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2019 में प्रदूषण से भारत में करीब 17 लाख मौतें, अर्थव्यवस्था को 2.6 लाख करोड़ का नुकसान
Wed, 23 Dec 2020 05:42 AM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 23 Dec 2020 05:42 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पेक्सेल्स
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भारत में जहरीली हवा ने 2017 के मुकाबले वर्ष 2019 में कहीं अधिक लोगों की जान ली। यह बात लैंसेट ने सरकार की ओर से मंगलवार को जारी एक एक रिपोर्ट में कही। इसके अनुसार साल 2019 में देश में 16 लाख 70 हजार लोगों की मौत प्रदूषण की वजह से हुई। इस साल देश में हुई कुल मौतों का यह 18 फीसदी है। वहीं, साल 2017 में यह आंकड़ा 12 लाख 40 हजार (12.5 फीसदी) था।
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इस संबंध में किए गए विश्लेषण में पाया गया कि प्रदूषण से क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी बीमारियां, श्वसन तंत्र में संक्रमण, फेफड़े का कैंसर, हृदय की बीमारियां, स्ट्रोक, डायबिटीज, नियोनेटल डिसऑर्डर और मोतियाबिंद जैसी समस्याएं हुईं। प्रदूषण के कारण 2019 में होने वाली मौतें से भारत को आर्थिक झटका भी लगा है। रिपोर्ट के अनुसार इस साल भारत की जीडीपी में 1.36 फीसदी का नुकसान हुआ।
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वायु प्रदूषण की वजह से हुई असमय मौतों और बीमारियों के कारण 2019 में भारत में 2.6 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.4 प्रतिशत है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पिछले साल देश में 17 लाख मौतों (कुल मौतों का 18 प्रतिशत) की वजह वायु प्रदूषण थी।
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वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य व आर्थिक प्रभाव पर ‘लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ’ में मंगलवार को प्रकाशित एक वैज्ञानिक पत्र के मुताबिक भारत में घरेलू वायु प्रदूषण में कमी आई है जिससे 1990 से 2019 के बीच इसके कारण होने वाली मृत्यु दर में 64 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है जबकि इस दौरान बाहरी वायू प्रदूषण की वजह से होने वाली मृत्युदर में 115 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया।
इसके नतीजों में प्रकाश डाला गया कि वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों और बीमारियों के कारण उत्पादकता में आई कमी से देश की जीडीपी को 1.4 प्रतिशत का नुकसान हुआ। वैज्ञानिक पत्र में कहा गया कि भारत का आर्थिक और विकास का पथ अच्छा है, जिसमें वायु प्रदूषण में कमी लाकर और सुधार किया जा सकता है।
पत्र के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण आर्थिक नुकसान उत्तरी और मध्य भारत के राज्यों की जीडीपी में कहीं ज्यादा है, और उत्तर प्रदेश में यह सबसे ज्यादा (जीडीपी का 2.2 प्रतिशत) और उसके बाद बिहार में (जीडीपी का दो प्रतिशत) है।
नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर विनोद पॉल ने कहा कि वैज्ञानिक पत्र भारत में वायु प्रदूषण पर नवीनतम साक्ष्य प्रस्तुत करता है, जो स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के आर्थिक प्रभाव को व्यक्त करता है।
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण कम करने के लिये भारत ने कई अहम पहल की हैं। यह पत्र प्रवृत्तियों और प्रत्येक राज्य की मौजूदा स्थिति का मजबूत आकलन पेश करता है और इस बात पर प्रकाश डालता है कि प्रत्येक राज्य की विशिष्ट स्थिति के आधार पर मौजूदा वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों को बढ़ाना उपयोगी होगा।
आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ और ‘उन्नत चूल्हा अभियान’ जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं ने देश में घरेलू वायु प्रदूषण कम करने में मदद की है।