Droupadi Murmu: 'कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने में मदद करें', राष्ट्रपति मुर्मू का वैज्ञानिकों से आह्वान
राष्ट्रपति मुर्मू ने कृषि वैज्ञानिकों से अपील की कि वह आगे आकर मृदा, पानी और पर्यावरण को जलवायु परिवर्तन से बचाने के लिए नए विचार लाएं।
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वक्त पर न्याय न मिलना न्याय न मिलने के बराबर है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह बात बृहस्पतिवार को न्यायिक न्यायालय परिसर का उद्घाटन करने के दौरान कही। नया न्यायिक परिसर भुवनेश्वर में 170 करोड़ रुपये की लागत से बना है। परिसर में 55 न्यायालय कक्ष तथा 55 न्यायाधीश कक्ष हैं।
इस दौरान मुर्मू ने कहा कि देरी की संस्कृति की वजह से सबसे अधिक परेशानी गरीबों को होती है। उन्होंने आगे कहा कि उनके (गरीबों के) पास न तो पैसे हैं और न ही इतनी जनशक्ति कि वे बार-बार न्यायालय आ सकें। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि सभी हितधारक आम लोगों के हित में देरी की संस्कृति से बचने का रास्ता खोजने को प्राथमिकता देंगे। मुर्मू ने कहा कि आम लोगों के लिए भाषा भी एक बाधा है। वे यह नहीं समझ पाते कि वकील उनके लिए क्या दलील दे रहे हैं या न्यायाधीश क्या राय दे रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें खुशी है कि अब न्यायालय के फैसलों का ओडिया और संथाली भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है और ये अनुवादित फैसले सुप्रीम कोर्ट और उड़ीसा उच्च न्यायालय की वेबसाइटों पर मौजूद है।
अदालतों में हो संवेदनशील माहौल
राष्ट्रपति ने कहा कि आम नागरिक बिना किसी डर के न्यायिक प्रणाली से कैसे जुड़ते हैं, यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। अक्सर लोग वकीलों और जजों के सामने घबरा जाते हैं। अदालतों में संवेदनशील माहौल होना जरूरी है, ताकि वे अपनी बात खुलकर कह सकें
न्यायपालिका में बढ़े महिलाओं की भागीदारी
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि आज महिलाओं के नेतृत्व में विकास पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अन्य क्षेत्रों की तरह न्यायपालिका में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ओडिशा न्यायिक सेवा में 48 फीसदी महिला अधिकारी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में महिला अधिकारियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। एजेंसी