{"_id":"6a622a847d5d89fd4e0a85da","slug":"project-kusha-indias-new-air-defence-shield-to-strike-targets-up-to-400-km-away-why-is-it-game-changer-2026-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत की नई सुरक्षा ढाल: लड़ाकू विमान से लेकर ड्रोन तक मार गिराएगा कुशा मिसाइल, क्यों हो रही S-400 से तुलना?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
भारत की नई सुरक्षा ढाल: लड़ाकू विमान से लेकर ड्रोन तक मार गिराएगा कुशा मिसाइल, क्यों हो रही S-400 से तुलना?
Thu, 23 Jul 2026 08:21 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Thu, 23 Jul 2026 08:21 PM IST
सार
Project Kusha Missile System: डीआरडीओ ने ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से कुशा लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह प्रणाली लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को लंबी दूरी से मार गिराने में सक्षम होगी। यह भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। क्या 'कुशा' भारत को आयातित एयर डिफेंस सिस्टम पर निर्भरता से मुक्त करेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन
कुश मिसाइल सिस्टम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत ने अपनी स्वदेशी वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने गुरुवार को ओडिशा तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से 'कुशा' लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (LR-SAM) का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। यह परीक्षण भारत के स्वदेशी लंबी दूरी के एयर डिफेंस कार्यक्रम 'प्रोजेक्ट कुशा' के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। इसका उद्देश्य देश के लिए ऐसी स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली तैयार करना है, जो लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों को रोक सके।
डीआरडीओ के अनुसार, यह पहला परीक्षण एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य के खिलाफ किया गया, जो तेज गति और अधिक ऊंचाई से आने वाले हवाई खतरे की तरह तैयार किया गया था। 'कुशा' मिसाइल प्रणाली ने इस लक्ष्य को सफलतापूर्वक रोक दिया। डीआरडीओ ने बताया कि इस प्रणाली के सभी प्रमुख हिस्से, जिनमें मिसाइल, रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और अन्य उपकरण शामिल हैं, डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और उद्योग साझेदारों ने मिलकर विकसित किए हैं। यह सफलता भारत के स्वदेशी एयर डिफेंस कार्यक्रम के विकास में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।
ये भी पढ़ें- 'छात्र सड़क पर हैं तो हम भी उनके साथ':राहुल गांधी की बस यात्रा से गरमाई सियासत, गांधी स्मृति पहुंचा विपक्ष
विज्ञापन
डीआरडीओ के अनुसार, यह पहला परीक्षण एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य के खिलाफ किया गया, जो तेज गति और अधिक ऊंचाई से आने वाले हवाई खतरे की तरह तैयार किया गया था। 'कुशा' मिसाइल प्रणाली ने इस लक्ष्य को सफलतापूर्वक रोक दिया। डीआरडीओ ने बताया कि इस प्रणाली के सभी प्रमुख हिस्से, जिनमें मिसाइल, रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और अन्य उपकरण शामिल हैं, डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और उद्योग साझेदारों ने मिलकर विकसित किए हैं। यह सफलता भारत के स्वदेशी एयर डिफेंस कार्यक्रम के विकास में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।
विज्ञापन
क्यों हो रही S-400 से तुलना?
- प्रोजेक्ट कुशा की तुलना रूस के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से इसलिए की जा रही है क्योंकि दोनों का उद्देश्य लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों को रोकना है। प्रोजेक्ट कुशा को भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसकी सबसे लंबी दूरी वाली इंटरसेप्टर मिसाइल 350 से 400 किलोमीटर तक लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम होगी।
- यह प्रणाली लड़ाकू विमान, स्टील्थ विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल, प्रिसिजन गाइडेड हथियार और कुछ श्रेणी की बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे खतरों को इंटरसेप्ट करने के लिए तैयार की जा रही है। साथ ही इसे भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से जोड़ा जाएगा।
- इससे कई हवाई खतरों पर एक साथ नजर रखकर कार्रवाई की जा सकेगी। हालांकि, डीआरडीओ ने इसे S-400 का सीधा विकल्प नहीं बताया है, लेकिन इसकी लंबी मारक क्षमता और आधुनिक वायु रक्षा क्षमताओं के कारण इसकी तुलना S-400 जैसी प्रणालियों से की जा रही है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- 'छात्र सड़क पर हैं तो हम भी उनके साथ':राहुल गांधी की बस यात्रा से गरमाई सियासत, गांधी स्मृति पहुंचा विपक्ष
कुशा मिसाइल सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत क्या?
- लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल, ड्रोन (यूएवी) और बड़े दुश्मन विमानों को मार गिराने में सक्षम।
- लंबी दूरी और अलग-अलग ऊंचाई पर हवाई खतरों को रोक सकता है।
- भारत के भविष्य के लंबी दूरी वाले एयर डिफेंस नेटवर्क की रीढ़ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- इसमें तीन प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होंगी।
- एम-1 इंटरसेप्टर की मारक क्षमता लगभग 150 किलोमीटर होगी।
- एम-2 इंटरसेप्टर की मारक क्षमता लगभग 250 किलोमीटर होगी।
- एम-3 इंटरसेप्टर की मारक क्षमता 350 से 400 किलोमीटर तक होगी।
- स्टील्थ विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे आधुनिक हवाई खतरों को भी रोक सकेगा।
- प्रिसिजन गाइडेड हथियारों और कुछ श्रेणी की बैलिस्टिक मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट करने की क्षमता होगी।
- इसका उद्देश्य भारत को स्वदेशी लंबी दूरी की मजबूत वायु रक्षा क्षमता उपलब्ध कराना है।