विवादों के बीच जस्टिस खन्ना और जस्टिस माहेश्वरी सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त
दिल्ली उच्च न्यायालय के जज संजीव खन्ना और कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य जज दिनेश माहेश्वरी भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इन दोनों जजों की नियुक्ति पर आज मुहर लगा दी। बता दें कि दोनों जजों के नामों की सिफारिश को लेकर विवाद चल रहा है और कॉलेजियम के फैसले को लेकर सवाल उठे हैं।
President Ram Nath Kovind appoints Justice Dinesh Maheshwari, chief justice of Karnataka High Court, to be a judge of the Supreme Court of India with effect from the date he assumes charge of his office. https://t.co/92msOhQyqx
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— ANI (@ANI) January 16, 2019
ये है मामला
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा दो हाईकोर्ट के चीफ जस्टिसों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने की सिफारिश करने पर एक विवाद खड़ा हो गया। कॉलेजियम के इस फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट के जज संजय कौल ने सीजेआई रंजन गोगोई को खत लिखा है। दरअसल 19 नवंबर को कॉलेजियम ने राजस्थान और दिल्ली हाईकोर्ट के सीजे प्रदीप नंद्राजोग और राजेंद्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश का फैसला लिया था। लेकिन बाद में 5-6 जनवरी को इन दोनों की जगह कॉलेजियम ने दिनेश माहेश्वरी और संजीव खन्ना के नाम की सिफारिश की। खन्ना दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस हैं, जबकि माहेश्वरी कर्नाटक हाईकोर्ट के सीजे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जज संजय कौल ने राजस्थान हाईकोर्ट के सीजे नंद्राजोग को नजरअंदाज किए जाने के खिलाफ सीजेआई को लिखे खत में आपत्ति जताई है। खत में कौल ने कहा है कि जिन नामों पर विचार किया गया है, उनमें सीजे नंद्राजोग सबसे वरिष्ठ जज हैं। उन्हें नजरअंदाज करने से एक गलत संकेत मिलता है। सूत्रों के मुताबिक कौल का कहना है, "वह (नंद्राजोग) सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं।"
सुप्रीम कोर्ट के कई जज नाराज?
सीजेआई रंजन गोगोई की अगुवाई वाली 5 सदस्यीय कॉलेजियम के इस फैसले से न केवल कौल बल्कि सुप्रीम कोर्ट के कई अन्य जज भी नाराज हैं। फैसले से नाराज ये जज नहीं चाहते कि कॉलेजियम के फैसले से गलत संकेत जाए कि फैसला व्यक्तिगत पसंद से प्रभावित है।
राष्ट्रपति के पास भी पहुंचा खत
कॉलेजियम के यूटर्न लेने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भी इसके विरोध में खत भेजा गया। राष्ट्रपति को दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज कैलाश गंभीर ने खत भेजा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे पत्र में जस्टिस गंभीर ने 32 वरिष्ठ जजों की अनदेखी कर जस्टिस महेश्वरी और खन्ना को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश को गलत बताया। उन्होंने राष्ट्रपति से इस ‘ऐतिहासिक भूल’ को रोकने के लिए कहा।
गंभीर ने राष्ट्रपति से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की। जस्टिस गंभीर ने सोमवार को लिखे पत्र में कहा, 11 जनवरी, 2019 को मैंने यह खबर पढ़ी कि कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश महेश्वरी और दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना को कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की। पहली नजर में मुझे इस खबर पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन यही सच था।