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Punjab Exit Poll 2022: योगेंद्र यादव बोले- किसान आंदोलन को भुनाने का लालच ठीक नहीं था, नेताओं की हैसियत छोटी हुई

Mon, 07 Mar 2022 09:00 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 07 Mar 2022 09:00 PM IST
सार

किसान नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के एक तिहाई से भी कम ताकत वाले हिस्से ने पंजाब चुनाव में अपनी ताकत आजमाने का काम किया है, लेकिन चूंकि संयुक्त किसान मोर्चा पहले दिन से ही किसानों के राजनीति में उतरने के खिलाफ था, इसलिए इससे संयुक्त किसान मोर्चा की साख को कोई नुकसान नहीं हुआ है...

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Punjab Exit Poll 2022: samyukt kisan morcha leader Yogendra Yadav said that there was no possibility of big political gains for the farmer leaders in Punjab elections
योगेंद्र यादव। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन पंजाब में किसान नेताओं की पार्टियों को कोई लाभ मिलता हुआ नहीं दिखाई पड़ रहा है, जबकि पंजाब के किसान नेताओं ने ही किसान आंदोलन की अगुवाई की थी। इसे किसान आंदोलन से निकले नेताओं के लिए बड़ी हार माना जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता योगेंद्र यादव ने कहा है कि किसान आंदोलन की साख को भुनाने का लालच करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं था। किसान नेताओं को इससे बचना चाहिए था। चुनाव में उतरने से किसान नेताओं की हैसियत छोटी हुई है, इससे बचाया जाना चाहिए था। हालांकि, किसान नेता ने कहा कि इससे संयुक्त किसान मोर्चा की छवि को कोई नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि मोर्चा पहले दिन से किसी किसान नेता के चुनावी राजनीति में उतरने के खिलाफ था।

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योगेंद्र यादव ने अमर उजाला से कहा कि किसान नेताओं को पंजाब चुनाव में बड़ा सियासी लाभ मिलने की कोई संभावना नहीं थी। इसलिए एक्जिट पोल में जिस तरह का परिणाम आने की संभावना जताई जा रही है, उससे उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ है। पहले दिन से ही इस बात का अनुमान लगाया जा रहा था कि किसान नेताओं को राजनीति में कोई बड़ा लाभ मिलने की संभावना नहीं है और यही परिणाम आता हुआ दिखाई पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि वे हमेशा से इस बात के पक्षधर रहे हैं कि राजनीति की जानी चाहिए, यह देश-समाज के परिवर्तन के लिए बेहद आवश्यक चीज है। लेकिन केवल वे दो-चार विधायक बनाने की राजनीति से वे इत्तेफाक नहीं रखते। बल्कि वे सियासत में बड़ी लकीर खींचने में विश्वास करते हैं, जहां आम जनता के हितों की दीर्घकालिक और सर्वजन समाज हितैषी राजनीति की जाती है।
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किसान नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के एक तिहाई से भी कम ताकत वाले हिस्से ने पंजाब चुनाव में अपनी ताकत आजमाने का काम किया है, लेकिन चूंकि संयुक्त किसान मोर्चा पहले दिन से ही किसानों के राजनीति में उतरने के खिलाफ था, इसलिए इससे संयुक्त किसान मोर्चा की साख को कोई नुकसान नहीं हुआ है।


पंजाब चुनाव में खालिस्तान का मुद्दा उछाले जाने पर योगेंद्र यादव ने कहा कि यह केवल चुनावी राजनीति का परिणाम है कि इस तरह का मुद्दा भी उठाने की कोशिश की जा रही है जिसे जनता ने 30 साल पहले ही नकार दिया है। उन्होंने कहा कि खालिस्तान का मुद्दा पंजाब की राजनीति में अब कोई महत्त्व नहीं रखता और बार-बर उसका नाम लेकर बेवजह उसे तूल नहीं दिया जाना चाहिए।

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