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Politics: 100 वर्षों में एक भी दलित क्यों नहीं बना संघ प्रमुख? आरएसएस को लेकर संजय राउत ने खड़े किए सवाल

Wed, 01 Oct 2025 07:52 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 01 Oct 2025 07:52 PM IST
सार

संजय सिंह ने अंग्रेजों के प्रति आरएसएस की नीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संघ के लोगों को ब्रिटिश सेना में भर्ती क्यों कराया गया और भारत की स्वतंत्रता के प्रतीक तिरंगे का विरोध क्यों किया। उन्होंने यह भी पूछा कि संघ के मुख्यालय पर 52 साल तक तिरंगा क्यों नहीं फहराया गया।
 

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Politics: Why hasn't single Dalit become RSS chief in 100 years? Sanjay Raut raises questions about RSS
संजय राउत, शिवसेना यूबीटी सांसद - फोटो : PTI

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे होने के मौके पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरएसएस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने तीखा हमला करते हुए सवाल किया है कि  एक शताब्दी में कोई भी दलित, पिछड़ा या आदिवासी आरएसएस का प्रमुख क्यों नहीं बना? इस दौरान संजय सिंह ने यह भी कहा कि संघ ने जिन्ना की मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकार बनाने में भागीदारी की थी और आजादी के आंदोलन में क्रांतिकारियों की मुखबिरी की।

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संजय सिंह ने अंग्रेजों के प्रति आरएसएस की नीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संघ के लोगों को ब्रिटिश सेना में भर्ती क्यों कराया गया और भारत की स्वतंत्रता के प्रतीक तिरंगे का विरोध क्यों किया। उन्होंने यह भी पूछा कि संघ के मुख्यालय पर 52 साल तक तिरंगा क्यों नहीं फहराया गया।
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संजय सिंह ने कहा कि राष्ट्र की अखंडता और जनहित के लिए जो लोग नहीं खड़े हुए, हम उनके लिए खड़े नहीं होंगे। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस ने अभी तक जो भी निर्णय लिए और कार्य किए, वे अक्सर जातीय और सांप्रदायिक आधार पर दिखते हैं। उन्होंने संघ की उस छवि पर भी सवाल उठाया जिसमें वह हमेशा सत्ता और सामर्थ्य के साथ जुड़ा दिखता रहा। संजय सिंह के इन सवालों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि अब समय है कि इतिहास और वर्तमान पर नजर डालकर देखा जाए कि आरएसएस ने किस तरह देश के हर वर्ग के लिए काम किया और किस वर्ग को नजरअंदाज किया।  
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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी को आरएसएस पर सरदार पटेल के विचारों की याद दिलाई
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राष्ट्र निर्माण में आरएसएस की भूमिका की सराहना के बाद, कांग्रेस ने उन्हें सरदार पटेल के विचारों की याद दिलाई। सरदार वल्लभभाई पटेल ने उस समय कहा था कि संघ की गतिविधियों ने ऐसा माहौल बनाया जिसके कारण महात्मा गांधी की हत्या हुई।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, प्रधानमंत्री ने आज सुबह आरएसएस के बारे में बहुत कुछ कहा। क्या उन्हें पता भी है कि सरदार पटेल ने 18 जुलाई, 1948 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को क्या लिखा था? उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री पटेल के मुखर्जी को लिखे गए एक पत्र के अंश साझा किए, जिसमें उन्होंने कहा था, जहां तक आरएसएस और हिंदू महासभा का सवाल है, गांधीजी की हत्या से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है और मैं दोनों संगठनों की भागीदारी के बारे में कुछ नहीं कहना चाहूंगा, लेकिन हमारी रिपोर्टें इस बात की पुष्टि करती हैं कि इन दोनों संस्थाओं, खासकर आरएसएस की गतिविधियों के परिणामस्वरूप, देश में ऐसा माहौल बना जिसमें इतनी भयावह त्रासदी संभव हो सकी। इस पत्र में आगे लिखा था, आरएसएस की गतिविधियां सरकार और राज्य के अस्तित्व के लिए एक स्पष्ट खतरा थीं। हमारी रिपोर्टें दर्शाती हैं कि प्रतिबंध के बावजूद, ये गतिविधियां कम नहीं हुई हैं। दरअसल, जैसे-जैसे समय बीत रहा है, आरएसएस के लोग और भी अधिक विद्रोही होते जा रहे हैं और अपनी विध्वंसक गतिविधियों में तेजी से शामिल हो रहे हैं।

 बच्चों को इतिहास पढ़ाना चाहिए, प्रोपोगेंडा नहीं
स्कूलों में संघ के इतिहास को पाठ्यकम में जोड़ने पर कांग्रेस ने कहा कि बच्चों को इतिहास पढ़ाया जाना चाहिए, प्रोपोगेंडा नहीं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) इतिहास को फिर से लिखना चाहता है क्योंकि उसके पास कुछ भी नहीं है। कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, हमारे बच्चे इतिहास पढ़ने के हकदार हैं, प्रचार के नहीं। उन्हें शिक्षा, विज्ञान पढ़ना चाहिए न कि चाहिए, विचारधारा और अंधविश्वास। दिल्ली के स्कूलों को सच पढ़ाना चाहिए, आरएसएस का झूठ नहीं। टैगोर ने कहा, अभी आरएसएस पढ़ाएंगे? आगे नाथूराम गोडसे को देशभक्त के रूप में पढ़ाया जाएगा।
 
संघ पर सिक्का व डाक टिकट जारी करना संविधान का अपमान: सीपीआई(एम)
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने आरएसएस की स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में डाक टिकट और सिक्के जारी करने को संविधान पर गंभीर चोट और अपमान करार दिया। माकपा पोलित ब्यूरो ने कहा कि यह बेहद आपत्तिजनक है कि एक आधिकारिक सिक्के पर आरएसएस की ओर से प्रचारित हिंदू देवी भारत माता की छवि अंकित हो। साथ ही, 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में वर्दीधारी आरएसएस स्वयंसेवकों को दिखाने वाला डाक टिकट भी इतिहास को गलत साबित करता है।

पार्टी ने कहा, आरएसएस की स्थापना की 100वीं वर्षगांठ मनाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा डाक टिकट और 100 रुपये का सिक्का जारी करना भारत के संविधान पर एक गंभीर चोट और अपमान है, जिसे आरएसएस कभी स्वीकार नहीं करता।
 

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