{"_id":"5dd2c14e8ebc3e550800979e","slug":"preparing-to-protest-against-citizenship-amendment-bill-in-northeast-states-including-assam","type":"story","status":"publish","title_hn":"असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों में नागरिकता विधेयक के खिलाफ लामबंदी तेज","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों में नागरिकता विधेयक के खिलाफ लामबंदी तेज
Mon, 18 Nov 2019 09:35 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Mon, 18 Nov 2019 09:35 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों के तमाम राजनीतिक व सामाजिक संगठन नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 के खिलाफ आंदोलन के लिए एक बार फिर लामबंद हो रहे हैं। प्रस्तावित विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को बिना किसी वैध कागजात के भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। नार्थ ईस्ट स्टूडेंट्स आर्गनाइजेशन (नेसो) ने इस विधेयक के खिलाफ सोमवार को तमाम पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों में प्रदर्शन किया।
विज्ञापन
इससे पहले बीते 15 नवंबर को असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद ने भी उक्त विधेयक को लेकर प्रदर्शन किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेज कर इसे तत्काल रद्द करने की मांग की थी। उधर, मणिपुर के एक संगठन ने 19 नवंबर को इसके विरोध में 18 घंटे बंद की अपील की है। इलाके के ज्यादातर राज्य इस विधेयक का कड़ा विरोध करते रहे हैं।..
विज्ञापन
ताकतवर छात्र संगठन अखिल असम छात्र संघ (आसू) ने 30 अन्य संगठनों के साथ मिलकर इस विधेयक के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तैयार की है। आसू का कहना है कि इस विधेयक के पारित होने पर असम समझौता भी बेकार हो जाएगा। नार्थ ईस्ट स्टूडेंट्स आर्गनाइजेशन (नेसो) ने आज पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों में राजभवनों के समक्ष प्रदर्शन किया।
विज्ञापन
आसू के अध्यक्ष दीपंकर कुमार नाथ और महासचिव एल.आर.गोगोई आरोप लगाते हैं कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आने वाले तमाम हिंदू बांग्लादेशियों को नागरिकता देने का फैसला कर असम की भाषा, संस्कृति और मूल निवासियों की पहचान को खत्म करने की साजिश रची है। उधर, कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेतृत्व में 70 अन्य संगठनों ने भी सोमवार से विधेयक के खिलाफ घर-घर जाकर प्रचार शुरू कर दिया है।
समिति के सलाहकार अखिल गोगोई ने गुवाहाटी में पत्रकारों से कहा कि असम में पहले से ही 20 लाख बांग्लादेशी हिंदू रह रहे हैं। उक्त विधेयक के पारित होने की स्थिति में बांग्लादेश से 1.70 करोड़ हिंदुओं के यहां आने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके खिलाफ तमाम संगठनों व राजनीतिक दलों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।