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सुप्रीम कोर्ट: चेक बाउंस से जुड़े मामलों के जल्द निस्तारण को कानून में संशोधन करे केंद्र सरकार

Sat, 17 Apr 2021 05:20 AM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो  नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो  नई दिल्ली। Published by: Amit Mandal Updated Sat, 17 Apr 2021 05:20 AM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने निचली अदालतों के लिए दिशानिर्देश जारी करने को कहा 

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Quick disposal of cases related to cheque bounce Central Government should amend the law: Supreme Court
चेक बुक - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों के जल्द निस्तारण करने के लिए शुक्रवार को कई निर्देश जारी किए। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कानून संशोधन कर एक ही लेनदेन से संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एक वर्ष के भीतर दर्ज मामलों को साथ जोड़ने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने देश के सभी हाईकोर्ट को चेक बाउंस मामलों से निपटने के लिए निचली अदालतों को दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया। 

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चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा, चेक बाउंस मामलों में साक्ष्यों को हलफनामा दायर कर पेश किया जा सकता है। साथ ही गवाहों को बुलाकर जांच करने की आवश्यकता नहीं होगी। पीठ ने नगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट में संशोधन को कहा ताकि एक व्यक्ति के खिलाफ एक साल के भीतर दर्ज चेक बाउंस के केसों को एक साथ जोड़कर मुकदमा चलाया जा सके। पीठ ने शीर्ष अदालत के पुराने फैसले को दोहराते हुए कहा कि निचली अदालतों के पास चेक बाउंस मामलों में मुकदमे का सामना करने के लिए व्यक्तियों को तलब करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की स्वाभाविक शक्तियां नहीं है। 
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देशभर की अदालतों में 35 लाख मामले लंबित 
सनद रहे कि देशभर की अदालतों में चेक बाउंस के करीब 35 लाख मामले लंबित हैं। निचली अदालतों में कुल लंबित मामलों में 40 फीसदी मामले चेक बाउंस के हैं। पीठ ने कहा है कि चेक बाउंस मामलों के जल्द निस्तारण को लेकर शुरू की गई स्वत: संज्ञान की कार्यवाही पर आठ हफ्ते बाद तीन जजों की पीठ विचार करेगी।
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पूर्व जज की अध्यक्षता वाली समिति करेगी विचार 
शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन मुद्दों पर उसने विचार नहीं किया है उन पर बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर सी चव्हाण की अध्यक्षता वाली समिति विचार करेगी। शीर्ष अदालत ने 10 मार्च को इस समिति का गठन किया था और समिति को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने के लिए कहा था कि देश भर में चेक बाउंस के मामलों के जल्द निस्तारण के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

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