Reasi attack: इतनी सटीकता के साथ कैसे निशाना लगा रहे हैं आतंकी, 'पेशेवर फौजियों' की आतंकी गुटों में एंट्री?
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के शिवखोरी में रविवार शाम तीर्थयात्रियों की बस पर घात लगाकर हुए आतंकी हमले ने फिर एक बार घाटी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा दिए हैं। इस हमले में तीन महिलाओं समेत 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 से ज्यादा जख्मी हो गए। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा समर्थित आतंकी संगठन द रजिस्टेंट फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि इस हमले में भी आतंकियों का हमला करने का तरीका वैसा ही है, जो पिछले हमलों में भी देखा गया है। आतंकी ने जिस तरह अचूक निशाना साध कर बस ड्राइवर के सिर पर गोली मारी है, वह किसी पेशेवर का काम है, जो पाकिस्तान की सेना से जुड़ा हो सकता है। यह हमला रविवार शाम करीब 6:15 बजे हुआ और गोलीबारी के बाद 53 सीटर बस सड़क से उतरकर गहरी खाई में गिर गई।
लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जताया था अंदेशा
इस दावे की पुष्टि इस बात से भी होती है कि पिछले साल 22-23 नवंबर को राजौरी के कालाकोट में हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर कारी समेत एक अन्य आतंकी भी मारा गया था। उस मुठभेड़ में दो कैप्टन समेत पांच जवान शहीद हो गए थे। उस समय तत्कालीन नॉर्दन आर्मी कमांडर और मौजूदा वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अंदेशा जताया था कि इस हमले में पाकिस्तानी सेना के कुछ रिटायर्ड फौजी भी शामिल हो सकते हैं। पाकिस्तान विदेशी आतंकवादियों को यहां घाटी में घुसाना चाहता है, क्योंकि यहां स्थानीय भर्ती नहीं हो रही है। खुफिया सूत्र बताते हैं कि इस हमले के पीछे भी पाकिस्तानी की साजिश है। लश्कर-ए-तैयबा समर्थित आतंकी संगठन द रजिस्टेंट फ्रंट (टीआरएफ) इस हमले में शामिल है। सूत्र बताते हैं कि घाटी में इन दिनों दो ही आतंकी संगठन सबसे ज्यादा एक्टिव हैं, पहला द रजिस्टेंट फ्रंट (टीआरएफ) और दूसरा पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ)। जितनी भी आतंकी वारदातें हो रही हैं, उनमें इन्ही दोनों ग्रुप की संलिप्तता पाई गई है। उन्होंने इस बात का अंदेशा जताया कि दोनों ही संगठनों के पास पाकिस्तान की सेना का सपोर्ट है।
सभी हमलों का तरीका एक जैसा
सूत्र बताते हैं कि अक्तूबर 2021 को हुए पुंछ के भाटा दूड़ियां के जंगलों में हुए हमले में सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे। इस हमले का पीएएफएफ ने वीडियो जारी किया था, जिसमें देखा गया था कि आतंकियों ने किस सटीकता के साथ इस हमले को अंजाम दिया था। इसके बाद मई 2023 में राजौरी में आतंकी हमले में शहीद हुए स्पेशल पैरा फोर्स का एक जवान शहीद हो गया था, उसकी आंख में आतंकियों ने गोली मारी थी। वहीं, इस साल चार मई 2024 में जम्मू-कश्मीर के पुंछ में शाहसितार के पास भारतीय वायुसेना के वाहनों के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में भी जिस सटीकता के साथ वाहन की विंडस्क्रीन पर निशाना बनाया गया, वह कोई प्रोफेशनल हथियार चलाने वाला ही कर सकता है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट में भी इस बात का खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) से जुड़े रिटायर्ड फौजी पीएएफएफ और टीआरएफ के साथ जुड़े हुए हैं।
एसएसजी को एम-4 कार्बाइन राइफल का अनुभव
