{"_id":"6042a0648ebc3e591c3687e0","slug":"problem-of-computer-age-is-cut-and-paste-says-justice-dy-chandrachud","type":"story","status":"publish","title_hn":"जस्टिस चंद्रचूड़ बोले: हाईकोर्ट के कंप्यूटर युग में कट, कॉपी और पेस्ट की प्रक्रिया से तंग आ गया हूं","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
जस्टिस चंद्रचूड़ बोले: हाईकोर्ट के कंप्यूटर युग में कट, कॉपी और पेस्ट की प्रक्रिया से तंग आ गया हूं
Sat, 06 Mar 2021 04:03 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 06 Mar 2021 04:03 AM IST
विज्ञापन
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को कहा, हाईकोर्टों द्वारा कंप्यूटर युग में कट, कॉपी और पेस्ट (आदेशों की नकल और उसे ज्यों का त्यों चिपका देना) की प्रक्रिया अपनाए जाने से हम तंग आ गए हैं। हाईकोर्टों को अपने आदेशों में अपने विवेक का स्वतंत्रता से इस्तेमाल करना चाहिए। आदेश की नकल करना और उसे वैसे ही चिपका देना, कंप्यूटर युग की समस्याओं में से एक है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा, किसी आदेश की पुष्टि के लिए स्वतंत्र वजहों का हवाला दिया जाना चाहिए। विवेक का स्वतंत्र प्रयोग होना चाहिए। न्यायाधिकरण के फैसले के कट, कॉपी, पेस्ट केवल पृष्ठों की संख्या बढ़ाता है, लेकिन अपील के मुख्य मुद्दे का जवाब नहीं देता है।
विज्ञापन
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने यह अहम टिप्पणी उड़ीसा हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की याचिका पर दी। उड़ीसा हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें कहा गया था कि एक व्यक्ति को 2011 में अनुशासनात्मक कार्रवाई के चलते आईएएस कैडर देने से इनकार कर दिया था।
विज्ञापन
पीठ ने कहा, यह अनुच्छेद 320 के तहत यूपीएससी के नियम हैं न कि कार्मिक विभाग के दिशा-निर्देश। पीठ ने बिभु प्रसाद सारंगी और अन्य के मामले में उड़ीसा हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए यूपीएससी की याचिका स्वीकार कर ली। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, हाईकोर्ट ने इस मामले में अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया, केवल न्यायाधिकरण के आदेश की नकल की गई।