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ईशा फाउंडेशन: देवता, गृहस्थ से लेकर संन्यासी तक शिव के कई रूप...,महाशिवरात्रि समारोह में बोलीं राष्ट्रपति
Sun, 19 Feb 2023 07:21 PM IST
गुलाम अहमद
पीटीआई, कोयंबटूर
पीटीआई, कोयंबटूर
Published by: गुलाम अहमद
Updated Sun, 19 Feb 2023 07:21 PM IST
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योगा सेंटर में महाशिवरात्रि पर होने वाले समारोह में शामिल हुईं। इस आयोजन में देशभर के प्रसिद्ध कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं।
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कोयंबटूर में महाशिवरात्रि के कार्यक्रम में राष्ट्रपति मु्र्मू
- फोटो : Twitter@President Of India
विस्तार
तमिलनाडु के कोयंबटूर में महाशिवरात्रि के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को ईशा योग केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस दौरान महाशिवरात्रि समारोह के तहत 112 फीट ऊंची आदियोगी प्रतिमा के पास बड़ी संख्या में एकत्र हुए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि महाशिवरात्रि अंधकार, अज्ञानता के अंत का प्रतीक है और ज्ञान का मार्ग खोलती है। जीवन के उच्च आदर्शों की खोज करने वालों के लिए, आज का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण अवसर है, उन्होंने कहा और कामना की कि यह महाशिवरात्रि हमारे भीतर के अंधकार को दूर करे और हम सभी को अधिक परिपूर्ण और प्रगतिशील जीवन की ओर ले जाए।
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राष्ट्रपति ने कहा कि शिवरात्रि का आध्यात्मिक प्रकाश हमारे जीवन में हर दिन हमारे पथ को उज्ज्वल करे। भगवान शिव सभी के लिए देवता हैं। वह गृहस्थ हैं और संन्यासी भी हैं। वे पहले योगी हैं और पहले ज्ञानी भी। भगवान शिव एक परोपकारी देवता हैं। वे परम भयानक देवता भी हैं। वे दोनों के प्रतीक हैं। ऊर्जा के प्रकार, रचनात्मक और विनाशकारी भी वही हैं।
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ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव के योगदान की सराहना करते हुए मुर्मू ने कहा कि वह आधुनिक समय के ऋषि होने के नाते, अनगिनत लोगों विशेष रूप से भारत और विदेशों के युवाओं ने उनमें आध्यात्मिक प्रगति करने की प्रेरणा पाई है। उन्होंने कहा कि वह अपने शब्दों और कार्यों के माध्यम से हमें हमारी सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में भी सिखा रहे हैं। इस दौरान तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि, राज्य के आईटी मंत्री मनो थंगराज भी उपस्थित थे।
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आदियोगी शिव की प्रतिमा।
- फोटो : अमर उजाला
इससे पहले राष्ट्रपति ने ध्यानलिंग में सद्गुरु द्वारा आयोजित पंच भूत क्रिया (पांच तत्वों की शुद्धि) में भाग लिया। बता दें कि ध्यानलिंग एक शक्तिशाली और अद्वितीय ऊर्जा-रूप है, जिसे मुक्ति के द्वार के रूप में प्राण-प्रतिष्ठित किया गया है। इस दौरान योग के विश्वभर में प्रसार के प्रतीक महायोग यज्ञ को भी राष्ट्रपति ने प्रज्वलित किया। इस दौरान ईशा फांउडेशन के प्रमुख सद्गुरु जग्गी वासुदेव को उन्होंने आधुनिक समय का ऋषि बताया। राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे कहा कि अनगिनत लोग, विशेष रूप से भारत और विदेशों के युवाओं ने उनसे आध्यात्मिक प्रगति करने की प्रेरणा पाई है।
सद्गुरु जग्गी वासुदेव
- फोटो : अमर उजाला
