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इस प्रीती ने उड़ा रखी है यूपी के सभी नेताओं की नींद

Thu, 09 Jun 2016 10:30 AM IST
समीरात्मज मिश्र/बीबीसी हिंदी
समीरात्मज मिश्र/बीबीसी हिंदी Updated Thu, 09 Jun 2016 10:30 AM IST
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preeti mahapatra now new challenge for up leaders
प्रीति महापात्रा
यूपी की राजनीति में इन दिनों एक नाम लगातार सुर्खियों में है। प्रीति महापात्रा का नाम एक नहीं कई पार्टी के नेताओं के लिए संकट बनकर उभरा है। 
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गुजरात की हीरा क़ारोबारी प्रीति महापात्रा को हफ़्ते भर पहले तक उत्तर प्रदेश में शायद ही कोई जानता रहा हो, लेकिन आज उन्होंने कई राजनीतिक दलों की नींद उड़ा रखी है। प्रीति महापात्रा ने राज्यसभा की सीट के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया है और भारतीय जनता पार्टी उनका समर्थन कर रही है।

दरअसल विधानसभा में विधायकों की संख्या के लिहाज़ से भाजपा अपना सिर्फ़ एक उम्मीदवार ही आसानी से जिता सकती थी, इसीलिए उसने प्रीति महापात्र को निर्दलीय पर्चा भरवा दिया और वोटों का इंतज़ाम करने का ज़िम्मा सौंप दिया।
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प्रीति महापात्रा के मैदान में कूदने के बाद राजनीतिक दल अपने विधायकों को अब संभालने में जुटे हैं कि कहीं ये विधायक क्रॉस वोटिंग न कर बैठें। सबसे ज़्यादा खलबली मची है सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में।
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बुधवार को समाजवादी पार्टी में देर शाम सभी विधायकों को बैठक और फिर डिनर के लिए बुलाया गया था। लेकिन बैठक में कई विधायकों के न आने से पार्टी के बड़े नेता हैरान रह गए। यहां तक कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता भी नहीं आए।

हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी इस बात से इंकार करते हैं, लेकिन बैठक के बाद घंटों वहां सिर्फ़ न आने वाले विधायकों की संख्या पर ही चर्चा हो रही थी।
कोई बता रहा था कि 50 विधायक नदारद थे तो कोई ये संख्या 35 के आसपास बता रहा था।

कपिल सिब्बल ने भी डाला डेरा

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कपिल सिब्बल


दिलचस्प बात ये है कि बड़ी संख्या में सपा विधायकों का न आना तब हुआ जब पार्टी के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव लगातार ख़ुद इस पर नज़र रखे हुए थे और न आने वाले विधायकों से उन्होंने तत्काल वजह बताने को कहा है।

समाजवादी पार्टी के अलावा कांग्रेस पार्टी में भी अपने विधायकों को रोकने की क़वायद हो रही है। बुधवार को कांग्रेस विधायकों की भी बैठक हुई। दरअसल प्रीति चौधरी के नामांकन के बाद सबसे ज़्यादा तलवार कांग्रेस उम्मीदवार कपिल सिब्बल के ऊपर ही लटक रही है क्योंकि उन्हें अपनी पार्टी के अलावा भी कुछ वोटों का इंतज़ाम करना है।

कपिल सिब्बल भी कल लखनऊ में ही थे। कांग्रेस प्रवक्ता सत्यदेव त्रिपाठी सिब्बल की जीत को लेकर आश्वस्त हैं और उनका कहना है कि कुछेक विधायकों से कपिल सिब्बल के व्यक्तिगत संबंध हैं तो अजित सिंह की आरएलडी ने भी उन्हें समर्थन देने की घोषणा कर दी है।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आरएलडी का कपिल सिब्बल को समर्थन देना प्रीति महापात्रा की उम्मीदों पर पानी फेर सकता है।

मायावती भी हैं चिंतित

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मायावती


दरअसल राज्यसभा में 11 सीटों के लिए चुनाव होना है और कुल 12 उम्मीदवार मुकाबले में हैं। इसके अलावा 10 तारीख को विधान परिषद का भी चुनाव है और वहां भी कुल 13 सीटों के लिए 14 प्रत्याशी हैं।
राज्यसभा के लिए सपा ने सात प्रत्याशी खड़े किए हैं जबकि बसपा ने दो, भाजपा ने एक और कांग्रेस ने भी एक उम्मीदवार खड़ा किया है।

विधान सभा में दलीय स्थिति को देखते हुए इन लोगों के जीतने में कोई संदेह नहीं था लेकिन प्रीति महापात्रा के नामांकन के बाद स्थिति बदल गई। क्रास वोटिंग की आशंका को देखते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी 9 जून को पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई है।

वहीं जानकारों का कहना है कि इस चुनाव के ज़रिए भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में लगी है। लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र कहते हैं कि प्रीति महापात्रा को यदि भाजपा चुनाव जिता ले जाती है तो वो ये संदेश देगी कि दूसरे दलों के लोग भी अब उसकी पार्टी में आ रहे हैं।

वहीं कुछ लोग अरबपति व्यवसायी होने के नाते ये भी आशंका ज़ाहिर कर रहे हैं कि प्रीति महापात्रा चुनाव जीतने में धन बल का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। उत्तर प्रदेश के कई विधायक जिस तरह से लखनऊ में प्रीति महापात्रा से संपर्क करते बताए जा रहे हैं, उससे इन आशंकाओं को और बल मिल रहा है।

बहरहाल राजनीतिक दिग्गजों का कहना है कि ये चुनाव उम्मीदवारों की जीत या हार से ज़्यादा विधायकों की ईमानदारी और निष्ठा का फ़ैसला करेंगे।
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