भारतीय सेना की खुफिया टेक्निकल सपोर्ट डिविजन के कमांडर रहे चुके रिटायर्ड कर्नल हनी बख्शी कहते हैं कि इस हमले के पीछे भी पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) का हाथ है। वह कहते हैं कि यह कोई आतंकी हमला नहीं है, बल्कि पूरी तरह से पाकिस्तानी सेना की सोची समझी रणनीति के तहत किया गया हमला है। सभी हमलों में एक जैसा ही तरीका इस्तेमाल किया गया है। वह कहते हैं कि बीच सड़क पर खड़े होकर बस के ड्राइवर को जिस सटीकता के साथ निशाना बनाते हुए उसके सिर में गोली मारी वह एसएसजी का तरीका है। यह काम किसी आतंकवादी का नहीं है बल्कि प्रोफेशनल मिलिट्री मैन का है। इसके अलावा मौके से बरामद गोलियां भी एम-4 कार्बाइन राइफल से चली हैं, जो एसएसजी की खासियत है। हमले में एम-4 कार्बाइन में लगने वाली 5.56x45 एमएम की नाटो कैलिबर क्लास की बुलेट्स इस्तेमाल की गई हैं। एम4 कार्बाइन का इस्तेमाल मोबिलिटी ट्रूप्स, स्पेशल ऑपरेशन ट्रूप्स और पैराट्रूपर्स करते हैं। वहीं यह आसानी से इस्तेमाल हो सकती हैं, और वजन में बेहद हल्की होती हैं। वहीं इनकी रेंज 500 मीटर तक होती है। वहीं पीएएफएफ के आतंकियों के पास ऑस्ट्रियाई स्टेयर SSG-69 बोल्ट एक्शन स्नाइपर राइफल भी देखी गई है, जिसमें 7.62×51 एमएम नाटो कैलिबर क्लास की बुलेट्स इस्तेमाल की जाती हैं।
अफगानिस्तान, करगिल और एलओसी पर काम कर चुकी है एसएसजी
मिलिट्री एक्सपर्ट विक्रमजीत सिंह बताते हैं कि प्रोफेशनल ट्रेनिंग, ड्राइवर के माथे पर सीधे गोली मारना, यह बताता है कि इस हमले के कहीं न कहीं पाकिस्तान की एसएसजी से लिंक हैं। हमले से एक बात और साफ जाहिर हो रही है कि आतंकवादियों का राइफल के ट्रिगर पर पूरा कंट्रोल था और उन्हें गोलाबारूद बचाने के तरीकों के बारे में जानकारी थी, जो केवल प्रोफेशनल मिलिट्री मैन ही जानता है। वह कहते हैं कि आतंकियों की ट्रेनिंग, टैक्टिक्स, एंबुश का तरीका, हथियार और काउंटर ऑपरेशन में जवाब देने का तरीका बताता है कि रिटायर्ड एसएसजी के कमांडो आतंकी गुटों में शामिल हुए हैं। एसएसजी को अफगानिस्तान, करगिल और एलओसी पर काम करने का अनुभव है।
हमले में ओवर ग्राउंड वर्कर्स का हाथ
विक्रमजीत सिंह कहते हैं कि इस हमले में भी कहीं न कहीं ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) का भी रोल सामने आ रहा है। सीसीटीवी फुटेज में खुलासा हुआ है कि तीर्थयात्रियों से भरी बस के पीछे एक जीप चल रही थी, जो तकरीबन 7 सेकंड पीछे थी। जिसके 10 से 15 मिनट बाद घात लगा कर हमला किया गया। पुलिस को जीप का पता लगा कर जांच शुरू करनी चाहिए कि कहीं न कहीं इसमें स्थानीय लोगों का भी हाथ है। वह कहते हैं कि दिसंबर 2023 में जब 48 आरआर पर आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया था, तो एक सफेद ऑल्टो कार देखी गई थी, जो एंबुश साइट पर दिखाई दी थी। उसमें भी ओजीडब्ल्यू के शामिल होने की बात सामने आई थी।
वहीं रियासी के स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि वे शाम 6 बजे के बाद दुकानें खोलने से डरते थे, क्योंकि आतंकवादी खुलेआम घूम रहे थे। रविवार को आतंकियों ने बस पर घात लगा कर हमला किया और 10 लोगों की जानें ले लीं। स्थानीय लोगों को इन आतंकवादियों के बारे में जानकारी थी, लेकिन सुरक्षा बलों और प्रशासन में से किसी ने भी इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसके बजाय उन्होंने चुनाव को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए स्थानीय लोगों के लाइसेंसी हथियार भी ले लिए।
शकील जांबाज को दी थी एसएसजी ने ट्रेनिंग
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोंधी के मुताबिक पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादी शकील जांबाज को भारतीय सेना ने 04 सितंबर 2023 को जम्मू-कश्मीर के रियासी में मार गिराया था। उसे मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी गई थी और उसने पाकिस्तानी सेना के एसएसजी कमांडो जैसी ही ट्रेनिंग ली थी। इससे पहले पीओके के मीरपुर के एक स्नाइपर सैफुल्ला उर्फ सानन जफर और पाकिस्तान के रावलकोट के अब्दुल वहाब इजाज उर्फ अबू सैफुल्ला की कुछ तस्वीरें वायरल हुईं थी, जिसमें दोनों हथियार चलाने की ट्रेनिंग ले रहे थे। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस की जांच में यह खुलासा हुआ कि एसएसजी ने ही इन्हें ट्रेनिंग दी थी। वहीं खुफिया रिपोर्टों से खुलासा हुआ है कि एसएसजी लश्कर के आतंकियों को ट्रेनिंग उपलब्ध करा रहा है।