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NHRC: राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- मानवाधिकारों की रक्षा केवल सरकारों का नहीं, नागरिकों का भी साझा कर्तव्य

Wed, 10 Dec 2025 09:36 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 10 Dec 2025 09:36 PM IST
सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को देशवासियों से अपील की कि मानवाधिकारों की रक्षा करना ‘सिर्फ सरकारों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या या ऐसे दूसरे संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि साथी नागरिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना ‘साझा कर्तव्य’ है।

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President Droupadi Murmu says Protecting rights of fellow citizens shared duty, not of govts alone
द्रौपदी मुर्मू, राष्ट्रपति - फोटो : X @rashtrapatibhvn

विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को आग्रह किया कि मानवाधिकारों की रक्षा करना केवल सरकारों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) या ऐसे अन्य संस्थानों की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि साथी नागरिकों के अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा करना एक साझा कर्तव्य है।

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भारत मंडपम में एनएचआरसी के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ये हमें यह याद दिलाने का अवसर है कि सार्वभौमिक मानवाधिकार अविभाज्य हैं और वे एक न्यायपूर्ण, समान और दयालु समाज की आधारशिला हैं।  उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक मानवाधिकार अहस्तांतरणीय हैं और वे न्यायपूर्ण, समतामूलक और दयालु समाज की नींव हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि मानवाधिकार सामाजिक लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं और वे डर के बिना जीने, बाधाओं के बिना सीखने और शोषण के बिना काम करने के अधिकार को समाहित करते हैं।
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राष्ट्रपति ने कहा, यह बिल्कुल सही है कि मानवाधिकार सिद्धांतों के प्रति भारत की लगातार प्रतिबद्धता को विश्व स्तर पर मान्यता मिली है। इसका सबूत 2026 में शुरू होने वाले तीन साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत का सातवीं बार निर्विरोध चुनाव है।
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उन्होंने कहा, हमारी प्रतिबद्धता स्पष्ट है: एक ऐसा राष्ट्र बनाना जहां हर व्यक्ति स्वतंत्रता, सम्मान और समानता के साथ रह सके और जहां मानवाधिकारों की न केवल रक्षा की जाए, बल्कि उन्हें मनाया भी जाए। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मानवाधिकार सामाजिक लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं और उनमें बिना डर के जीने का अधिकार, बिना किसी बाधा के सीखने का अधिकार, बिना शोषण के काम करने का अधिकार और गरिमा के साथ बुढ़ापा बिताने का अधिकार शामिल है"।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने दुनिया को याद दिलाया है कि मानवाधिकारों को विकास से अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा इस शाश्वत सत्य का पालन किया है-'न्याय के बिना शांति नहीं है और शांति के बिना न्याय नहीं है'। 


राष्ट्रपति ने एनएचआरसी के नए मोबाइल एप्लिकेशन के लॉन्च पर खुशी जाहिर की।  उन्होंने कहा, मुझे बताया गया है कि यह एप एनएचआरसी की शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को सभी के लिए ज्यादा सुलभ बनाएगा। लोग अपनी शिकायतों का स्टेटस भी ट्रैक कर पाएंगे। यह युवा छात्रों को इंटर्नशिप और सीखने के अन्य अवसरों के लिए एनएचआरसी तक पहुंचने में भी मदद करेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि एनएचआरसी राज्य और समाज के कुछ आदर्शों को व्यक्त करता है।

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