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प्रियंका गांधी वाड्रा... कांग्रेस की राजनीति के नेपथ्य से मुख्य मंच तक का सफर

Thu, 24 Jan 2019 04:54 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Thu, 24 Jan 2019 04:54 AM IST
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Priyanka Gandhi Vadra : Political journey of Priyanka Gandhi
प्रियंका गांधी - फोटो : पीटीआई

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा वैसे तो पार्टी की राजनीति में परदे के पीछे लंबे समय से सक्रिय रहीं हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक रूप से राजनीतिक मैदान में उतरने में करीब दो दशक लग गए। वे अपने भाई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल की तरह ही नेहरू-गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना जारी रखेंगी।

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प्रियंका (47) की ओर देश का ध्यान पहली बार तब गया था जब वे अपने पिता पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ करीब 28 साल पहले सार्वजनिक तौर पर दिखीं। इसके बाद अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल के लिए स्टार प्रचारक के रूप में भी काम किया लेकिन इस पर संशय बना रहा कि वे पार्टी के लिए बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगी या नहीं। अब यह संशय समाप्त हो गया है जब उनके बड़े भाई राहुल ने उन्हें आगामी लोकसभा चुनावों से ठीक पहले पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव घोषित कर दिया है।
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प्रियंका में लोग उनकी दादी; देश में सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहीं; इंदिरा गांधी की छवि देखते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वे केवल दिखने में ही वैसी नहीं हैं, बल्कि उनकी लोगों तक आसान पहुंच की भी काबिलियत अपनी दादी की तरह ही है। अपने परिवार के परंपरागत संसदीय क्षेत्र अमेठी और रायबरेली में उनकी यह मजबूती दिखती रही है। प्रियंका के साथ काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लोगों से सीधे जुड़ती हैं और सीधे जुड़ने में ही विश्वास रखती हैं।

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1999 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी के लिए किया था प्रचार

प्रियंका का राजनीति में वैसे तो प्रवेश वर्ष 1999 के लोकसभा चुनावों में हो गया था, जब वे अमेठी में अपनी मां सोनिया गांधी के लिए प्रचार में जुटीं थीं। सोनिया के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उनका यह पहला चुनाव था। भाजपा ने उनके अंकल और राजीव गांधी के पूर्व विश्वस्त अरुण नेहरू को सोनिया के सामने उतारा था। तब प्रियंका ने मतदाताओं को संबोधित करते हुए कहा था, ‘एक व्यक्ति जिसने अपने भाई की पीठ में छुरा भोंका, आप उसे यहां आने की इजाजत कैसे दे सकते हैं? उनकी यहां आने की हिम्मत भी कैसे हुई?’ इसके बाद प्रियंका ने वर्ष 2004 में राहुल के लिए अमेठी में भी सफलतापूर्वक कमान संभाली। यह राहुल का पहला चुनाव था।

अब प्रियंका रायबरेली और अमेठी के अलावा सीधे तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान संभालेंगी। इस क्षेत्र में करीब 40 लोकसभा सीटें पड़ती हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्षेत्र वाराणसी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संसदीय क्षेत्र रहा गोरखपुर भी शामिल हैं। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के अनुसार प्रियंका को अपनी मां और भाई के लिए चुनाव की कमान संभालने का करीब 20 साल का अनुभव है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति को देखते हुए पिछले कई वर्षों से यह नारा उछलता रहा है, ‘प्रियंका लाओ, कांग्रेस बचाओ’। आगामी आम चुनावों से पहले सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस को शामिल नहीं करने के परिप्रेक्ष्य में प्रियंका को पूर्वी यूपी की कमान सौंपने का पार्टी में स्वागत किया जा रहा है।

गौरतलब है कि 12 जनवरी 1972 को जन्मीं प्रियंका का विवाह फरवरी 1997 में दिल्ली के व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा के साथ हुआ था। उनके एक बेटा रेहान और एक बेटी मिराया हैं। माना जाता है कि प्रियंका बौद्ध धर्म को मानती हैं। उन्होंने बौद्ध अध्ययन में मास्टर डिग्री भी हासिल की है। कांग्रेस सूत्रों का मानना है कि उनकी इंदिरा गांधी से मिलती छवि का पार्टी को फायदा होगा। यह देखना होगा कि वे पार्टी के लिए सिर्फ स्टार प्रचारक होंगी या खुद लोकसभा चुनाव भी लड़ेंगी।

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