प्रधानमंत्री के बयान पर बिफरे आंदोलनकारी, बोले- 'कॉर्पोरेटजीवी सरकार के मुखिया हम पर सवाल उठा रहे हैं'
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि ये लोग एफडीआई के पक्ष में हैं। पब्लिक सेक्टर को पूरी तरह से खत्म कर रहे हैं। ये लोग हमें परजीवी कैसे कह सकते हैं। ये लोग तो खुद कॉर्पोरेटजीवी हैं...
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राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान आंदोलन में शामिल कुछ लोगों को आंदोलनजीवी और परजीवी करार दिया। इसके बाद से प्रधानमंत्री विपक्ष समेत आंदोलन करने वाले नेताओं के निशाने पर हैं। आंदोलन करने वाले नेताओं का कहना है कि ये कॉर्पोरेटजीवी सरकार है। हम लोग किसानों और मजदूरों के बल पर चलने वाले लोग हैं। जिस व्यक्ति ने कभी अपने जीवन में आंदोलन नहीं किया न ही कभी जेल गए, वे आज आंदोलन पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने अमर उजाला से कहा कि ये लोग खुद ही परजीवी हैं। ये पूरी दुनिया जानती है। ये लोग एफडीआई के पक्ष में हैं। पब्लिक सेक्टर को पूरी तरह से खत्म कर रहे हैं। ये लोग हमें परजीवी कैसे कह सकते हैं। ये लोग तो खुद कॉर्पोरेटजीवी हैं। हम लोग किसानों और मजदूरों के बल पर चलने वाले लोग हैं। आज पूरी सरकार के दिल और दिमाग को किसान आंदोलन ने हिला कर रख दिया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने अमर उजाला से कहा 'जिस व्यक्ति ने कभी अपने जीवन में आंदोलन नहीं किया है, न कभी जेल गए वे आज आंदोलन पर सवाल खड़े कर रहे हैं'। आज उन्हें सभी लोग आंदोलनकारी और आंदोलनजीवी नजर आ रहे हैं। उन्हें शायद देश में आंदोलन के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। तभी वे आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों को आंदोलनजीवी और परजीवी बोल रहे हैं।
दूसरी तरफ भारतीय किसान संघ के महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी ने आंदोलनकारियों पर हमला बोलते हुए कहा कि आज जो लोग किसान नेता बने घूम रहे हैं, अगर उनके संगठन की जांच करेंगे तो सच्चाई क्या है सबको पता चल जाएगी। जब भी सरकार और बु़द्धजीवियों ने किसानों को यह समझाने की कोशिश कि आप लोगों की आड़ में दूसरी ताकतें लगी हुई हैं और वे आंदोलन को बदनाम करने की साजिश कर रही हैं। ऐसे में इन आंदोलकारियों ने किसानों को यह कहकर भड़काया कि सरकार आप लोगों को पाकिस्तानी और खालिस्तानी कह रही है। ये आंदोलनजीवी नेता ही किसानों को भड़का रहे हैं।
मेघा पाटकर का कहना है हम आंदोलनजीवी शुरू से ही है। इसका अर्थ होता है जीवन के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले। मुझे तो प्रसन्नता हुई ये सुनकर। आज आंदोलन हमारे जीवन का हिस्सा है। अब प्रधानमंत्री को इस बिरादरी से डर लग रहा है। आज किसान से लेकर मजदूर तक सभी को अपने हक की आवाज उठाने के लिए आंदोलनजीवी बनना पड़ रहा है।
पाटकर ने कहा कि जो सत्ता में होता है वह आंदोलन को नकाराता है और उसे बदनाम करने की कोशिश करता है। आंदोलन करना सभी का संवैधानिक अधिकार है। आज जब लोकतंत्र के सभी स्तंभों को दीमक लग गई है तो आंदोलन ही एकमात्र रास्ता रह गया है। प्रधानमंत्री राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर भाषण देना था इसके बदले उन्होंने आंदोलन पर भाषण दे दिया।
लेफ्ट नेता हन्नान मौला ने कहा, किसानों को लेकर प्रधानमंत्री को संसद में कुछ बोलना था, लेकिन इस बारे में उन्होंने कुछ कहा ही नहीं। सीधे आंदोलन करने वाले लोगों को गाली देना शुरु कर दिया। आज जो लोग सरकार के खिलाफ बोल रहा है उन पर हमला हो रहा है। पहले कुछ विचारधारा से जुड़े लोगों पर हमला होता था, लेकिन अब पूरी विचारधारा को ही निशाना बनाया जा रहा है।
ऑल इंडिया ड्रमोक्रेटिक वुमन एसोसिएशन की मरियम धावले ने अमर उजाला से कहा, आंदोलन करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। हमारे प्रधानमंत्री आज पूरी तरह से 'हिटलरशाही' में विश्वास रखते हैं। वो कुछ भी कहें इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। प्रधानमंत्री मोदी का फासीवादी और दमन का जो रुख है ये भारत में नहीं चलने वाला है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा था कि इस देश में एक नई जमात का जन्म हुआ है, जिसका नाम है आंदोलनजीवी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये लोग खुद आंदोलन नहीं चला सकते हैं। लेकिन किसी का आंदोलन चल रहा हो, तो वहां पहुंच जाते हैं।