{"_id":"5d82fd978ebc3e015c0caaa1","slug":"press-council-of-india-guidelines-for-reporting-of-suicide-and-mental-illness-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आत्महत्या और मानसिक रोग की रिपोर्टिंग और समाचार प्रकाशन-प्रसारण के अपनाने होंगे ये मापदंड","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
आत्महत्या और मानसिक रोग की रिपोर्टिंग और समाचार प्रकाशन-प्रसारण के अपनाने होंगे ये मापदंड
Thu, 19 Sep 2019 09:43 AM IST
Nilesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nilesh Kumar
Updated Thu, 19 Sep 2019 09:43 AM IST
विज्ञापन
Press Council of India
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय प्रेस परिषद (प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया) ने आत्महत्या मामलों की रिपोर्टिंग और मानसिक रोग की रिपोर्टिंग एवं समाचार प्रकाशन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 की धारा 24 (1) के तहत मानसिक रोग से संबंधित समाचारों और आत्महत्या की खबरों के प्रकाशन और रिपोर्टिंग के लिए अब भारतीय प्रेस परिषद द्वारा तय मापदंड अपनाने होंगे।
विज्ञापन
परिषद द्वारा तय मापदंडों के अनुसार समाचार पत्र या समाचार एजेंसी अब मानसिक स्वास्थ्य संस्थान या अस्पताल में उपचार करा रहे किसी व्यक्ति के संबंध में तस्वीर या किसी अन्य जानकारी को प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। इसके साथ-साथ परिषद ने प्रिंट मीडिया को यह भी निर्देशित किया है कि मानसिक देखभाल अधिनियम, 2017 की धारा 30 (ए) के अनुसार, समय-समय पर इस संबंध में व्यापक प्रचार भी करेगा।
विज्ञापन
परिषद ने आत्महत्या को रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट को आधार मानते हुए आत्महत्या के मामलों की रिपोर्टिंग और रिपोर्टों की प्रस्तुति के लिए दिशानिर्देशों को अपनाकर मापदंड तय किए गए हैं। समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों को समाचार प्रकाशित करते वक्त कुछ बातों का ध्यान देना होगा।
विज्ञापन
मीडिया को आत्महत्या के मामलों की रिपोर्टिंग करते वक्त विशेष ध्यान देते हुए कुछ बातों का समावेश समाचार या रिपोर्ट में नहीं करनी होगी जैसे –
- कुछ ऐसी कहानियां जो आत्महत्या से जुड़ी हों, उन्हें प्रमुखता में ना रखें और उन कहानियों को ना दोहराएं।
- आत्महत्या के प्रमुख स्थानों और कहानियों के दोहराव से बचें ।
- ऐसी भाषा का उपयोग ना करें जो आत्महत्या को सनसनीखेज बनाती हैं, या फिर इसे समस्याओं के समाधान के रूप में प्रस्तुत करती हैं।
- आत्महत्या के लिए उपयोग की गई विधि या आत्महत्या के प्रयास में प्रयुक्त विधि का विवरण समाचार में ना करें।
- आत्महत्या के स्थान(सुसाइट प्वाइंट) का विवरण ना दें।
- आत्महत्या के मामलों की खबरों में सनसनीखेज सुर्खियों का उपयोग ना करें।
- आत्महत्या के मामले की रिपोर्टिंग या समाचार प्रकाशन के दौरान फोटोग्राफ, वीडियो फुटेज या सोशल मीडिया लिंक का उपयोग ना करें।