पुडुचेरीः सीएम पद पर मचा घमासान, नारायण सामी ने भी ठोका दावा
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में पुडुचेरी ही एकमात्र ऐसा राज्य रहा जहां कांग्रेस को कुछ जश्न मनाने का मौका मिला, लेकिन नेताओं की आपसी खींचतान में कांग्रेस की यह खुशी खटाई में पड़ती दिख रही है। यहां कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में है, लेकिन मामला नेता को लेकर फंस गया है। 30 विधानसभा सीटों वाले इस केन्द्र शासित प्रदेश में कांग्रेस की तरफ से सीएम पद के लिए कई दावेदार खड़े हो गए हैं।
इनमें सबसे पुख्ता दावा ठोका है वयोवृद्ध नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री नारायण सामी ने। खास बात ये है कि वह अभी विधानसभा के सदस्य भी नहीं हैं लेकिन उन्होंने अपने साथ 15 विधायकों के समर्थन का दावा किया है।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार एआईसीसी महासचिव वी नारायणसामी के इस दावे के बाद पुडुचेरी में सीएम पद को लेकर पार्टी असमंजस में फंस गई है। आलम ये है कि राज्य में पार्टी दो धड़े में बंटती दिख रही है। उनके विरोधी गुट का दावा है कि नारायणसामी को मात्र पांच विधायकों का ही समर्थन है, 15 का नहीं। वहीं राज्य कांग्रेस के मुखिया ए नमाचिवयम ने इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से भी मुलाकात की वह भी राज्य में सीएम पद के प्रमुख दावेदार बताए जा रहे हैं। हालांकि उनके कुछ देर बाद ही नारायणसामी भी कांग्रेस अध्यक्षा से मिलने पहुंचे।
नए दावों से बढ़ी कांग्रेस आलाकमान की दिक्कत
नारायण सामी और नमाचिवयम के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री वी वैथलिंगम भी इस रेस में शामिल बताए जा रहे हैं। पिछली विधानसभा में नेता विपक्ष की भूमिका में रहने के कारण उनका दावा भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
वैथलिंगम दो बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, उनकी गिनती कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में होती है। नेताओं की आपसी खींचतान ने कांग्रेस आलाकमान की दिक्कत बढ़ा दी है।
नारायण सामी जहां अपने पक्ष में अधिकतर विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं वहीं नमाचिवयम राज्य की उस प्रभावी वनियार जाति से आते हैं जिसका पुडुचेरी की आबादी में 30 फीसदी प्रतिनिधित्व है। सूत्रों की मानें तो राज्य के प्रभारी बनाए गए एआईसीसी महासचिव मुकुल वासनिक और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद जल्द इस मुद्दे का हल निकालने के लिए पुडुचेरी जा सकते हैं।
बता दें कि पुडुचेरी में विधानसभा की तीस सीटें हैं, जिनमें से 15 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली है। विपक्षी एआईएनआर कांग्रेस को 8 और जयललिता की एआईएडीएमके को 4 सीटें मिली हैं। जबकि करुणानिधि की डीएमके को 2 सीटें और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली है।