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Quota Violence: लाठीचार्ज के खिलाफ मराठा संगठनों का प्रदर्शन, अनिल देशमुख ने राज्य के गृह विभाग पर लगाया आरोप

Mon, 04 Sep 2023 04:07 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पुणे
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 04 Sep 2023 04:07 PM IST
सार

Quota Violence: पुणे शहर के कथरुड इलाके में विपक्षी दलों शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और कांग्रेस ने सड़कों पर प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि सरकार मराठा समुदाय के धैर्य की परीक्षा न ले। 

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Quota violence: Maratha outfits protest against lathi-charge, ask DY CM Ajit Pawar to quit Shiv Sena-BJP govt
पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ पुणे प्रदर्शन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में विभिन्न संगठनों ने जालना में हुए पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ प्रदर्शन किया। इन संगठनों ने मांग की कि उप मुख्यमंत्री अजित पवार शिवसेना-भाजपा सरकार को छोड़ें। 

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पुणे शहर के कथरुड इलाके में विपक्षी दलों शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और कांग्रेस ने सड़कों पर प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि सरकार मराठा समुदाय के धैर्य की परीक्षा न ले। 

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बारामती में मराठा संगठनों ने नारेबाजी की और राकांपा विधायक और उप मुख्यमंत्री अजित पवार को सरकार को छोड़ने को कहा। भाजपा नेता और अन्य उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। फडणवीस महाराष्ट्र का गृह विभाग भी देखते हैं। 

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Quota violence: Maratha outfits protest against lathi-charge, ask DY CM Ajit Pawar to quit Shiv Sena-BJP govt
राकांपा नेता अंकुश काकडे। - फोटो : सोशल मीडिया

फडणवीस ने मराठा आरक्षण के लिए नहीं किया कोई प्रयास: अंकुश काकडे
प्रदर्शन के दौरान शरद पवार के नेतृत्व वाले राकांपा धड़े के नेता अंकुश काकडे ने कहा, उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने बीते वर्षों में मराठा आरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं किए। उन्होंने कहा कि वह मराठाओं के धैर्य की परीक्षा न लें। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को राज्य सरकार से जालना जिले में मराठाओं के आंदोलन को दबाने के लिए आदेश मिला था। प्रदर्शन में कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के स्थानीय नेता भी शामिल हुए।

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जालना में पुलिस लाठीचार्ज - फोटो : सोशल मीडिया

लाठीचार्ज के दौरान 40 पुलिसकर्मी समेत घायल हुए कई लोग
शुक्रवार को जालना के अंतरावली सारथी गांव में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे एक व्यक्ति को प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल ले जाने से कथित तौर पर इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने आंदोलनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इस दौरान चालीस पुलिस कर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए। हिंसक प्रदर्शन के दौरान राज्य परिवहन की पंद्रह गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। 

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अनिल देशमुख - फोटो : एएनआई (फाइल)

देशमुख का आरोप- गृह विभाग से फोन कॉल के बाद किया गया लाठीचार्ज
उधर, राकांपा नेता अनिल देशमुख ने दावा किया कि जालना के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) को महाराष्ट्र के गृह विभाग से एक फोन कॉल आया जिसके बाद मराठा आरक्षण को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया गया। राज्य के पूर्व गृह मंत्री ने एक सेवानिवृत्त जज से इसकी जांच कराने की भी मांग की। 

राकांपा संस्थापक शरद पवार के वफादार माने जाने वाले देशमुख ने पुलिस की इस कार्रवाई को अमानवीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। नागपुर में पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने दावा किया, मैं महाराष्ट्र का गृहमंत्री रह चुका हूं। मेरी जानकारी के मुताबिक, गृह मंत्रालय से एक फोन कॉल के बाद मराठा प्रदर्शनकारी पर लाठीचार्ज किया गया। पुलिस अधिकारी इस तरह की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के बिना नहीं कर सकते हैं। 

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देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे - फोटो : अमर उजाला

लाठीचार्ज पर मुख्यमंत्री शिंदे ने दी यह प्रतिक्रिया
एक दिन पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की थी कि जालना जिले के पुलिस अधीक्षक तुषार दोषी को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया है और एडीजीपी (कानून व्यवस्था) संजय सक्सेना लाठीचार्ज की घटना की जांच करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो न्यायिक जांच की जाएगी। बुलढाणा में एक राजकीय समारोह को संबोधित करते हुए शिंदे ने कहा कि पुलिस उपाधीक्षक रैंक के दो अधिकारियों का जालना जिले से बाहर तबादला कर दिया गया है।

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