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चाइल्ड पोर्नोग्राफी: अब दोषी को मिलेगी पांच साल की सजा, नहीं मिलेगी जमानत

Sat, 24 Nov 2018 08:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 24 Nov 2018 08:35 AM IST
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Possession of child pornographic material for any use is going to become non bailable offence
सांकेतिक तस्वीर

व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए चाइल्ड पोर्नोग्राफी की सामग्री को रखना, देखना और इस तरह की सामग्री को रखना, उसका संग्रहण करना या वितरण करने की वजह से जल्द ही कड़ी सजा मिल सकती है। दोषियों को भारी जुर्माना देने के साथ ही पांच साल तक की सजा मिल सकती है। इस अपराध को गैर जमानती अपराध माना जाएगा। दूसरी बार दोषी पाए जाने पर आरोपी को सात साल तक जेल की सजा मिल सकती है।

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लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के अंतर्गत इस प्रस्तावित संशोधन में चाइल्ड पोर्नोग्रफी से जुड़ी हर जानकारी के साथ-साथ इससे जुड़ी अश्लील तस्वीरें एवं विडियोज वॉट्सऐप पर रखे जाने की सूचना नहीं देने पर भी जुर्माने का प्रावधान शामिल है। इस प्रस्ताव को अभी कानून मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से मंजूरी मिलना बाकी है। माना जा रहा है कि दोनों ही मंत्रालय इसे अगले हफ्ते तक मंजूरी दे देंगे ताकि संशोधन को कैबिनेट के सामने रखा जा सके।
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सूत्रों के अनुसार चाइल्ड पोर्नोग्राफी के बढ़ते मामलों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय चिंतित है। जिसने इसके खिलाफ गंभीर अपराध बनाने के लिए पहल की है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय मेनका गांधी चाइल्ड पोर्नोग्राफी और रिवेंज पोर्न को लेकर अपनी चिंता जाहिर करती रही हैं। वह कानून में बदलाव सहित इसके रोकथाम के लिए विभिन्न आवश्यक पहल की जरूरतों पर जोर देती रहती हैं।
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यह संशोधन पॉक्सो अधिनियम की धारा 14 के तहत उस तरह के किसी शख्स पर कम से कम 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा जो बच्चों से जुड़ी किसी भी तरह की अश्लील सामग्री रखता है या उनका संग्रह करता है और इसे डिलीट नहीं करता है। इस सामग्री को पूरी तरह खत्म नहीं करता या संबंधित प्राधिकारी को इसकी जानकारी नहीं देता है। यदि कोई शख्स दोबारा इस तरह के अपराध में संलिप्त पाया जाता है तो उसे 5000 रुपये का जुर्माना देना होगा।


संशोधनों में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ी किसी भी सामग्री का प्रसारण, प्रचार करना या फिर उसे आगे भेजने को भी शामिल किया जाएगा। हालांकि शिकायत करने और अदालत में साक्ष्य के तौर पर इसे पेश किए जाने के मकसद को इससे अलग रखा गया है। वर्तमान में इस धारा के तहत जुर्माने के साथ ही तीन साल तक की सजा दी जा सकती है या फिर दोनों। इस प्रस्ताव का मकसद है कि दोषी को पहली बार में ही तीन साल तक की सजा मिले। दूसरी बार में यह सजा और तीसरी बार में सात साल हो जाएगी।

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