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केंद्रीय कर्मियों का यात्रा भत्ता रोके जाने का विरोध शुरू, प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने की आदेश वापस लेने की मांग

Mon, 07 Dec 2020 01:01 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 07 Dec 2020 01:01 PM IST
सार

भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ का कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान देश के सभी हिस्सों में लॉकडाउन लगाया गया था। यह फैसला कर्मियों का नहीं था, बल्कि केंद्र सरकार ने ही इसे लागू किया था...

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Protest against the withholding of Transport allowance of central workers started, Pratiraksha Mazdoor Sangh demands the withdrawal of the order
Government office - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

केंद्र सरकार के उस फैसले को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं, जिसमें कोरोना के लॉकडाउन के दौरान कर्मियों को परिवहन भत्ता नहीं देने की बात कही गई है। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने वित्त मंत्रालय में व्यय विभाग के सचिव से उक्त आदेशों को वापस लेने की मांग की है। वित्त मंत्रालय का यह आदेश न केवल अप्रिय है, बल्कि यह नियमों का उल्लंघन भी है। मजदूर संघ के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के दौरान यात्रा भत्ता (ट्रांसपोर्ट अलाउंस) न देना, यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है।

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बता दें कि व्यय विभाग ने पिछले दिनों एक आदेश जारी कर केंद्रीय कर्मियों को यात्रा भत्ता नहीं देने की बात कही थी। इसमें वे सरकारी कर्मचारी शामिल हैं, जिन्होंने कोरोना संक्रमण के दौरान वर्क फ्रॉम होम किया है। चूंकि ये कर्मचारी अपने घर से कार्यालय तक नहीं पहुंचे, इसलिए इन्हें यात्रा भत्ता नहीं मिलेगा। इसमें शारीरिक तौर पर विकलांग, गर्भवती महिलाएं और अस्थायी तौर से सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल करने वाले अधिकारी भी शामिल हैं।
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भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ का कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान देश के सभी हिस्सों में लॉकडाउन लगाया गया था। यह फैसला कर्मियों का नहीं था, बल्कि केंद्र सरकार ने ही इसे लागू किया था। जब देश में परिवहन के सभी संसाधन बंद थे तो उस वक्त डीओपीटी ने अनेक विभागों के कर्मियों को घर से काम करने के लिए कहा था। कर्मी अपनी मर्जी से घर पर नहीं थे, अपितु उन्होंने सरकार के आदेशों का पालन किया था।
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यदि कोई कर्मचारी एक कैलेंडर माह में कार्यालय के काम से, ट्रेनिंग पर या किसी दूसरी जगह पर जाता है तो उसे ड्यूटी माना जाता है। ऐसे में कर्मचारी की छुट्टी केवल तभी मानी जाएगी, जब वह निजी कार्यवश कार्यालय में नहीं पहुंचा हो। कोरोना के दौरान तो सरकार ने खुद आदेश जारी कर घर से काम करने के लिए कहा था। इसका मतलब कर्मी अपनी ड्यूटी पर रहे हैं। ऐसे में उनका यात्रा भत्ता काटना गलत है।

आदेशों में कही गई थी ये बात...

वित्त विभाग में विभिन्न मंत्रालयों से यात्रा भत्ता को लेकर अनेक सवाल पूछे जा रहे थे। आदेशों में अस्पष्टता के चलते अनेक कर्मचारियों का भत्ता जारी नहीं हो सका। कोरोना संक्रमण के दौरान 23 मार्च से 20 अप्रैल और उसके बाद 20 मई तक हुए लॉकडाउन में बहुत से कर्मचारी कार्यालय नहीं पहुंच सके थे। कैलेंडर माह में उन्होंने ज्वाइन नहीं किया था।

ऐसे कर्मियों को घर से ही काम करने के लिए कहा गया था। इस वजह से अब उन्हें यात्रा भत्ता नहीं मिलेगा। वजह, इन कर्मियों ने कार्यालय आने के लिए कुछ खर्च नहीं किया है। दूसरा, जो कर्मी पूरे कैलेंडर माह में अपने घर से ही काम करते रहे, उन्हें भी भत्ता नहीं मिलेगा।



शारीरिक तौर पर विकलांग कर्मी और गर्भवती महिलाएं, जिन्हें कार्यालय आने से छूट प्रदान की गई थी, अब इन्हें भी उस अवधि का यात्रा भत्ता नहीं दिया जाएगा। डीओपीटी ने उनके कार्यालय नहीं आने के आदेश जारी किए थे। ये भी यात्रा भत्ते के हकदार नहीं होंगे। ऐसे अपात्र अधिकारी, जो घर से कार्यालय तक आने के लिए अस्थायी तौर पर सरकारी वाहन का इस्तेमाल करते रहे हैं, उन्हें भी भत्ता नहीं मिलेगा।

 

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