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भीमा कोरेगांव केस: आनंद तेलतुंबड़े की गिरफ्तारी को कोर्ट ने बताया गैर-कानूनी, दिया रिहा करने का आदेश

Sun, 03 Feb 2019 08:35 AM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अजय सिंह Updated Sun, 03 Feb 2019 08:35 AM IST
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Pune Court sets free scholar anand teltumbde held illegally arrested bhima koregaon
आनंद तेलतुंबड़े
शनिवार को विशेष यूएपीए कोर्ट ने अनुसूचित जाति के स्कॉलर आनंद तेलतुंबड़े को रिहा कर दिया है। कोर्ट ने यलगार परिषद् केस में इस गिरफ्तारी को गैर कानूनी और सुप्रीम कोर्ट से तेलतुंबडे को मिली चार हफ्तों की राहत के फैसले का उल्लंघन बताते हुए, रिहा करने का आदेश दिया है। तेलतुंबड़े को शनिवार की सुबह मुंबई हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। तेलतुंबड़े कोच्चि से मुंबई आए रहे थे। इससे पहले शुक्रवार को पुणे की सेशन कोर्ट ने आनंद के खिलाफ पर्याप्त सबूत का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से पहले अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज कर दिया था।  
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एडिशनल सेशन जज किशोर वडाने ने फैसला सुनाने के दौरान कहा था कि मेरे विचार में जांच अधिकारी द्वारा अपराध के कथित मामले में वर्तमान अभियुक्त की संलिप्तता दर्शाने के लिए पर्याप्त सामग्री एकत्र की गई है। इसके अलावा वर्तमान आरोपी के संबंध में जांच बहुत महत्वपूर्ण चरण में है। 
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पुलिस के मुताबिक 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में हुई यलगार परिषद के आयोजन में प्रतिबंधित माओवादी संगठनों का हाथ था और इसके बाद ही 1 जनवरी, 2018 को भीमा-कोरेगांव हिंसा हुई थी। इस मामले में पुलिस को आनंद तेलतुंबड़े की कई माओवादियों से बातचीत के सबूत मिले हैं। 
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गिरफ्तारी के बाद आनंद तेलतुंबडे को मुंबई के विले पार्ले पुलिस स्टेशन में रखा गया था। बता दें कि कुछ महीने पहले पुणे पुलिस ने तेलतुंबडे के गोवा स्थित आवास पर भी छापेमारी की थी, जिसमें पुलिस को आनंद के पास से कई महत्वपूर्ण सबूत मिले थे। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में कोरेगांव भीमा हिंसा के सिलसिले में उनके खिलाफ एफआईआर को रद्द करने की याचिका खारिज करने के बाद तेलतुंबडे ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुणे की अदालत का दरवाजा खटखटाया था।


वरिष्ठ वकील यूएपीए कोर्ट के आदेश को पुलिस के लिए झटका बता रहे हैं मगर पुणे कमिश्नर के. वेंकटेशम के मुताबिक गिरफ्तारी कानूनी राय के आधार पर की गई थी अब कोर्ट के आदेश के बाद हम दूसरे कानूनी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं। तेलतुंबडे के वकील नाहर ने पुलिस की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन बताया और कहा कि यूएपीए कोर्ट का फैसला पुलिस के लिए एक झटका है, वह कानून के अनुसार काम करने को बाध्य हैं।
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