात्मक नहीं है। उन्होंने ही जनता को भारत के खिलाफ उकसाया। यह राजनीतिक उद्देश्य के लिए हो सकता है। भारत की मदद के बिना, वे कहीं नहीं जा पाएंगे। उनके पास बहुत सारी समस्याएं हैं और भारत ही एकमात्र मित्र है जो उन्हें मार्गदर्शन दे रहा है। हमारे पास धैर्य है और हमें लगता है कि लोगों में समझदारी बनेगी। यह केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि उनके लिए भी फायदेमंद है कि वे सकारात्मक द्विपक्षीय संबंध बनाएं। उनके लिए विकल्प बहुत सीमित हैं।
ये भी पढ़ें: Bengal: 'भारत लाई जाएं नेताजी की अस्थियां..', सुभाष चंद्र बोस से परपोते ने राष्ट्रपति मुर्मू को लिखा पत्र
उन्होंने यह भी कहा कि अगर बांग्लादेश पाकिस्तान की तरफ देखे, तो भी वह देश को ज्यादा मार्गदर्शन नहीं दे पाएगा। उन्होंने कहा, वे निश्चित रूप से पाकिस्तान की तरफ देख सकते हैं, लेकिन पाकिस्तान क्या कर सकता है? पाकिस्तान स्वयं राजनीतिक और आर्थिक रूप से मुश्किल में है। वह केवल धार्मिक आधार पर कुछ मार्गदर्शन या सहायता दे सकता है, लेकिन यह उन्हें लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ाएगा।
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रिवा गांगुली ने कहा, मुझे लगता है कि उनका लौटना राजनीतिक रूप से बहुत अहम है। वह बहुत लंबे समय से बाहर रहे हैं और क्योंकि बेगम जिया खुद ठीक नहीं थीं, उन्होंने पार्टी का संचालन अच्छी तरह से किया। शेख हसीना की सरकार के हटने के तुरंत बाद हमने देखा कि तारिक जिया ने पार्टी के राजनीतिक समर्थन को मजबूत किया। भले ही वह ऑनलाइन और विभिन्न नई तकनीकों के माध्यम से ऐसा कर रहे थे, फिर भी उन्होंने पार्टी को अपने साथ बनाए रखा।
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उन्होंने आगे कहा कि उनसे यह उम्मीद की जाती है कि वह विभिन्न राजनीतिक विचारों को एकजुट करेंगे। उन्होंने कहा, इस समय, जब बांग्लादेश में इतनी हिंसा है और देश विभिन्न विचारधाराओं के बीच बंट रहा है, उनके लौटने से राजनीतिक स्थिरता आएगी और संभव है कि वह बांग्लादेश में मौजूद मध्यवर्ती ताकतों को एकजुट कर सकें, क्योंकि मुख्य चिंता अब दक्षिणपंथी ताकतों के उदय और उनके किए गए काम हैं।
अमेरिका के मैसाचुसेट्स से एएनआई से बातचीत में भारत के पूर्व राजदूत विद्या भूषण सोनी ने कहा कि बिना भारत की मदद के बांग्लादेश आगे नहीं बढ़ पाएगा। उन्होंने कहा, वर्तमान समय में शासक वर्ग का मूड भारत के प्रति बहुत सकारात्मक नहीं है। उन्होंने ही जनता को भारत के खिलाफ उकसाया। यह राजनीतिक उद्देश्य के लिए हो सकता है। भारत की मदद के बिना, वे कहीं नहीं जा पाएंगे। उनके पास बहुत सारी समस्याएं हैं और भारत ही एकमात्र मित्र है जो उन्हें मार्गदर्शन दे रहा है। हमारे पास धैर्य है और हमें लगता है कि लोगों में समझदारी बनेगी। यह केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि उनके लिए भी फायदेमंद है कि वे सकारात्मक द्विपक्षीय संबंध बनाएं। उनके लिए विकल्प बहुत सीमित हैं।
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उन्होंने यह भी कहा कि अगर बांग्लादेश पाकिस्तान की तरफ देखे, तो भी वह देश को ज्यादा मार्गदर्शन नहीं दे पाएगा। उन्होंने कहा, वे निश्चित रूप से पाकिस्तान की तरफ देख सकते हैं, लेकिन पाकिस्तान क्या कर सकता है? पाकिस्तान स्वयं राजनीतिक और आर्थिक रूप से मुश्किल में है। वह केवल धार्मिक आधार पर कुछ मार्गदर्शन या सहायता दे सकता है, लेकिन यह उन्हें लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ाएगा।
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