ऊंट के मुंह में जीरे जैसा 36 राफेल का ये सौदा, जानिए क्यों ?
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भारत ने राफेल फाइटर प्लेन का सौदा करके देश के सुरक्षा बेड़े को मजबूत करने की तरफ कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सत्रह महीने पहले ही पिछले साल फाइटर प्लेन खरीदने की घोषणा की थी।
राफेल के हमारे सुरक्षा बेड़े में शामिल होना बेशक आत्मविश्वास की बात है, लेकिन जो सौदा हमने फ्रांस के साथ किया है वो बेहद नाकाफी दिखाई दे रहा है। 59 हजार करोड़ रूपये की लागत से हमने 36 राफेल का सौदा किया है।
इनमें से हमें पहला विमान 36 महीने के भीतर मिल जाएगा है और पूरी खेप हम तक पहुंचने में 67 महीने का वक्त लगेगा। हमारे इस सौदे में भविष्य के सौदों के लिए कोई प्रावधान नहीं है।
हर बार नया सौदा डरावना होगा
इसका सीधा सा मतलब है कि अगर हमें और लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी तो उसके लिए हमें फ्रांस के साथ एक नया सौदा करना होगा। हर बार एक नया सौदा अपने आप में डरावना प्रस्ताव मालूम होता है, जैसा की राफेल डील से महसूस होता है।
सन 2000 में आईएएफ ने पुराने हो चुके एमआईजी की जगह नए फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने की बात कही थी। 126 फाइटर एयरक्राफ्ट्स के के लिए 2007 में टेंडर जारी कर दिया गया। यहां 126 एयरक्राफ्ट खरीदने का नंबर बेहद महत्वपूर्ण है जिसका मतलब है आठ दस्ते।
आईएफ को पाकिस्तान जैसे छलपूर्ण हमलों से मुकाबले के लिए 45 एयरक्राफ्ट दस्तों की जरूरत थी, जिसमें से 42 दस्तों को मंजूरी मिली। वर्तमान में हमारे पास सिर्फ 32 एयरक्राफ्ट दस्ते मौजूद हैं, जो कि पुराने हो चुके हैं। ये हमारे लिए काफी नहीं हैं।
हमारी हवाई सुरक्षा का डरावना पहलू
आईएएफ ने संसदीय स्थाई समिति के समक्ष ये स्पष्ट किया था कि अगर यही दौर चलता रहा तो हमारे पास 2022 तक ये संख्या महज 25 एयरक्राफ्ट दस्तों तक ही रह जाएगी। ये हमारी हवाई सुरक्षा का डरावना पहलू है।
ऐसी कठिन परिस्थिति जब हम युद्ध के मोड़ पर खड़े हैं दो राफेल हवाई दस्तों का सौदा ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है। हालांकि तेजस को लेकर हम थोड़ा सुकून महसूस कर सकते हैं, लेकिन भरोसा मुश्किल है क्योंकि तेजस के पहले दस्ते से परे उसके आगमन को लेकर तक संदेह नजर आ रहा है।
उसके प्रोडक्शन लेवल पर भी सुविधाओं की भारी कमी नजर आती है। हालांकि साब और लॉकहीड मार्टिन ने F-18 और F-16 के लिए भारत को प्रस्ताव दिया है, लेकिन इन एयरक्राफ्ट के प्रस्ताव कब मंजूर होंगे और ये लड़ाकू कब भारत को मिल सकेंगे इसको लेकर कुछ भी साफ नहीं है।
इसलिए हमारे लिए खास है राफेल
भारत के एयरक्राफ्ट दस्तों की ताकत साल दर साल कम होती जा रही है। विशेषज्ञों कहते हैं कि रफेल की ये डील भारत के लिए अच्छी है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश की सुरक्षा को और चाक-चौबंद करने के लिए ये एयरक्राफ्ट बेहद अहम है।
राफेल दो इंजन वाला लड़ाकू वह लड़ाकू विमान है जिसमें करीब 6 मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। इसकी खास बात ये है कि यह करीब 55 हजार फीट की ऊंचाई से भी अपने दुश्मन पर बम गिरा सकता है।
एक मिनट में करीब 60 हजार फुट की ऊंचाई तक ये विमान जा सकता है। इसके अलावा यह 2500 किलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भी भर सकता है।