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'राफेल' का पहला निशाना बने 'आलोक वर्मा'!

Fri, 11 Jan 2019 02:10 PM IST
अमर शर्मा जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 11 Jan 2019 02:10 PM IST
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Prashant Bhushan says no proof against cbi director alok verma rafale deal controversy
आलोक वर्मा - फोटो : सोशल मीडिया
राफेल लड़ाकू जहाज भले ही अभी तक देश में नहीं पहुंच सका है, मगर उसकी मारक क्षमता का अहसास बखूबी होने लगा है। सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा 'राफेल' का पहला निशाना बन गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि आलोक वर्मा के खिलाफ कहीं पर भी कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है, जिसके चलते उन्हें सीबीआई मुख्यालय से बाहर कर दिया गया। उनके ही एक साथी अधिकारी ने वर्मा पर जो आरोप लगाए, सीवीसी ने उन्हें सही मानकर अपनी रिपोर्ट सेलेक्ट कमेटी को दे दी। असल बात यह है कि आलोक वर्मा देर-सवेर 'राफेल' के मामले में एफआईआर दर्ज कर सकते थे। सूत्रों का कहना है कि वर्मा ने ज्वाइनिंग के पहले ही दिन राफेल की फाइल मंगवा ली थी। यह राफेल की वही फाइल थी, जो प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने पिछले साल आलोक वर्मा को बतौर शिकायत सौंपी थी।
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प्रशांत भूषण का कहना है कि सीवीसी के पास आलोक वर्मा के खिलाफ जितने भी दस्तावेज हैं, उनमें ऐसा कोई नहीं है, जिससे उन पर भ्रष्टाचार का सीधा मामला बनता हो। सीवीसी ने उन बातों को वर्मा के खिलाफ आधार बनाया है, जो एक सरकारी दफ्तर के अंदर चल रही गतिविधियों का हिस्सा होती हैं।
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सरकार केवल राफेल की फाइलों को लेकर भयभीत थी। सुब्रमणयम स्वामी ने भी वीरवार को वर्मा से मुलाकात करने के बाद कहा था कि सरकार सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का पक्ष जाने बगैर महज सीवीसी की रिपोर्ट को आधार बनाकर उन्हें नहीं हटा सकती। सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) की रिपोर्ट एक अन्य अधिकारी के दृष्टिकोण पर आधारित है। उक्त अधिकारी ने 'गलत रिपोर्ट' दी है। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
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टेबल पर पहुंच गई थी 'राफेल' की फाइल

आलोक वर्मा को अगर दो-तीन दिन और मिल जाते तो राफेल मामले में प्राथमिकी दर्ज हो सकती थी। सूत्रों का कहना है कि वर्मा ने इस बाबत जांच एजेंसी के डायरेक्टर प्रोसिक्यूशन से विचार-विमर्श किया था। उन्होंने 23 अक्तूबर से पहले ही राफेल को लेकर हर तरह की कानूनी राय ले ली थी। राफेल मामले की जांच के लिए प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने वर्मा को शिकायत दी थी।

आलोक वर्मा अब उसी शिकायत के आधार पर राफेल मामले को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे थे। सरकार को यह भनक लग चुकी थी कि वर्मा इस मामले में कुछ बड़ा कर सकते हैं। जैसे अक्तूबर में आलोक वर्मा को एक झटके में छुट्टी पर भेजा गया, वैसे ही अब सेलेक्ट कमेटी के फैसले से वर्मा सीबीआई मुख्यालय से बाहर हो गए।

कांग्रेस की बयानबाजी ने भी वर्मा की मुश्किलें बढ़ा दी

राफेल को लेकर कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी केंद्र सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं। उन्होंने अपनी रैलियों में भी यह बात कह दी कि मोदी सरकार ने राफेल मामले में संभावित कार्रवाई से घबराकर आलोक वर्मा को हटाया है। पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा, राफेल मामले का डर प्रधानमंत्री के दिमाग में घूम रहा है जिस वजह से वे सो भी नहीं सकते। सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को दो बार हटाना स्पष्ट रूप से यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री अब अपने ही झूठ से घिर चुके हैं।
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