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राफेल दस्तावेज लीक : सरकार के विशेषाधिकार दावे पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

Thu, 14 Mar 2019 03:23 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Thu, 14 Mar 2019 03:23 PM IST
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Rafale Deal: Attorney General request Supreme Court for the removal of leaked pages
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

न्यायालय ने राफेल सौदा मामले में पुनर्विचार याचिकाओं पर केंद्र सरकार की प्रारंभिक आपत्तियों पर सुनवाई पूरी की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित किया है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले में केंद्र की प्रारंभिक आपत्ति पर फैसला लेने के बाद ही तथ्यों पर विचार किया जाएगा। केंद्र ने अदालत में कहा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता गैरकानूनी तरीके से प्राप्त किए गए विशेषाधिकार वाले दस्तावेजों को आधार नहीं बना सकते। वहीं, अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि हमने जो दस्तावेज दाखिल किए हैं या जिन्हें आधार बनाया है, उनका राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। 

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केंद्र सरकार ने राफेल लड़ाकू विमानों से संबंधित दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा किया और उच्चतम न्यायालय से कहा कि संबंधित विभाग की अनुमति के बगैर कोई भी इन्हें पेश नहीं कर सकता। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ के समक्ष केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य कानून की धारा 123 और सूचना के अधिकार कानून के प्रावधानों का हवाला दिया।
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यह पीठ राफेल विमान सौदे के मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिये दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। ये पुनर्विचार याचिका पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दायर कर रखी हैं।
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सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत से कहा कि वह लीक दस्तावेजों को पुनर्विचार याचिका से हटा दे क्योंकि सरकार इन दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा करती है। इसके जवाब में अदालत ने पूछा कि आप किस तरह के विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं? वे उन्हें पहले ही अदालत में पेश कर चुके हैं। यह दस्तावेज पहले से ही सार्वजनिक हो चुके हैं।

जिसके जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि उन्होंने इसे चुराकर अदालत में पेश किया है। राज्य के दस्तावेजों को बिना स्पष्ट अनुमति के प्रकाशित नहीं किया जा सकता है। अटार्नी जनरल ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोई भी संबंधित विभाग की अनुमति के बिना अदालत में गोपनीय दस्तावेज पेश नहीं कर सकता। 

जिसपर न्यायालय ने आरटीआई की धारा 22 और 24 का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां तक कि खुफिया एजेंसी और सुरक्षा प्रतिष्ठान भी भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के उल्लंघन के बारे में जानकारी देने के लिए बाध्य हैं। राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है।

प्रशांत भूषण ने कहा कि राफेल के अलावा ऐसा कोई अन्य रक्षा सौदा नहीं है जिसकी कैग रिपोर्ट में कीमतों का विवरण संपादित किया गया हो। भूषण ने कहा कि राफेल सौदे में भारत सरकार और फ्रांस सरकार के बीच कोई करार नहीं है, क्योंकि फ्रांस ने इसमें कोई संप्रभु गारंटी नहीं दी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम में पत्रकारों के सूत्रों के संरक्षण के प्रावधान हैं।

प्रशांत भूषण ने न्यायालय से कहा कि राफेल के जिन दस्तावेजों पर अटार्नी जनरल विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं, वे प्रकाशित हो चुके हैं और सार्वजनिक दायरे में हैं। भूषण ने कहा कि सूचना के अधिकार कानून के प्रावधान कहते हैं कि जनहित अन्य चीजों से सर्वोपरि है और खुफिया एजेन्सियों से संबंधित दस्तावेजों पर किसी प्रकार के विशेषाधिकार का दावा नहीं किया जा सकता।

 

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