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दाभोलकर हत्याकांड: पुणे की अदालत ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का दिया आदेश, 15 सितंबर को अगली सुनवाई

Tue, 07 Sep 2021 03:43 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 07 Sep 2021 03:43 PM IST
सार

पुणे की एक अदालत ने 2013 के नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मामले के चार आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

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Pune court orders framing of charges against 4 accused in 2013 Narendra Dabholkar murder case under many Sections
नरेंद्र दाभोलकर - फोटो : Social media

विस्तार

पुणे की एक अदालत ने 2013 के नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मामले के चार आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 120 (बी), 34 के साथ यूएपीए की धारा 16 और धारा 3 (25), 27 (1), 27 (3) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी। बता दें कि तर्कशास्त्री डॉ. नरेंद्र दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाने में अग्रसर रहे थे।

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सीबीआई ने अदालत से यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की मांग की थी
बता दें कि डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की 2013 में हुई हत्या के मामले में सीबीआई ने विशेष अदालत से पांच आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत मुकदमा चलाने की मांग की थी। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों ने दाभोलकर की हत्या कर लोगों के एक वर्ग के बीच आतंक पैदा करने का प्रयास किया। 
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (विशेष अदालत के न्यायाधीश) एस आर नावंदर के समक्ष बीते शुक्रवार को पांच आरोपियों डॉ. विरेन्द्र सिंह तावडे, शरद कलसकर, सचिन अंदुरे, वकील संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर दलीलें पेश की गईं। विशेष लोक अभियोजक प्रकाश सूर्यवंशी ने सीबीआई की ओर से दलीलें रखीं। 
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सूर्यवंशी ने आरोपियों के खिलाफ  आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक षडयंत्र), 120 बी के साथ 302 (हत्या), शस्त्र कानून की संबंधित धाराओं और यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य के लिए सजा) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। उन्होंने कहा, यूएपीए की धारा 15 की परिभाषा समाज या समाज के एक वर्ग के बीच आतंक पैदा करना है।


मौजूदा मामले में हमारी दलील है कि लोगों के एक वर्ग के बीच आतंक पैदा करने के लिए डॉ.दाभोलकर की हत्या के लिए बंदूक का इस्तेमाल किया गया इसलिए यूएपीए की धारा 16 इस मामले में लगाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीबीआई को यूएपीए की धारा 16 लगाने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मिली थी। 

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