राजनीति: निधन के 20 साल बाद भी केंद्र के लिए खतरा बने 'ताऊ', यहां से शुरू हुई थी इंडिया गठबंधन बनने की कहानी
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विस्तार
आज देश अपने पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवी लाल (Chaudhary Devi Lal) की 110वीं जयंती मना रहा है। उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए आज जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने उनकी कर्मस्थली सीकर में 'किसान विजय सम्मान दिवस' का आयोजन किया। इसके जरिए वह राजस्थान में अपना चुनावी बिगुल भी फूंकेगी। ताऊ देवी लाल का एक नारा 'तख्त बदल दो, ताज बदल दो, बेइमानों का राज बदल दो' 1980 के दशक के अंत में बहुत लोकप्रिय हुआ था। उन्होंने तत्त्कालीन केंद्र सरकार के खिलाफ बिगुल फूंका था। सरकार बदलने में उनकी भी मह्त्वपूर्ण भूमिका रही थी। लेकिन इस मौके पर यह जानना महत्त्वपूर्ण होगा कि अपने निधन के लगभग 20 साल बाद भी ताऊ देवी लाल अनजाने में ही वर्तमान केंद्र सरकार के खिलाफ एक चुनौती बनने का कारण कैसे बन गए।
इस तरह इंडिया गठबंधन की पड़ी नींव
दरअसल, इनेलो ने पिछले वर्ष यानी 2022 में चौधरी देवी लाल ताऊ का जन्मदिन का कार्यक्रम हरियाणा में आयोजित किया था। इस अवसर पर पार्टी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित विपक्ष के कई शीर्ष नेताओं को आमंत्रित किया था। इसी कार्यक्रम में विपक्ष के एक शीर्ष नेता ने 2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार से एक गैरभाजपाई-गैरकांग्रेसी विपक्षी गठबंधन बनाने की बात कही थी।
नीतीश कुमार कांग्रेस के पक्ष में
जदयू नेता केसी त्यागी ने बताया कि नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन बनाने के तो इच्छुक थे, लेकिन वे उन्हें ऐसे किसी गठबंधन की सफलता पर संदेह था, जिसमें कांग्रेस शामिल न हो। उनका मानना था कि आज भी कांग्रेस पूरे देश में हर जगह मौजूद सबसे बड़ी पार्टी है। यदि केंद्र में सरकार को बदलना है, तो उसके लिए कांग्रेस का साथ होना आवश्यक है, नीतीश कुमार का यह मानना था। शुरुआती ना-नुकुर के बाद इस कार्यक्रम में मौजूद सभी नेता इस बात पर सहमत हो गए कि कांग्रेस को साथ लेकर ही विपक्षी दलों का कोई गठबंधन बनाया जाए। जिसके सहारे 2024 में भाजपा को चुनौती दी जाए और प्रधानमंत्री को लगातार तीसरी बार सत्ता में आने से रोका जाए। लेकिन इसके लिए कांग्रेस को सहमत करना बहुत जरुरी था। विपक्ष के उन राजनीतिक दलों को सहमत करना भी आसान नहीं था जो कांग्रेस का विरोध कर पैदा हुए थे और आज भी अपने अपने राज्यों में कांग्रेस से मुकाबला कर रहे थे। इन सबको एक गठबंधन के तले लाना आसान नहीं था। लेकिन यह जिम्मेदारी भी नीतीश कुमार के ही कंधों पर ही सौंपी गई। बाद में नीतीश कुमार ने पहले अपने बयानों के आधार पर और बाद में दिल्ली की यात्रा कर कांग्रेस के नेताओं से मिलकर गठबंधन का स्वरूप निर्धारित करने में अहम भूमिका अदा की।
कांग्रेस से शुरुआती सहमति मिलने के बाद उन्होंने देश के दूसरे राजनीतिक दलों को साथ लाने की मुहिम शुरू की। आज इंडिया गठबंधन न केवल आकार ले चुका है, बल्कि भाजपा को कड़ी चुनौती भी दे रहा है। अगले लोकसभा चुनाव का परिणाम चाहे जो भी हो, लेकिन अब भाजपा की राह आसान नहीं रह गई है। और इस नई राजनीतिक कड़ी की पटकथा उसी ताऊ देवी लाल की जन्म जयंती पर रची गई थी, जिन्होंने 1980 के दशक में तत्कालीन सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी।
इस प्रकार चौधरी देवी लाल यानी ताऊ अपने निधन के लगभग 20 साल बाद भी एक बार फिर केंद्र में मौजूद सरकार के लिए खतरा बन गए। हालांकि, इंडिया गठबंधन की कोशिश कितनी कामयाब हो पाएगी, यह देखने वाली बात होगी। वहीं, यह भी महत्त्वपूर्ण है कि स्वयं ताऊ के वंशजों की पार्टी स्वयं इस समय हरियाणा में केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी दल है। दोनों के बीच रिश्ते कुछ खट्टे-मीठे अवश्य हैं, लेकिन इसके बाद भी अभी दोनों साथ बने हुए हैं।