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संसद सत्र का पता नहीं, धरने-प्रदर्शन का दौर शुरू
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Fri, 17 Nov 2017 03:09 PM IST
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भारतीय मजदूर संघ
- फोटो : File Photo
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संसद के शीत सत्र की तारीख अभी तक सामने नहीं आ पाई है, लेकिन सत्र को मद्देनजर रखते हुए धरने-प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है।
सरकार की आर्थिक एवं श्रमिक नीतियों को बदलवाने के लिए संघ की संस्था भारतीय मजदूर संघ आज शुक्रवार को रामलीला मैदान से लाखों मजदूरों को लेकर संसद तक मार्च कर रही है। 20 नवंबर को किसान संगठनों ने किसान मुक्ति संसद का ऐलान कर संसद मार्च का आयोजन रखा है, लेकिन संसद के शीत सत्र की तारीखों का अभी अता-पता नहीं है। सरकार की ओर से तारीख तय करने के लिए होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की राजनैतिक मामलों की समिति की बैठक भी अभी नहीं हो पाई है।
गुरुवार को सीसीईए की बैठक के बाद सीसीपीए के आसार थे, मगर सरकार की ओर से इस आशय के संकेत अब तक नहीं दिए गए हैं। अमूमन नवंबर मध्य से संसद के शीत सत्र की शुरुआत हो जाती है, लेकिन देश की दोनों बड़ी राजनैतिक पार्टियां गुजरात विधानसभा चुनाव की जंग में जुटी हुई हैं। शायद उनकी प्राथमिकता संसद में चर्चा नहीं राज्यों के चुनाव में होने वाली जीत-हार है।
ये भी पढ़ेंः श्रम कानूनों में बदलाव के नाम पर मजदूरों का शोषण बंद हो
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भारतीय मजदूर संघ की महारैली शुरू
ऐतिहासिक रामलीला मैदान में भारतीय मजदूर संघ की महारैली शुरू हो चुकी है। देशभर से आए लाखों की संख्या में मजदूर इस महारैली में शामिल हैं। मजदूर नेताओं के संबोधन के बाद ये सभी अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च करेंगे।
मजदूरों की मुख्य मांग न्यूनतम वेतन 18000 प्रतिमाह करने, श्रम कानूनों में सुधार के नाम पर मजदूर-कर्मचारियों पर होने वाले हमले बंद हो, श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वालों को सजा का प्रावधान, ठेका मजदूरी बंद करने, समान काम समान वेतन लागू करने, सातवें वेतन आयोग से पनपी विसंगतियों को दूर करने, आंगनवाड़ी कर्मियों को सरकारी नौकरी समान वेतन प्रदान करने, एफडीआई पर रोक, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का विनिवेश बंद करने और नीति आयोग में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करनी है।
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सरकार की आर्थिक एवं श्रमिक नीतियों को बदलवाने के लिए संघ की संस्था भारतीय मजदूर संघ आज शुक्रवार को रामलीला मैदान से लाखों मजदूरों को लेकर संसद तक मार्च कर रही है। 20 नवंबर को किसान संगठनों ने किसान मुक्ति संसद का ऐलान कर संसद मार्च का आयोजन रखा है, लेकिन संसद के शीत सत्र की तारीखों का अभी अता-पता नहीं है। सरकार की ओर से तारीख तय करने के लिए होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की राजनैतिक मामलों की समिति की बैठक भी अभी नहीं हो पाई है।
गुरुवार को सीसीईए की बैठक के बाद सीसीपीए के आसार थे, मगर सरकार की ओर से इस आशय के संकेत अब तक नहीं दिए गए हैं। अमूमन नवंबर मध्य से संसद के शीत सत्र की शुरुआत हो जाती है, लेकिन देश की दोनों बड़ी राजनैतिक पार्टियां गुजरात विधानसभा चुनाव की जंग में जुटी हुई हैं। शायद उनकी प्राथमिकता संसद में चर्चा नहीं राज्यों के चुनाव में होने वाली जीत-हार है।
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भारतीय मजदूर संघ की महारैली शुरू
ऐतिहासिक रामलीला मैदान में भारतीय मजदूर संघ की महारैली शुरू हो चुकी है। देशभर से आए लाखों की संख्या में मजदूर इस महारैली में शामिल हैं। मजदूर नेताओं के संबोधन के बाद ये सभी अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च करेंगे।
मजदूरों की मुख्य मांग न्यूनतम वेतन 18000 प्रतिमाह करने, श्रम कानूनों में सुधार के नाम पर मजदूर-कर्मचारियों पर होने वाले हमले बंद हो, श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वालों को सजा का प्रावधान, ठेका मजदूरी बंद करने, समान काम समान वेतन लागू करने, सातवें वेतन आयोग से पनपी विसंगतियों को दूर करने, आंगनवाड़ी कर्मियों को सरकारी नौकरी समान वेतन प्रदान करने, एफडीआई पर रोक, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का विनिवेश बंद करने और नीति आयोग में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करनी है।
सरकार की अपनी ही संस्था सड़कों पर
भारतीय मजदूर संघ का प्रदर्शन
- फोटो : File Photo
भारतीय मजदूर संघ को सरकार का सहयोगी संगठन इसलिए माना जाता है कि भाजपा की तरह वह भी आरएसएस की एक संस्था है जो कि मजदूर क्षेत्र में कार्य करती है। लेकिन मजदूर हितों के मद्देनजर सरकार की अपनी ही संस्था ने सड़क पर संघर्ष का निर्णय लिया है।
संघ के अन्य संगठनों स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय किसान संघ के साथ मिलकर मजदूर संघ भी केंद्र की आर्थिक नीतियों के खिलाफ समय-समय पर मुखर रहा है।
संघ के अन्य संगठनों स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय किसान संघ के साथ मिलकर मजदूर संघ भी केंद्र की आर्थिक नीतियों के खिलाफ समय-समय पर मुखर रहा है।