दो सालों में पृथ्वी के दो अरब लोगों तक योग पहुंचाने का लिया संकल्प
वहीं, महाशिवरात्रि के मौके पर सद्गुरू ने कहा कि महायोग यज्ञ मानवता की भलाई के उपकरण के रूप में पेशकश करने के लिए ईशा की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अगले दो सालों में हम पृथ्वी के कम से कम 2 अरब लोगों तक योग को किसी न किसी रूप में ले जाने के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि मानवता की भलाई के लिए ऐसा होना चाहिए।
'ॐ नमः शिवाय' का बताया मंत्र
इस दौरान सद्गगुरू जग्दी वासुदेव ने 'ॐ नमः शिवाय' के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि 'यह ध्वनियों की शानदार अंक-गणित है। यदि कोई इसका उपयोग करना सीख जाता है, तो यह आपको उन सभी चीजों से मुक्त कर देगा जो आपको जीवन में बांधे रखती हैं (और) आंतरिक विकास की ओर ले जाएगा।
वहीं, महाशिवरात्रि के मौके पर सद्गुरू ने कहा कि महायोग यज्ञ मानवता की भलाई के उपकरण के रूप में पेशकश करने के लिए ईशा की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अगले दो सालों में हम पृथ्वी के कम से कम 2 अरब लोगों तक योग को किसी न किसी रूप में ले जाने के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि मानवता की भलाई के लिए ऐसा होना चाहिए।
'ॐ नमः शिवाय' का बताया मंत्र
इस दौरान सद्गगुरू जग्दी वासुदेव ने 'ॐ नमः शिवाय' के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि 'यह ध्वनियों की शानदार अंक-गणित है। यदि कोई इसका उपयोग करना सीख जाता है, तो यह आपको उन सभी चीजों से मुक्त कर देगा जो आपको जीवन में बांधे रखती हैं (और) आंतरिक विकास की ओर ले जाएगा।
आदियोगी शिव की प्रतिमा के समक्ष कलाकारों का प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
कई कलाकारों ने भी दी प्रस्तुति
इसके बाद साउंड्स ऑफ ईशा ने परंपरागत तरीके से कई नामी-गिरामी कलाकारों के साथ जुगलबंदी का दौर शुरू किया। जोकि पूरी रात जारी रहा। इन कलाकारों में राम मिरजला, वेलमुरुगन, कुतले ख़ान, मंगली, अनन्या चक्रवर्ती, मीनल जैन, निहार शेम्बेकर और कन्नड़ लोक गायकों और मामे खान, नीलाद्रि कुमार सहित जॉर्जिया की नर्तकियों की एक मंडली और केरल के तेय्यम अग्नि नर्तक (फ़ायर डांसर्स) ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया।
महाशिवरात्रि का महत्व
महाशिवरात्रि की रात में प्राकृतिक तौर पर ग्रहों की स्थिति अत्यधिक आध्यात्मिक लाभ के लिए अनुकूल होती है। इस रात में पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध इस तरह स्थित होता है कि मानव में ऊर्जा का प्राकृतिक बहाव होता है, जो व्यक्ति को अपने आध्यात्मिक शिखर की ओर धकेलता है।
इसके बाद साउंड्स ऑफ ईशा ने परंपरागत तरीके से कई नामी-गिरामी कलाकारों के साथ जुगलबंदी का दौर शुरू किया। जोकि पूरी रात जारी रहा। इन कलाकारों में राम मिरजला, वेलमुरुगन, कुतले ख़ान, मंगली, अनन्या चक्रवर्ती, मीनल जैन, निहार शेम्बेकर और कन्नड़ लोक गायकों और मामे खान, नीलाद्रि कुमार सहित जॉर्जिया की नर्तकियों की एक मंडली और केरल के तेय्यम अग्नि नर्तक (फ़ायर डांसर्स) ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया।
महाशिवरात्रि का महत्व
महाशिवरात्रि की रात में प्राकृतिक तौर पर ग्रहों की स्थिति अत्यधिक आध्यात्मिक लाभ के लिए अनुकूल होती है। इस रात में पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध इस तरह स्थित होता है कि मानव में ऊर्जा का प्राकृतिक बहाव होता है, जो व्यक्ति को अपने आध्यात्मिक शिखर की ओर धकेलता है।