फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Prashant Bhushan said in Supreme Court that expression of opinion is not contempt of court

प्रशांत भूषण का सुप्रीम कोर्ट को जवाब, कहा- मत की अभिव्यक्ति अदालत की अवमानना नहीं

Mon, 03 Aug 2020 10:02 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 03 Aug 2020 10:02 PM IST
विज्ञापन
Prashant Bhushan said in Supreme Court that expression of opinion is not contempt of court
प्रशांत भूषण (फाइल फोटो) - फोटो : फाइल

वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में सोमवार को कहा कि मत की अभिव्यक्ति से अदालत की अवमानना नहीं हो सकती भले ही वह कुछ लोगों के लिए अरुचिकर या अस्वीकार्य हो। अदालत ने 22 जुलाई को भूषण को नोटिस जारी किया था। न्यायालय ने न्यायपालिका के खिलाफ उनके दो कथित अपमानजनक ट्वीट को लेकर शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही पर पांच अगस्त को सुनवाई का नोटिस जारी किया था।

विज्ञापन


न्यायालय ने उनके बयानों को प्रथम दृष्टया न्याय प्रशासन की छवि खराब करने वाला बताया था। कार्यकर्ता व वकील भूषण ने वकील कामिनी जायसवाल के माध्यम से दायर 142 पृष्ठों वाले जवाबी हलफनामे में उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों, लोकतंत्र में असंतोष को रोकने और अदालत की अवमानना पर पूर्व व मौजूदा न्यायाधीशों के भाषणों का भी जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने कुछ मामलों में न्यायिक कार्रवाई पर अपने विचारों का भी उल्लेख किया है।
विज्ञापन



भूषण अपने दोनों ट्वीट पर भी कायम रहे। उन्होंने दलील दी, ‘मत की अभिव्यक्ति, भले ही कुछ के लिए असहनीय या अरुचिकर हो, अदालत की अवमानना नहीं कर सकती है। यह बात सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों और ब्रिटेन, अमेरिका व कनाडा जैसे न्यायालयों में भी कही गई है।’ उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत भाषण व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का जिक्र किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि यह अधिकार उन सभी मूल्यों का अंतिम संरक्षक है जिन्हें संविधान पवित्र मानता है। भूषण ने कहा कि संविधान द्वारा स्थापित किसी संस्था पर सार्वजनिक हित में किसी नागरिक को उचित मत व्यक्त करने से रोकना उचित प्रतिबंध नहीं है और यह उन बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है जिन पर हमारा लोकतंत्र स्थापित है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed