राष्ट्रपति चुनावः नाम पर सस्पेंस, बाकी कामयाबी तय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद अकेले भाजपा के पास 442117 (40.03 फीसदी) मत हैं। जबकि सहयोगी दलों केपास 95566 (8.61 फीसदी) मत हैं। इसके अलावा पार्टी ने 22048 (1.99 फीसदी) मत टीआरएस और 16848 (1.53 फीसदी) मत वाले वाईएसआर कांग्रेस को साध लिया है। पार्टी 59224 (5.36 फीसदी) मत वाली अन्नाद्रमुक के बड़े हिस्से को पहले ही साध लिया है।
पर्याप्त मतों का जुगाड़ कर चुकी भाजपा की निगाहें इस चुनाव के बहाने विपक्ष को एक मंच पर लाने की कोशिशों में पलीता लगाने के अलावा बीजेडी को साधने की है। पार्टी इसकेजरिए विपक्ष केभविष्य में भी एकजुट न होने का संदेश देना चाहती है।
जिस प्रकार जदयू के मुखिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना झुकाव स्पष्ट नहीं किया है, उससे अंतिम समय में जदयू के पाला बदलने की संभावना बनी हुई है। पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि दोनों ही ओर से उम्मीदवार तय होने के बाद विपक्षी खेमे में फिलहाल शामिल दिख रहे कुछ दलों के रुख में परिवर्तन आ सकता है।
चेहरे पर मोदी के पत्ते खोलने का इंतजार
जाहिर तौर पर रायसीना हिल्स की लॉटरी किसकेनाम लगेगी इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद ही पहला और आखिरी विकल्प होगा। बीते बजट सत्र के तत्काल बाद राजग की बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव में राजग के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने संबंधी प्रस्ताव पारित कर पीएम मोदी ने अपनी ताकत का अहसास करा दिया था।
इस बीच पीएम ने वरिष्ठ मंत्रियों ने इस चुनाव पर अनौपचारिक चर्चा की है। माना जा रहा है कि चेहरे का सस्पेंस 14 जून के बाद खत्म होगा जब मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल से जुड़ा देशव्यापी कार्यक्रम खत्म होगा। हालांकि संकेत है कि मोदी की पसंद हिंदुत्व से जुड़ा कोई चेहरा होगा।
यूपी में होगा बड़ा खेल
ठंडा पड़ा शिवसेना का रुख
शुरू में बगावती तेवर दिखाने वाली शिवसेना के तेवर अब नरम हैं। दरअसल शुरू में शिवसेना को लगा कि चूंकि राजग के पास 13000 वोट कम हैं, ऐेसे में वह अपने 25883 मतों के सहारे दबाव बना सकती है। हालांकि बाद में समर्थन का दायरा बढ़ने और राकांपा प्रमुख शरद पवार के चुनाव न लड़ने की सार्वजनिक घोषणा के बाद शिवसेना अब शांत है। बीते दो चुनाव में बदल गए थे समीकरण
कैसे तय होता है मतों का मूल्य
भारत में राष्ट्रपति चुनाव निर्वाचक मंडल के माध्यम से होता है, जिसमें देश के मतदाता परोक्ष तौर पर भाग लेते हैं। इस चुनाव में लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाओं के सदस्यों को मताधिकार हासिल है। विधानपरिषद के सदस्य इस चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते। इसमें सांसदों और अलग-अलग राज्यों के विधायकों के मतों का मूल्य अलग-अलग होता है। सांसद के मतों का मूल्य 708 है।
विधायकों के मतों का मूल्य तय करने के लिए संबंधित राज्य की वर्ष 1971 की जनसंख्या को आधार बनाया जाता है। उस दौरान रही राज्य की जनसंख्या से राज्य के चुने हुए विधायकों की संख्या से भाग दिया जाता है। इससे हासिल अंक को 1000 से भाग देने के बाद हासिल संख्या को संबंधित राज्य के विधायक के मत का मूल्य माना जाता है।
1000 से भाग देने पर यदि शेष 0.5 से ज्यादा बचता हो तो उसके वेटेज में 1 का इजाफा कर दिया जाता है। इस प्रकार उत्तर प्रदेश के एक विधायक का मूल्य 208, बिहार के विधायक के एक मत का मूल्य 173 तो पश्चिम बंगाल के एक विधायक केमत का मूल्य 151 है। सिक्किम के एक विधायक का मूल्य महज 7 है जो अन्य राज्यों के विधायकों में सबसे कम है। वर्ष 2026 तक मतों का मूल्य को आंकने केलिए वर्ष 1971 की जनसंख्या को ही आधार माना जाएगा।
राष्ट्रपति चुनाव का वोटिंग गणित
कुल मत करीब 11 लाख
वर्तमान में कुल सांसद 784
एक सांसद के मत का मूल्य- 708
वर्तमान में कुल विधायक- 4114
------------------------------
किसके पास कितने मत
राजग- 537683
भाजपा- 442117
टीडीपी- 31116
शिवसेना- 25893
शिअद- 6696
राज्यसभा नामित सदस्य- 5664
एलजेपी- 4767
पीडीपी- 4140
रालोसपा- 2643
बीपीएफ-2100
एनपीएफ-1830
एजीपी- 1624
एसडीएफ- 1570
एडी-3288
एनपीपी- 814
आजसू-880
एसडब्लूपी-708
आरपीआई-708
एसबीएसपी- 832
एमजीपी- 60
जीपीएफ- 60
हम- 173
---------------------
भाजपा को समर्थन देने वाले संभावित दल
टीआरएस-22048
वाईएसआर कांग्रेस- 16848
अन्नाद्रमुक- 59224
----------------
अब तक तटस्थ दल
बीजेडी- 32892
आप- 9038
इनेलो- 4252
------------------------
कांग्रेस संभावित गठजोड़ वाले दल
कुल मत- 391739
कांग्रेस-161478
टीएमसी-63847
जदयू- 20935
सपा-26060
माकपा- 27069
बसपा- 8200
राजद- 18797
डीएमके- 18352
राकांपा- 15857
जदएस- 7820
झामुमो- 5116
भाकपा- 4701
आईयूएमएल- 4328
एयूडीएफ- 3632
एआईएमआईएम- 2094
झाविमो- 352
रालोद- 208
आरएसपी- 628
नेशनल कांफ्रेंस- 1788
फारवर्ड ब्लॉक- 302
भाकपा माले- 176
-----------------
देश में विधायकों की संख्या 4114
सांसदों की संख्या 784
कुल विधानसभा 31
-------------------------
बीते तीन चुनावों में दिखें है दिलचस्प समीकरण
इसके बाद वर्ष 2007 में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस ने प्रतिभा पाटिल का नाम आगे कर सबको चौंकाया। हालांकि कांग्रेस को भाजपा का साथ नहीं मिला। मगर पहली महिला राष्ट्रपति के नाम का कांग्रेस का दांव सफल रहा।
इसके बाद बीते चुनाव में जब कांग्रेस ने वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का नाम आगे किया तो इसका सबसे अधिक खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा। तब राजग में शामिल शिवसेना और जदयू ने प्रणब का समर्थन कर भाजपा की रणनीति गड़बड़ा दी। इस चुनाव में राजग के उम्मीदवार पीए संगमा को करारी हाल झेलनी पड़ी।