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Amritpal Singh: पुलिस को पता था पंजाब में फल-फूल रहा खालिस्तान! फिर भी बेबस हुई खाकी, आसान नहीं इस आड़ की काट

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 24 Feb 2023 07:48 PM IST
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सार
Amritpal Singh: किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली में लंबे समय तक प्रदर्शन करने वाले दो नेताओं से हुई बातचीत में इस घटना को लेकर स्थिति साफ होती दिख रही है। इनमें एक नेता का तो खुद का संगठन है। दूसरे नेता, किसी अन्य संगठन में प्रभावशाली भूमिका में हैं। दोनों नेताओं का कहना है, पंजाब के कुछ हिस्सों में खालिस्तान को पहले से ही खुराक मिल रही थी...
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Radical Khalistan Sympathizer Amritpal Singh Active In Punjab, Punjab Police didn't act against him
Amritpal Singh - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पंजाब के अजनाला में गुरुवार को हुई घटना सामान्य नहीं थी। एक तरफ हथियारों से लैस पुलिस तो दूसरी ओर खुद को खालिस्तान का समर्थक बताने वाले ‘वारिस पंजाब दे’ के जत्थेदार अमृतपाल सिंह के हजारों समर्थक। खालिस्तान का जिन्न और भिंडरावाले 2.0 की इस कहानी में दिन-दहाड़े, पंजाब सरकार और खाकी बेबस हो जाती है।

सब कुछ वैसे ही हुआ, जैसे अमृतपाल चाहता था। उसके साथी को रिहा करना पड़ा। अमृतपाल ने जिसकी आड़ ली, उसकी काट पुलिस के पास नहीं थी। डीजीपी गौरव यादव ने कहा, पुलिस पर गुरु ग्रंथ पालकी साहिब की आड़ में धारदार हमला किया गया। जानकारों का कहना है, पंजाब में अगर दूसरी जगहों पर भी यही ‘आड़’ सामने आई, तो आग की लपटों पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा।

खालिस्तान ने पंजाब के अधिकांश हिस्सों में पैर पसारे

किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली में लंबे समय तक प्रदर्शन करने वाले दो नेताओं से हुई बातचीत में इस घटना को लेकर स्थिति साफ होती दिख रही है। इनमें एक नेता का तो खुद का संगठन है। दूसरे नेता, किसी अन्य संगठन में प्रभावशाली भूमिका में हैं। दोनों नेताओं का कहना है, पंजाब के कुछ हिस्सों में खालिस्तान को पहले से ही खुराक मिल रही थी। करीब एक साल से खालिस्तान ने पंजाब के अधिकांश हिस्सों में पैर पसार लिए हैं। पुलिस के पास सब जानकारी है। राज्य का खुफिया महकमा आंखें बंद करके नहीं बैठा है। केंद्र की आईबी से कुछ छिपा नहीं है, मगर देखिए, फिर भी खालिस्तान फल-फूल रहा है। इसे बड़ी खुराक तो सियासतदानों से ही मिल रही है। कोई विपक्ष में बैठकर तो कोई सत्ता की कुर्सी पर क़ाबिज होकर, इसे हवा दे रहा है। जब मांग खालिस्तान की है तो भाईचारा और सौहार्द बिगड़ने का खतरा भी झेलना होगा। संभव है पंजाब में एक बड़ा वर्ग खुद को अल्पसंख्यक न मानने लग जाए।

Punjab: Amritpal Singh Supporters
Punjab: Amritpal Singh Supporters - फोटो : Agency

श्री गुरु ग्रंथ पालकी साहिब जी की आड़ में धारदार हमला

भले ही डीजीपी गौरव यादव कहते हैं, अमृतपाल समर्थकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। पुलिस ने इस भरोसे पर इजाजत दे दी कि जहां पुलिस कहेगी, समर्थक रुक जाएंगे। बाद में पुलिस पर श्री गुरु ग्रंथ पालकी साहिब जी की आड़ में धारदार हमला कर दिया गया। इसमें छह पुलिस कर्मी घायल हो गए। इस घटना पर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। जो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, उनके बयान दर्ज़ किए जाएंगे। वीडियो साक्ष्यों को देखा जा रहा है। पंजाब में खुफिया महकमे के एक पूर्व अधिकारी सवाल के लहजे में बताते हैं, आखिर पुलिस को क्या नहीं पता था। अमृतपाल को लेकर पुलिस के पास तमाम जानकारी थी। पुलिसकर्मी घायल होते हैं, और कोई कुछ नहीं कर पाता। सिलसिलेवार तरीके से सब कुछ वैसे ही होता है, जैसे अमृतपाल चाहता था। अब जांच के नाम पर सांप निकलने के बाद लकीर पीटने की परंपरा निभाई जा रही है। इस घटना में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पीछे अमृतपाल, यह एक नई बात है। इस आड़ की गहराई को समझना होगा।

पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह खुलकर बोल रहे हैं। वे आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की बात कहते हैं। पाकिस्तान, मौके की तलाश में है। खालिस्तान के फन को समय रहते नहीं कुचला गया, तो पाकिस्तान की हिम्मत को पंख लगते देर नहीं लगेगी। अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन इक़बाल सिंह लालपुरा ने कहा, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को थाने के अंदर ले जाना निंदनीय है। थाने में तो शराब भी होती है। पुलिस को बुज़दिली नहीं दिखानी चाहिए। ऐसे तो तलवार के बल पर प्रदर्शनकारी, अपनी हर बात मनवा लेंगे। दोषियों के ख़िलाफ कार्रवाई ज़रूरी है।

खुलेआम खालिस्तान का प्रचार

किसान आंदोलन के दोनों नेताओं का कहना है, सिख प्रचारक एवं जरनैल सिंह भिंडरांवाले का समर्थक अमृपाल सिंह संधू, खुलेआम खालिस्तान का प्रचार कर रहा है। वह छिपकर ऐसा नहीं कर रहा है। उसे मालूम है कि खालिस्तान के लिए लोगों के दिमाग में थोड़ा बहुत स्पेस बाकी है। उसे केवल बढ़ाना है। अमृतपाल, जरनैल सिंह भिंडरांवाले को फ़ॉलो करता है। उसके काम करने का तरीका भी कुछ वैसा ही है। अमृतपाल सिंह कहता है, वह हर उस इंसान के साथ हैं, जो खालिस्तान का समर्थन करता है। एसजीपीसी को केंद्र के हिसाब से नहीं, बल्कि अपने संविधान के मुताबिक चलना चाहिए। वह सिख समुदाय को पूरी तरह से अपने साथ जोड़ने के लिए धार्मिक आस्था का सहारा ले रहा है। पंजाब में युवा वर्ग और किसान, कई समस्याओं से घिरा है। अगर इनका निवारण और अमृतपाल के बढ़ते कदमों को सख्ती से नहीं रोका गया, तो रंगला पंजाब, दोबारा से अस्सी के दशक वाली तबाही के मार्ग पर जाने से नहीं बचेगा।

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